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अाप सेवा को उच्च स्तर पर कैसे ले जा सकते हैं?

जब कोई पुलिस की मदद मांगता है तो यह बहुत आम तरीका है कि बिना किसी भावना दिखाए सपाट चेहरे से वे पूछते हैं, ‘पता क्या...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 05, 2018, 05:45 AM IST

अाप सेवा को उच्च स्तर पर कैसे ले जा सकते हैं?
जब कोई पुलिस की मदद मांगता है तो यह बहुत आम तरीका है कि बिना किसी भावना दिखाए सपाट चेहरे से वे पूछते हैं, ‘पता क्या है?’ फिर वे यह देखते हैं कि जगह उनके अधिकार क्षेत्र में है या नहीं और फिर वे मदद देने या शिकायत दर्ज करने का फैसला करते हैं। वे यह भी कह सकते हैं, ‘यह पता हमारे क्षेत्र में नहीं आता, अगले थाने पर जाइए।’ मुझे नहीं मालूम कि आपमें से कितने लोगों ने यह बहाना सुना है लेकिन, मुंबई के माटुंगा पुलिस थाने में आने वाले ज्यादातर फरियादी को यह सुनना पड़ता है, क्योंकि पड़ोस की इमारत में सायन पुलिस थाना है, जो मुंबई के एक और उपनगर का थाना है। वहां पुलिसकर्मियों में भी प्राय: भ्रम रहता है कि शिकायत लेकर आने वाले का इलाका किसका है।

लेकिन, इस बुधवार को अलग ही कहानी थी। 90 वर्षीय एरुच बलसारा का परिवार तब घबरा गया, जब उन्होंने बार-बार खटखटाने व डोरबेल बजाने के बाद भी दरवाजा नहीं खोला। अनहोनी की आशंका से घबराकर उनकी भतीजी नाज़नीन और अन्य रिश्तेदार शाहरुख मारोलिया माटुंगा पुलिस थाने गए। बलसारा के पुत्र सिंगापुर में रहते हैं और आठ दिन पहले उनकी प|ी भी सिंगापुर चली गई थीं। मारोलिया उनके लिए खाना लेकर आए थे और इसलिए उन्होंने दरवाजा खटखटाया। शिकायत मिलने पर ड्यूटी ऑफिसर उर्मिला किरदत ने बिल्कुल समय नहीं गंवाया, क्योंकि शिकायतकर्ताओं ने ही यह सोचकर दो घंटे बर्बाद कर दिए थे कि बुजुर्ग सज्जन सो रहे हैं। उन्होंने पहले फायर ब्रिगेड को अलर्ट किया और फिर पुलिस वैन लेकर वहां पहुंच गईं। जालियां, सलाखें आदि काटने में तीन घंटे लग गए पर फर्स्ट फ्लोर के प्लैट का मुख्य दरवाजा अब भी मजबूती से लगा था।

फिर फायर ब्रिगेड ने किचन ग्रिल को तोड़कर खोला, फ्लैट में प्रवेश किया और मुख्य दरवाजा खोला। उन्हें बलसारा सोफे पर बेहोश पड़े मिले पर उनकी सांस चल रही थी। उर्मिला खुद लगातार एम्बुलेंस के लिए कॉल करती रहीं पर वह कभी नहीं आई। उन्हें 25 किलोमीटर दूर ब्रीच कैंडी अस्पताल के नियमित मेडिकल सपोर्ट सिस्टम तक पहुंचाना बहुत जरूरी था। लेकिन, प्रोटोकॉल के मुताबिक सायन पुलिस अपने क्षेत्र में अस्पताल तक मदद उपलब्ध करा सकती थी। उर्मिला जानती थीं कि जान बचाने की दृष्टि से हर पल कीमती है, जो बीत रहे थे।

उर्मिला, ड्राइवर और तीन कॉन्टेबल्स ने बलसारा को दो रिश्तेदारों के साथ ब्रीच कैंडी अस्पताल तक छोड़ने की जिम्मेदारी ली। एम्बुलेंस नहीं थी, न ऑक्सीजन मास्क ऊपर से ट्रैफिक की बुरी हालत, कुछ भी हो सकता था। चार दिन के अवकाश के बाद बुधवार पहला कामकाजी दिन था, इसलिए ट्रैफिक की हालत बहुत खराब थी। तब उर्मिला ने ड्राइवर को विपरीत दिशा की लेन में चलाने के लिए कहा ताकि जल्दी पहुंचा जा सके। कॉन्सटेबल रेडियो का इस्तेमाल करके लगातार ट्रैफिक पुलिस से कहते रहे, ‘अंदर पेशेंट है, इमरजेंसी है। रास्ता खाली करो।’ वे उन बुजुर्ग को सुरक्षित अस्पताल ले जाने में कामयाब रहे। बाद में पुलिस ने बलसारा को बिस्तर पर सुकून के साथ आराम करते देखा। उन्होंने जो वक्त पर फुर्ती दिखाई उसके लिए बलसारा के चेहरे पर कमजोर मुस्कान के साथ आभार की भावना भी थी। पुलिस दल वहां से भीगी आंखें लेकर लौटा। गुरुवार को मुंबई पुलिस कमिश्नर दत्ता पडसालगीकर ने अपने ट्वीट में सराहना करते हुए लिखा, ‘मिस्टर बलसारा मुंबई पुलिस आपकी मदद करके बहुत खुश है और हमारी सेवाओं को एक स्तर ऊपर ले जाते देखना हमेशा ही सुखद होता है!’

फंडा यह है कि  यदि आप ड्यूटी के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो प्रोटोकॉल तोड़कर सेवाओं को एक स्तर ऊपर ले जा पाते हैं।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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