Hindi News »Rajasthan »Nagar» प्रमोशन कोटा सिर्फ 33%, बतौर एसपी- कलेक्टर फील्ड में पोस्टिंग पा रहे 49 से 70 प्रतिशत तक

प्रमोशन कोटा सिर्फ 33%, बतौर एसपी- कलेक्टर फील्ड में पोस्टिंग पा रहे 49 से 70 प्रतिशत तक

राजस्थान में आईएएस, आईपीएस के प्रमोशन कोटा और फील्ड में पोस्टिंग पाने के बीच का संतुलन बुरी तरह गड़बड़ा गया है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 22, 2018, 05:40 AM IST

राजस्थान में आईएएस, आईपीएस के प्रमोशन कोटा और फील्ड में पोस्टिंग पाने के बीच का संतुलन बुरी तरह गड़बड़ा गया है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा, अन्य सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा में और राजस्थान पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोशन के लिए महज 33 फीसदी कोटा ही तय है, लेकिन जैसे ही फील्ड में कलेक्टर और एसपी बनने की बात आ रही है। उसमें प्रमोशन कोटे के अफसर बाजी मार ले रहे हैं। फील्ड में 33 के बजाय 49 से लेकर 70 फीसदी तक पोस्टिंग पा रहे हैं। इससे सीधे तौर पर डायरेक्ट आईएएस और आईपीएस बनने वालों को समय से कलेक्टर और एसपी बनने का मौका नहीं मिल पा रहा है। सरकार उन्हें फील्ड में लगाने के बजाय आफिसों में बैठाकर सेवाएं ले रही है। राज्य के छह जिले बीकानेर, टोंक, सवाई माधोपुर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और झूंझनूं तो ऐसे हैं, जहां कलेक्टर और एसपी दोनों ही प्रमोटी लगे हुए हैं।

रियलिटी

चैक

राजस्थान में आईएएस और आईपीएस में राज्य सेवा अफसरों के प्रमोशन कोटा और उनकी फील्ड में पोस्टिंग का संतुलन गड़बड़ाया हुआ है ...इसी पर भास्कर की विशेष रिपोर्ट

आईएएस का समीकरण समझिए

प्रदेश में आईएएस के 313 अफसरों का कैडर स्वीकृत है, लेकिन 257 अफसर ही सेवाएं दे रहे हैं। प्रमोशन कोटे के लिए 91 सीटें तय हैं। इसमें से 89 प्रमोटी आईएएस अफसर सेवाएं दे रहे हैं। यानी केवल दो सीटें ही खाली हैं, जबकि सीधी भर्ती की 68 सीटें खाली हैं। हर प्रमोटी आईएएस की इच्छा होती है कि वह कम से एक बार जिले में कलेक्टर बन जाए। आज 33 जिलों में से 16 जिलों में प्रमोटी आईएएस कलेक्टर लगे हुए हैं। यानी 49 फीसदी कलेक्टरों की सीटें प्रमोटी आईएएस के पास हैं। सीधी भर्ती वाले 16 से अधिक आईएएस सचिवालय से लेकर विभागों तक में सेवाएं दे रहे हैं।

राजनेताओं को आखिर क्यों प्रमोटी अफसरों पर भरोसा ज्यादा ?

प्रमोटी आईएएस या आईपीएस अफसरों का स्थानीय नेताओं से तालमेल या सामंजस्य बेहतर होता है। इस कारण नेता प्रमोटी अफसरों को अपने जिले में ले जाना अधिक पसंद करते हैं। लंबे समय तक फील्ड में रहने के कारण उनके नेटवर्क ज्यादा होता है। नेताओं के लिए ज्यादा सहूलियत होती है। डायरेक्ट वाले आईएएस या आईपीएस के राजनेताओं का ज्यादा तालमेल नहीं बैठ पाता और ज्यादा कानून-कायदों से चलने पर उनकी शिकायतें होने लगतीं हैं। इसके कारण नए डायरेक्ट वाले आईएएस-आईपीएस नेताओं को पसंद नहीं होतेा। हालांकि नियम कानून से चलने से आम आदमी को अधिक लाभ होता है।

