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सीएफसीडी का पुराना स्वरूप हो सकता है बहाल, हाईकोर्ट ने मंजूर की याचिका

Danik Bhaskar | May 04, 2018, 05:45 AM IST

भरतपुर| सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (सीएफसीडी) का पुराना स्वरूप बहाल किया जा सकता है। वजह यह है कि हाईकोर्ट के ही एक आदेश के मुताबिक प्रदेश की सभी वाटर बॉडीज का स्वरूप वर्ष 1955 के मुताबिक बहाल करने के संबंध में दायर याचिका राजस्थान हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है।

इस मामले की सुनवाई अब जयपुर की द्रव्य वती नदी और रामगढ़ बांध मामलों के साथ ही होगी। क्योंकि भरतपुर की सीएफसीडी से संबंधित याचिका को इन मामलों के साथ जोड़ दिया गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने भरतपुर के जिला कलेक्टर और नगर विकास न्यास के सचिव को 17 मई को राजस्थान हाईकोर्ट में तलब किया है। उल्लेखनीय है कि एडवोकेट श्रीनाथ शर्मा ने 24 अप्रैल को न्यायाधीश मनीष भंडारी एवं दिनेश सोमानी की खंडपीठ में याचिका लगाई थी। इसमें रामगढ़ बांध के सिलसिले में कोर्ट द्वारा स्वेच्छा से लिए गए प्रसंज्ञान मामले में भरतपुर की सीएफसीडी को भी शामिल किए जाने का अनुरोध किया था। एडवोकेट शर्मा ने बताया कि हमारी ओर से एप्लीकेशन में कहा गया है कि रामगढ़ बांध प्रकरण में जयपुर की द्रव्य वती नदी सहित प्रदेशभर की वाटर बॉडीज का स्वरूप वर्ष 1955 की स्थिति के अनुसार बहाल किए जाने का आग्रह किया गया। क्योंकि सीएफसीडी भरतपुर के लिए प्राइम लाइफ लाइन होने के साथ ही ऐतिहासिक धरोहर भी है। इसलिए द्रव्य वती नदी की तरह ही सीएफसीडी को भी पुनर्जीवित किया जाए। जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सारांश शर्मा ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान सीएफसीडी से संपूर्ण अतिक्रमण हटवाने, पट्टे निरस्त करने, सीएफसीडी की डीपीआर में अटल बंद गणेश मंदिर से बी-नारायण गेट, मथुरा गेट से जघीना गेट तक का हिस्सा भी शामिल किए जाने, कच्ची खाई में निर्माण परमिशन निरस्त करने और जिन अफसरों के कार्यकाल में अतिक्रमण हुए हैं उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया गया है। सीएफसीडी की डीपीआर दो बार बन चुकी है। पहली डीपीआर 2016 में बनी थी, जिसे 80 फीट के चौड़ाई में बनाना तय किया था। जिसमें 40 फीट का नाला और दस-दस फीट की दोनों और फुटपाथ और ग्रीनरी डवलप की जानी थी।