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मंदिरों को भी शेयर बाजार में ले आया चीन

शंघाई से 4 घंटे की यात्रा के बाद झाउशान सिटी में छोटे आइलैंड पर बैठे हुए बुद्ध की 33 मीटर ऊंची मूर्ति स्थापित है।...

Dainik Bhaskar

May 04, 2018, 05:40 AM IST
शंघाई से 4 घंटे की यात्रा के बाद झाउशान सिटी में छोटे आइलैंड पर बैठे हुए बुद्ध की 33 मीटर ऊंची मूर्ति स्थापित है। चीनीयों में वह जगह बहुत पवित्र मानी गई है। शायद इसीलिए हर साल 80 लाख से अधिक लोग वहां आते-जाते हैं। रोजाना 1 लाख रुपए से अधिक का वहां चढ़ावा आता है, जो चीनी नागरिक वहां की पेटियों में डालते हैं। कोई ऐसा करने के लिए कहता नहीं है, लेकिन लोग आस्था में ऐसा करते हैं। वहां दान में आई राशि गिनने का कार्य कर रहे भिक्षु ने बताया कि बौद्ध धर्म में इसे बहुत पवित्र जगह माना गया है, इसीलिए लोग यहां आते हैं और उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो वे खुश होकर धनराशि भेंट चढ़ाते हैं। कुछ लोग उपहार की चीजें भी लाते हैं।

चीन में ऐसे कई धर्मस्थल हैं, जहां पर भारी चढ़ावा आता है। ज्यादातर बौद्ध धर्म से संबंधित स्थल हैं। कुछ प्राचीन मठ भी हैं, जहां पर लोग विशिष्ठ गुरु से मिलने की उम्मीद में जाते हैं। कुछ स्थल ऊंचे पहाड़ों पर हैं, वहां भी लोग जाते हैं। इसके पीछे पहला मत यह है कि वे परंपराओं को बहुत मानते हैं। झाउशान की ही पुतुओशान टूरिज़्म डेवलपमेंट कंपनी ने वहां आने वाली राशि को लेकर अलग प्रस्ताव तैयार किया। वहां की कई पर्यटन संपत्तियों पर उसका अधिकार है, उनकी देखभाल भी वही कंपनी करती है। इसमें फेरी, केबल कार व दुकानें भी शामिल हंै। वर्ष 2012 मेेें इस कंपनी ने इन सेवाओं को आईपीओ में लिस्टेड कर दिया। उसका मानना था कि ऐसा करके 645 करोड़ रुपए जुटा लिए जाएंगे। बौद्ध भिक्षु कंपनी के इस कदम से परेशान हो गए, क्योंकि वे ऐसा नहीं चाहते थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से उनके पवित्र स्थलों की स्थिति ‘एक अन्य शाओलीन’ जैसी हो जाएगी, जो हेनान प्रांत में एक मंदिर के रूप में स्थित है। उसका संचालन एक वरिष्ठ भिक्षु करते हैं, जिन्हें ‘सीईओ मन्क’ कहा जाता है। उन्होंने शाओलिन कुंग फू ब्रैंड एक कम्प्यूटर गेम बनाने वाली कंपनी को लीज़ पर दे दिया है। वे 1900 करोड़ रुपए एकत्र करके ऑस्ट्रेलिया में होटल एवं मंदिर परिसर का निर्माण करवाना चाहते हैं।

पिछले महीने अप्रैल में बौद्ध भिक्षुओं को पुतुओशान टूरिज़्म कंपनी के खिलाफ बड़ी जीत हासिल हुई। चीन के शेयर बाजार नियामक ने उस कंपनी से कहा कि उसके आईपीओ का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि पवित्र स्थलों और प्राचीन मठों वाली जगहों को मुनाफा कमाने की जगह नहीं बनाया जा सकता है। टूरिज़्म कंपनी ने दलील दी कि उसके प्रस्ताव में पवित्र स्थल शामिल नहीं हैं।

पेन्सिलवेनिया स्थित मोरवियन कॉलेज में एशियाई आस्था और अर्थव्यवस्था पर शोध करने वाले किन चियुंग ने कहा, व्यापार और बौद्ध धर्म में हमेशा सद्‌भाव रहा है। चीन के इतिहास में उल्लेख है कि कुछ दुकानों का संचालन बौद्ध मठों द्वारा किया जाता था। वे किसानों को जमीन लीज़ पर भी देते थे। बाद में जैसे-जैसे सांस्कृतिक बदलाव होता गया, स्थानीय सरकारों ने भिक्षुओं से उनकी जमीनें ले लीं। उन जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं। लोगों को आकर्षित करने के लिए मंदिरों तक रास्ते तैयार करके वहां दुकानें खोली गईं। स्थानीय सरकारों ने उन मंदिरों तक जाने के लिए पर्यटकों से प्रवेश शुल्क लेना शुरू किया। उदाहरण के तौर पर माउंट पुतुओ में प्रवेश करने के लिए 2000 रुपए तक लिए जाते हैं। यही कारण है कि शोधकर्ता चियुंग मानते हैं कि पवित्र स्थलों के नाम पर आईपीओ लाने का अगला कदम चीनी पूंजीवाद और बौद्ध धर्म के सामंजस्य स्थापित करेगा।

कुछ स्थलों पर ऐसा पहले ही किया जा चुका है। वहां चार पवित्र पर्वतों को धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। इसमें माउंट इमेइ है, जो सिचुआन प्रांत में है। 1997 में वहां की स्थानीय पर्यटन कंपनी ने उस जगह को शेनजेन शेयर बाजार में लिस्टेड करके उसका टिकट नंबर 000888 हासिल किया। उसके कारण ऊंचे पर्वत पर फैन्सी होटल तैयार िकया गया और वहां से होने वाली आय 12 गुना बढ़कर 1000 करोड़ से अधिक हो गई। इसी तरह अन्हुइ प्रांत में माउंट जिउहुआ है, उसे 2015 में शंघाई शेयर बाजार में लिस्टेड किया गया (2004 एवं 2009 में प्रस्ताव खारिज हो गया था)। शान्शी राज्य स्थित माउंट वुताई के लिए आईपीओ लाने की योजना 2010 से है, संभव है कि इस वर्ष दिसंबर तक ऐसा हो जाएगा।

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बिज़नेस... चीन में बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों को शेयर मार्केट में लिस्टेड करने की 10 साल पुरानी प्रक्रिया आज भी जारी है। ऐसा करके अरबों रुपए राजस्व अर्जित किया जा रहा है।

राजस्व अर्जित करने के लिए राज्यों की पर्यटन एजेंसियों ने पहाड़ियों पर स्थित तीर्थ स्थलों पर का भी व्यवसायीकरण कर दिया है। मंदिरों के पास ही होटल व रिजॉर्ट तैयार किए जा रहे हैं, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़े। उन स्थलों का जमकर प्रचार किया जाता है, जो दूरस्थ एवं ऊंचाई पर स्थित हैं।

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