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गौवंश शहर की सड़कों पर घूम-घूम कर जान ले रहे हैं और करोड़ों खर्च करने पर भी आश्रय स्थल खाली

भरतपुर। नुमाइश मैदान पर 10 बीघा जमीन पर बना है गोवंश आश्रय स्थल। आप भी जानिए क्या चाहते हैं भरतपुर शहर के नागरिक...

Bhaskar News Network| Last Modified - May 10, 2018, 05:40 AM IST

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गौवंश शहर की सड़कों पर घूम-घूम कर जान ले रहे हैं और करोड़ों खर्च करने पर भी आश्रय स्थल खाली
भरतपुर। नुमाइश मैदान पर 10 बीघा जमीन पर बना है गोवंश आश्रय स्थल।

आप भी जानिए क्या चाहते हैं भरतपुर शहर के नागरिक

भाजपा जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह का कहना है कि इस घटना के लिए निगम के गोवंश को पकड़ने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी जिम्मेदार हैं। विहिप के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ फौजदार ने का कहना है कि विहिप की ओर से सेवर के पास ग्राम उत्थान केंद्र शुरू किया जा रहा हैं। जिसमें गायों के दूध, मूत्र से बने उत्पादों उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

हमेशा की तरह ही जिम्मेदारी से बचने का सरकारी बहाना

आवारा गोवंश को लेकर जब कलेक्टर और जिम्मेदार मेयर एवं आयुक्त से बात की गई तो उनका वर्षों पुराना एक ही सरकारी बहाना है कि हम आवारा गोवंश को पकड़वाते तो हैं, लेकिन कोई भी गौशाला इन्हें लेने को तैयार नहीं है। जबकि निगम ने एक करोड़ खर्च करके भरतपुर में ही गौ-आश्रय स्थल बनवाया है। वहां पर्याप्त मात्रा में चारा-पानी की व्यवस्था होने का दावा भी किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि वहां ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है।

भरतपुर। 1 करोड़ रुपए आश्रय स्थल के निर्माण पर खर्च करने के बाद सूना पड़ा है टीनशेड।

भरतपुर। निगम की अापात बैठक में मृतक बालक का पिता चौखाने की हरी शर्ट पहने हुए।

जिम्मेदार मेयर और पार्षदों ने ऐसे बचाई अपनी-अपनी नाक

कुणाल की मौत के बाद लोगों ने कोसा तो निगम बोर्ड की आपात बैठक बुलाई। वोटों की राजनीति शुरू हुई, क्योंकि मृतक अनुसूचित जाति के एक गरीब जाटव परिवार से था। मेयर शिव सिंह भोंट ने मृतक के परिवार को 20 लाख रुपए देने की घोषणा की। इसमें 4 लाख निगम से, 50 हजार मुख्यमंत्री सहायता कोष और 15.50 लाख रुपए की सहायता राशि दिए जाने के लिए बोर्ड में प्रस्ताव पारित कर स्थानीय निकाय निदेशालय को भेजा गया है। सभी 53 पार्षदों ने भी एक-एक माह का वेतन दिया है।

गौवंश शहर की सड़कों पर घूम-घूम कर जान ले रहे हैं और करोड़ों खर्च करने पर भी आश्रय स्थल खाली
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