प्रमोटी कलेक्टर वाले 16 जिले :जालौर में बाबूलाल कोठारी, श्रीगंगानगर में घनाराम, दौसा में नरेश कुमार शर्मा, बीकानेर में नरेंद्र कुमार गुप्ता, प्रतापगढ़ में बीएल मेहरा, झुंझुनूं में दिनेश कुमार यादव, धौलपुर में नन्नूमल पहाड़िया, बारां में एसपी सिंह, पाली में सुधीर कुमार शर्मा, सीकर में नरेश कुमार ठकराल, सिरोही में बाबूलाल मीणा, टोंक में रामचंद्र बेनीवाल, सवाई माधोपुर में पीसी पवन, बूंदी में महेश चंद्र शर्मा, हनुमानगढ़ में डीसी जैन और डूंगरपुर में राजेंद्र भट्ट।

21 जिलों में प्रमोटी एसपी :चित्तौड़गढ़ में पीके खमेसरा, अजमेर में राजेंद्र सिंह, बीकानेर में सवाई सिंह गोदारा, भरतपुर में अनिल कुमार टांक, सिरोही में ओमप्रकाश, धौलपुर में राजेश सिंह, उदयपुर में राजेंद्र प्रसाद गोयल, बांसवाड़ा में कालूराम रावत, करौली में अनिल कुमार, भीलवाड़ा में प्रदीप मोहन शर्मा, पाली में दीपक भार्गव, झुंझुनूं में मनीष कुमार अग्रवाल, बारां में डीडी सिंह, प्रतापगढ़ में शिवराज मीणा, जयपुर ग्रामीण में रामेश्वर सिंह, हनुमानगढ़ में यादराम, टोंक में योगेश दाधीच, राजसमंद में मनोज कुमार, सवाई माधोपुर में एमएस यादव, जोधपुर ग्रामीण में राजन दुष्यंत, डूंगरपुर में शंकर दत्त शर्मा।

प्रमोटी आईपीएस तो सब पर भारी

प्रदेश में 182 आईपीएस अफसर हैं। इनमें 58 अफसर प्रमोशन कोटे के हैं और इसमें से 21 जिलों में प्रमोटी आईपीएस अफसरों को जिले की कप्तानी दी गई है। यानी फील्ड में 70% प्रमोटी अफसरों को सरकार ने मौका दिया है। वहीं, डायरेक्ट सेवा वाले आईपीएस अफसर एसीबी, सीबी सीआईडी सहित अन्य स्थानों पर लगे हुए हैं।

फील्ड पोस्टिंग को लेकर संतुलन बनाने का काम राज्य सरकार का है। यह सही है कि प्रमोटी अफसरों के पास अनुभव होता है। सरकार को इसका लाभ उठाना चाहिए, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि डायरेक्ट सेवा वाले आईएएस और आईपीएस अफसरों में से कोई कलेक्टर-एसपी बने या फील्ड पोस्टिंग पाने से वंचित रह जाए। सीधे आईएएस बने अधिकारी ही आगे जाकर सचिव से लेकर मुख्य सचिव तक बनते हैं। इसी तरह ही ये उच्च स्तर पर आईपीएस पहुंचते हैं। अगर इन्हें फील्ड पोस्टिंग का अच्छा अनुभव नहीं होगा तो भविष्य में उच्च स्तर पर सही फैसले कैसे ले पाएंगे या सरकार को सही सलाह कैसे दे पाएंगे।

-इंद्रजीत खन्ना,

पूर्व मुख्य सचिव

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Nagar News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: प्रमोशन कोटा सिर्फ 33%, बतौर एसपी- कलेक्टर फील्ड में पोस्टिंग पा रहे 49 से 70 प्रतिशत तक
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Nagar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×