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पाक विस्थापितों से वसूली करते हुए गृह मंत्रालय का अफसर गिरफ्तार

पाकिस्तान से भारत आए विस्थापितों से वसूली मामले में गृह मंत्रालय का सीनियर सेक्रेट्रेट असिस्टेंट (एसएसए) पंकज...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 19, 2018, 05:50 AM IST

पाक विस्थापितों से वसूली करते हुए गृह मंत्रालय का अफसर गिरफ्तार
पाकिस्तान से भारत आए विस्थापितों से वसूली मामले में गृह मंत्रालय का सीनियर सेक्रेट्रेट असिस्टेंट (एसएसए) पंकज कुमार मिश्रा और तीन दलाल गिरफ्तार किए गए हैं। एसीबी ने इन्हें पाल बाईपास स्थित कस्तूरी आर्चिड होटल से गिरफ्तार किया। यह राशि विस्थापितों को लांग टर्म वीजा दिलाने, वीजा ट्रांसफर करने तथा नागरिकता में मदद करने के बदले में वसूली जा रही थी। गिरफ्तार दलाल अशोक, भगवानाराम व गोविंद हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दिन में यह अफसर हाईकोर्ट में पाक विस्थापितों के हक की बात करता था और रात को होटल में उन्हीं से दलालों के जरिये रकम वसूलता था। बता दें कि दैनिक भास्कर में विस्थापितों के संबंध में प्रकाशित खबरों को जनहित याचिका मान कर हाईकोर्ट लगातार सुनवाई कर रहा है। गृह मंत्रालय का एसएसए मिश्रा केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए दिल्ली से जोधपुर आता था। वह शुक्रवार को होने वाली सुनवाई के लिए गुरुवार रात ही पहुंच गया था और रात को राशि वसूल रहा था। एसीबी सुनवाई के लिए उसे अपनी कस्टडी में हाईकोर्ट ले गई।

दिन में विस्थापितों के हक की बात, नागरिकता दिलाने के लिए रात में उन्हीं से वसूली

एसीबी की कस्टडी में हाईकोर्ट में पेश होने जाते पीके मिश्रा।

जयपुर तक नेक्सस

एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा ने बताया कि एसीबी की जयपुर स्थित इंटेलीजेंस विंग को पाक विस्थापितों से वसूली की सूचना मिली थी। इसके बाद मिश्रा को सर्विलांस पर ले लिया गया। शुक्रवार को होटल में उसे दलालों से पैसा लेते हुए पकड़ लिया गया। पूछताछ में मिश्रा ने खुलासा किया कि उसका नेक्सस जोधपुर ही नहीं, जयपुर में भी बना हुआ है। उसके खिलाफ रिश्वत लेने का केस दर्ज किया गया है।

राजस्थान से मूव फाइलों को अटकाता, दलालों के मार्फत वसूली

एसीबी की पूछताछ में गृह मंत्रालय के एसएसए पंकज कुमार मिश्रा ने खुलासा किया कि वह गृह मंत्रालय की विदेश शाखा में है, जहां विस्थापितों के मामले डील किए जाते हैं। वह तीन साल से राजस्थान के दलालों के संपर्क में है। राजस्थान से एलटीवी-नागरिकता की जो भी फाइलें दिल्ली आती थी, वह उन्हें अपने पास होल्ड कर देता था। फिर दलालों से कहता। दलाल विस्थापितों से मिल कर प्रति व्यक्ति हजार-दो हजार रुपए एकत्र करते। पहले तो ये दलाल दिल्ली जाकर पैसा देते थे, लेकिन छह माह से जोधपुर स्थित हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है, इसलिए वह अपनी ड्यूटी लगवा कर जोधपुर आता और होटल में बैठ वसूली करता था। उसके रहने तथा गाड़ी की व्यवस्था सीआईडी जोधपुर करती थी। गुरुवार को वह दिन भर सीआईडी ऑफिस में बैठा रहा और हाईकोर्ट का जवाब तैयार करता रहा। रात करीब 9 बजे वे होटल पहुंचा और तीनों दलाल पैसा लेकर वहां आए। जैसे ही पैसा इसे दिया गया, एसीबी ने चारों को हिरासत में ले लिया।

दलाल भी विस्थापित थे, अब भारत के नागरिक हैं

नेहरू नगर व डाली बाई मंदिर के पास रहने वाला तीनों दलाल अशोक, भगवानाराम व गोविंद भी बरसाें पहले भारत आ गए थे और यहां की नागरिकता ले ली थी। इन लोगों को यह पता था कि कौन विस्थापित पैसा दे सकता है। उनके नाम वे मिश्रा को बताते थे ताकि उनकी फाइलें राेक कर पैसा लिया जा सके। अशोक व गोविंद कोर्ट में टाइपिस्ट का काम करते हैं तथा भगवानाराम की कपड़े की दुकान है। एसीबी ने दिन में अशोक की दुकान की भी तलाशी ली, वहां 200 विस्थापितों के पासपोर्ट व वीजा दस्तावेज बरामद हुए हैं।

18 महीने हो गए, अभी तक 88 प्रतिशत केस पेंडिंग

विस्थापितों के लिए काम करने वाली सीमांत लोक संगठन संस्था के अध्यक्ष हिंदूसिंह सोढ़ा ने बताया कि केंद्र सरकार को रिजिम दिए 18 माह हो गए हैं। अब तक सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों को ही नागरिकता मिली है तथा एलटीवी के भी 88 प्रतिशत केस पेंडिंग है। यह नेक्सस लंबे समय से चल रहा था। उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी व इंटेलीजेंस के एडीजी को कई बार शिकायत की थी। ये लोग अदालतों को गुमराह करते हैं और दिल्ली में फाइलें अटका कर वसूली करते हैं।

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