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लांसेट की रिपोर्ट ने बताया कि जीडीपी वृद्धि ही विकास नहीं

करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच महेश तिवारी, 20 माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, भोपाल ...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 26, 2018, 05:40 AM IST

लांसेट की रिपोर्ट ने बताया कि जीडीपी वृद्धि ही विकास नहीं
करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच

महेश तिवारी, 20

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, भोपाल

maheshjournalist1107@gmail.com

हम और हमारी व्यवस्था जिस दौर में विकास दर में बढ़ोतरी पर गर्व कर रही है, उस दौर में अगर ब्रिटेन की स्वास्थ्य जगत से जुड़ी लांसेट पत्रिका यह कहती है कि भारत स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में भूटान और बांग्लादेश जैसे राष्ट्रों से भी पीछे है, तो यह शर्मनाक स्थिति है। लांसेट की रिपोर्ट ने इस धारणा की बखिया भी उधेड़ने का काम किया है, जिसके मुताबिक अभी तक यह माना जाता रहा है कि विकास दर में वृद्धि ही सब कुछ होती है। यह स्वयंसिद्ध है कि जीडीपी में वृद्धि को ही विकास का पैमाना नहीं कहा जा सकता। अब आवश्यकता इस बात की है कि जन-स्वास्थ्य, सामाजिक शांति, स्वास्थ्य, सौहार्द तथा प्रसन्नता जैसे मानकों को विकास की कसौटी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाए।

अपने नागरिकों के जीवन की रक्षा करना किसी भी सरकार का सबसे बड़ा दायित्व होता है, लेकिन अगर स्वास्थ्य मद पर जीडीपी का सबसे कम ख़र्च होता है तो यह चिंताजनक स्थिति है। हमारे देश में प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल बदहाली के पर्याय पहले ही बन चुके हैं। इसके अलावा भी देश के भीतर सेहत को संकट में डालने वाले कारक मौजूद हैं, जिसमें प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी, सरकारी अस्पतालों में साधनों का अभाव, प्रदूषण की गिरफ्त में फंसती जीवनशैली आदि शामिल हैं।

इसके अलावा मिलावट का बढ़ता कारोबार भी समाज को बीमार बनाने पर तुला हुआ है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर किसी रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में अगर पिछले साल सीएजी की रिपार्ट में जिक्र हुआ था कि 24 राज्यों के पास ज़ुकाम, पेट दर्द और बुख़ार की दवाएं तक उपलब्ध नहीं तो कोई अचरज नहीं। इस स्थिति में सुधार होना चाहिए, क्योंकि स्वस्थ जीवन मयस्सर होना लोगों का अधिकार है। हमारी अर्थव्यवस्था को जीडीपी दर बढ़ाने के जुनून से बाहर आकर नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देना होगा। ऐसा होने पर ही आर्थिक तरक्की की सार्थकता सिद्ध हो सकेगी।

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