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सम्मान और अस्तित्व के संघर्ष में उतरे केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर में अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ साथियों सहित...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 05:45 AM IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर में अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ साथियों सहित धरने पर बैठकर दिल्ली के नागरिकों के बहाने अपने सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार से उनके रिश्तों को देखते हुए वह हासिल करना आसान नहीं है। वे चाहते हैं कि उपराज्यपाल आईएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराएं, क्योंकि सर्विस विभाग के प्रमुख वे ही हैं। उनकी दूसरी मांग है कि काम रोकने वाले आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई हो और तीसरी मांग है कि राशन की डोर-स्टेप डिलीवरी योजना को मंजूरी दें। पहले के उपराज्यपाल नजीब जंग से बेहतर कहे जाने वाले अनिल बैजल भी उनसे मिलने को तैयार नहीं हैं। उपराज्यपाल के दफ्तर के बाहर सोफे पर लेटे हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को देखकर सचमुच लोकतंत्र का मजाक होता हुआ दिखाई पड़ता है। यह टिप्पणी कांग्रेस और भाजपा ने की भी है लेकिन, उन्होंने लोकतंत्र के मजाक का आरोप केजरीवाल पर लगाया है। अगर इस टकराव में सारी गड़बड़ियों का ठीकरा केजरीवाल के माथे ही फोड़ा जाएगा तो अन्याय होगा। सही है कि दिल्ली सरकार को संविधान में जितनी शक्तियां हैं वह किसी नगर निगम के प्रमुख जैसी ही हैं, जबकि केजरीवाल का सत्तारोहण उस तरह से हुआ था जैसे वे प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे हों। केजरीवाल के नवलोकतांत्रिक क्रांति के सपनों और हकीकत के बीच काफी अंतर आ चुका है। केंद्र सरकार ने उन्हें काम करने से रोकने और उनके लोगों को भ्रष्टाचार के आरोपों में लपेटने का कोई अवसर हाथ से जाने नहीं दिया है। हालांकि, केजरीवाल ने आरंभ में टकरावपूर्ण नीति के कारण भाजपा सरकार को मौका उपलब्ध कराने में कोताही भी नहीं की है। इसलिए लोकतंत्र के इस मजाक में सिर्फ केजरीवाल ही नहीं केंद्र सरकार भी शामिल है। ऐसे समय जब संघ ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को बुलाकर संवाद का सिलसिला शुरू किया हो और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह देश में गणमान्य नागरिकों से मिलने का अभियान चलाए हुए हों तब उनकी सरकार की नाक के नीचे उपराज्यपाल का एक मुख्यमंत्री से न मिलना चिंताजनक है। केजरीवाल अब दिल्ली को पूर्ण राज्य देने का मुद्‌दा भी उठाने जा रहे हंै तथा इसमें शामिल होने के लिए जनता का आह्वान कर रहे हैं। लगता है दिल्ली आने वाले समय में फिर नए प्रतिरोध का मंच बनेगी।

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