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आर्कबिशप का चर्चों काे पत्र- खतरे में देश, व्रत रखें, नई सरकार की दुआ करें

दिल्ली के आर्कबिशप अनिल काउटो की सभी चर्चों को लिखी चिट्ठी सामने आने के बाद बवाल मच गया है। आर्कबिशप ने पादरियों...

Danik Bhaskar

May 23, 2018, 05:50 AM IST
दिल्ली के आर्कबिशप अनिल काउटो की सभी चर्चों को लिखी चिट्ठी सामने आने के बाद बवाल मच गया है। आर्कबिशप ने पादरियों को चिट्ठी लिखकर कहा था- देश में धर्मनिरपेक्षता खतरे में हैं और राजनीतिक हालात अशांत। ऐसे में अगले साल होने वाले आम चुनाव में नई सरकार के लिए प्रार्थना करें। माना जा रहा है कि परोक्ष रूप से उन्होंने वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार नहीं बने, इसके लिए लोगों से दुआ करने की अपील की है। भाजपा और संघ के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। आर्कबिशप को जवाब देने के लिए भाजपा अध्यक्ष, पार्टी प्रवक्ता, 15 केंद्रीय मंत्री और इतने ही सांसद उतर आए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा- लोगों को धार्मिक आधार लामबंद नहीं होना चाहिए। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ने कहा- मैंने पत्र नहीं पढ़ा है, पर मैं बताना चाहूंगा कि देश में सभी अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं। वहीं, गिरिराज सिंह ने कहा-अगर चर्च मोदी की सरकार ना बने इसके लिए प्रार्थना करेंगे, तो देश के दूसरे धर्म के लोग कीर्तन- पूजा करेंगे। वहीं टीएमसी प्रमुख ममता बोलीं- देश में माहौल ऐसा ही है। इस मसले पर कांग्रेस अब तक खामोश है। वहीं आर्कबिशप ने सफाई दी है।

आर्कबिशप ने लिखा- संदेश के प्रसार के लिए पत्र प्रार्थना सभाओं मेंे पढ़ा जाए

संघ ने कहा- हमारे लोकतंत्र में वेटिकन दखल दे रहा है

पीएम देश से जाति- धर्म की बाधा खत्म करने में जुटे हैं। वे सबका साथ, सबका विकास में यकीन रखते हैं। आर्कबिशप सकारात्मक सोचें। - मुख्तार अहमद नकवी, अल्पसंख्यक मामले के मंत्री

ये देश के लोकतंत्र, धर्म निरपेक्षता पर हमला है। ये भारतीय चुनाव प्रक्रिया में वेटिकन का सीधा हस्तक्षेप है, क्योंकि आर्कबिशप की नियुक्ति सीधे पोप करते हैं। बिशप की निष्ठा सीधे तौर पर पोप के प्रति होती है, न कि भारत सरकार के प्रति। -राकेश सिन्हा, आरएसएस विचारक

देश के लिए हम प्रार्थना करते रहे हैं। ये हमारा निजी मामला है। किसी को दखल नहीं देना चाहिए। हमें देश के मौजूदा हालात को लेकर चिंता है। कुछ लोग जानबूझकर सियासी रंग दे रहे हैं। -अनिल काउटो, आर्कबिशप

हमलोग अशांत राजनीतिक माहौल के गवाह हैं। इस समय देश के जो राजनीतिक हालात हैं, उसने लोकतांत्रिक सिद्धांतों और देश की धर्मनिरपेक्ष पहचान के लिए खतरा पैदा कर दिया है। राजनेताओं के लिए प्रार्थना करना हमारी पवित्र परंपरा रही है। लोकसभा चुनाव समीप है, जिसके कारण यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। 2019 में नई सरकार बनेगी। ऐसे में हमें 13 मई से अपने देश के लिए प्रार्थना करने की जरूरत है। इसीलिए अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए प्रार्थना के साथ ही हर शुक्रवार को खाना न खाएं, ताकि देश में शांति, लोकतंत्र, समानता, स्वतंत्रता और भाईचारा बना रहे। 13 मई को मदर मरियम ने दर्शन दिए थे, इसलिए यह महीना ईसाई धर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। इस पत्र को चर्च में आयोजित होने वाली प्रार्थना सभा में पढ़ा जाए, जिससे लोगों तक यह बात पता चल सके। -अनिल काउटो, आर्कबिशप(8 मई को लिखा)

वजह- 40 लोकसभा सीटों पर ईसाइयों का प्रभाव, दलितों पर भी चर्च का प्रभाव

पत्र से सियासत गर्माने के तीन बड़े कारण

1 देश में 25 सांसद ईसाई धर्म से, केंद्र सरकार में मंत्री भी आर्कबिशप के लेटर से सियासी पारा चढ़ना लाजिमी है। कारण ईसाई आबादी का 40 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर प्रभाव होना है। देश में ईसाई आबादी 2.4% है। 25 ईसाई सांसद हैं। केंद्र में एल्फोंस कन्नांथनम ईसाई मंत्री भी हैं।

2 चार राज्य ईसाई बहुल, छह राज्यों में आबादी दूसरे पर नॉर्थ ईस्ट के 4 राज्य मणिपुर(41%), मेघालय (70%), मिजोरम (87%) और नगालैंड (90%) ईसाई बहुल हैं। 6 राज्यों असम, अरुणाचल, गोवा, ओडिशा, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में ईसाई आबादी दूसरे नंबर पर है।

आर्कबिशप थॉमस मैकवान

3 गुजरात, मेघालय, नगालैंड चुनाव में ऐसे ही अपील हुई थी, भाजपा ने उससे सबक लिया गुजरात चुनाव में गांधीनगर आर्कबिशप थॉमस मैकवान ने भी ऐसा ही पत्र लिखकर गुजरात की भाजपा सरकार को हराने की अपील की थी। इसके अलावा मेघालय, नगालैंड के विधानसभा चुनाव में भी ईसाई समुदाय से ऐसी अपील की गई थी। इन घटनाओं से सबक लेकर भाजपा हमलावर हो गई है, ताकि हालात अभी से नियंत्रण में रहें।

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