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ओवरलोड सिस्टम ने छीना 4 हजार घरों का सुख-चैन

जयपुर डिस्कॉम के इंजीनियरों की लापरवाही व कुप्रबंधन के कारण शहर के लाखों उपभोक्ताओं की रात को नींद व दिन का चैन...

Danik Bhaskar | May 17, 2018, 05:50 AM IST
जयपुर डिस्कॉम के इंजीनियरों की लापरवाही व कुप्रबंधन के कारण शहर के लाखों उपभोक्ताओं की रात को नींद व दिन का चैन छिन गया है। शहर के 4 हजार घरों में रोज घोषित व अघोषित बिजली गुल हो रही है। गर्मी व ज्यादा तापमान के कारण इस साल रोजाना 178 लाख यूनिट बिजली की रिकॉर्ड खपत हो रही है, जो पिछले साल 2017 के मुकाबले 31 लाख यूनिट यानी 20% ज्यादा है। वहीं, इस दाैरान 738 ट्रांसफार्मर नए लगाए गए हैं। 500 की क्षमता को बढ़ाया गया है। 2016 और 2017 के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन की खपत महज 6 लाख यूनिट ही बढ़ी थी, 739 नए ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर ही सवाल उठ रहे हैं कि पिछले साल के मुकाबले 5 गुना बिजली की खपत रोजाना बढ़ी है, ट्रांसफार्मरों की संख्या पिछले साल जितनी ही बढ़ाई। बिजली कंपनी ने इस साल 10 फीसदी खपत बढ़ने का आंकलन किया था, लेकिन ट्रांसफार्मर की संख्या नहीं बढ़ाई गई। ओवरलोड सिस्टम के कारण बिजली के ट्रांसफार्मर, आरएमयू, फ्यूज में ट्रिपिंग व फॉल्ट हो रहे है। शहर के बाहरी इलाकों जगतपुरा, सांगानेर, खोनागोरियान, हरमाड़ा, झोटवाड़ा, भांकरोटा, पृथ्वीराजनगर, बैनाड़ रोड क्षेत्र में दिक्कत सबसे ज्यादा है।

बिजली खपत 2016 के मुकाबले 2017 में 6 लाख यूनिट रोजाना बढ़ी थी, इस बार 31 लाख यूनिट बढ़ गई

पिछले 5 साल का यह रहा बिजली सप्लाई ट्रैक

साल उपभोक्ता ट्रांसफार्मर प्रतिदिन सप्लाई

मई 2018 8.41 लाख 13,594 178 लाख यूनिट

मई 2017 8.10 लाख 12,856 147 लाख यूनिट

मई 2016 7.86 लाख 12, 117 141 लाख यूनिट

मई 2015 7.52 लाख 11, 573 146 लाख यूनिट

मई 2014 7.32 लाख 11, 253 118 लाख यूनिट

गर्मी पड़ रही है, बिजली की खपत बढ़ गई है

हम भी मेंटेन कर रहे हैं : अधीक्षण अभियंता

जयपुर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता अजित सक्सेना का कहना है कि सिस्टम की मेंटेनेंस की जा रही है, लेकिन बिजली की खपत में बहुत बढ़ोत्तरी हुई है। हमारी कोशिश है कि 2 घंटे में बिजली गुल की शिकायत का निस्तारण कर दें। इसके लिए डिविजन व सबडिवीजन लेवल पर भी शिकायत केंद्र व मॉनिटरिंग के लिए इंजीनियर लगाए है।

क्यों हो रही है बत्ती गुल

शहर में इन दिनों तापमान 41 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहता है

31 हजार बढ़े है, पिछले एक साल में बिजली के कनेक्शन।

31 लाख यूनिट खपत बढ़ी है। सिस्टम इम्प्रूवमेंट के लिए फील्ड में ज्यादा काम नहीं हुआ।


उठा सवाल : मेंटेनेंस शेड्यूल पर...हमेशा देर क्यों करते हैं

बिजली कंपनी ने हर साल 1 अप्रैल से 30 जून (दो महीने) तक मानसून पूर्व की मेंटेनेंस का शेड्यूल तय कर रखा है। इन दो महीनों में अधिकतम तापमान के कारण तेज गर्मी रहती है। आंधी व बूंदाबांदी के कारण भी लोगों को अघोषित बिजली कटौती झेलनी पड़ती है। जिन इलाकों में मेंटेनेंस हो चुकी है, उन क्षेत्रों में भी आंधी व बारिश आने के बाद बिजली गुल हो जाती है। ऐसे में बिजली कंपनी के मेंटेनेंस शेड्यूल पर सवाल उठने लगे है। सिस्टम मेंटेनेंस के लिए तीन बार बिजली कटौती की जाती है।

रोजाना रात 8 से 11 बजे व दोपहर 1 से 4 बजे तक डिमांड बढ़ने के कारण सिस्टम ओवरलोड हो जाता है। इससे ट्रांसफार्मर, आरएमयू गरम हो जाते हैं और देर रात सिस्टम व बाहरी तापमान में अंतर के कारण ट्रिपिंग व फॉल्ट के मामले बढ़ गए हैं, जिससे कई इलाकों में रातभर बिजली बंद रहती है।

एक्सपर्ट व्यू : फरवरी व मार्च में छोटे - छोटे ब्लॉक में हो सिस्टम की मेंटेनेंस

बिजली विभाग के रिटायर्ड एक्सईएन आरके सिंह का कहना है कि रूटीन मेंटेनेंस फरवरी से मार्च तक हो, ताकि तापमान कम होने के कारण लोगों को दिक्कत नहीं हो। बहुत जरूरी होने पर ही गर्मी में एक से डेढ़ घंटे की कटौती के बाद मेंटीनेंस होना चाहिए वह भी कर छोटे- छोटे ब्लॉक में। इसकी उपभोक्ताओं को पहले सूचना दी जानी चाहिए।