Hindi News »Rajasthan »Nagar» कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे

कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे

सालों से नेता ये मानते आए हैं कि वोटर्स सिर्फ चुनावों में वोट देते हैं। अब कर्नाटक चुनावों के बाद ये तय हो गया है कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 19, 2018, 05:55 AM IST

  • कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे
    +4और स्लाइड देखें
    सालों से नेता ये मानते आए हैं कि वोटर्स सिर्फ चुनावों में वोट देते हैं। अब कर्नाटक चुनावों के बाद ये तय हो गया है कि वोटर्स सिर्फ वोट नहीं देते, ऐसा उलझाऊ सा जनादेश देकर मजे भी लेते हैं। ये वोटर की ताकत ही है कि सबसे ज्यादा सीटें पाने वाली पार्टी सबसे ज्यादा सकते में है। कम सीटें पाने वाली पार्टी सरकार बनाने की बात कर रही थी और सबसे कम सीटें पाने वाली पार्टी सबसे ज्यादा मजबूत नज़र आ रही थी। ऐसा ही चलता रहा तो किसी दिन जमानत जब्त उम्मीदवार सरकार भी बना लें तो आश्चर्य नहीं होगा।

    खैर ऐसे चुनावों के बाद नेताओं की सांस भी हलक में अटक जाती है। वजह ये नहीं होती कि राजनीति जमकर हो रही होती है। डर की वजह गणित है, इतने हिसाब-किताब, जोड़-गणित, आंकलन-समाकलन, प्रलोभन आते हैं कि कमजोर गणित वाला आदमी तो नेता ही न बन पाए। आम तौर पर माना जाता है कि जो छात्र पढ़ाई में अच्छे नहीं होते वो छात्रनेता बन जाते हैं, लेकिन इकाई-दहाई-करोड़, दो तिहाई- विधायक छुपाई, बचा-बटा, जोड़-तोड़ और हिसाब-किताब का ऐसा मायाजाल रच दिया गया है कि अब तो एमएलए बनने की योग्यता भी गणित में मास्टर्स की डिग्री होनी चाहिए। आने वाले दिनों में पार्टी अध्यक्ष टिकट देने के पहले 17 का पहाड़ा और भाग विधि से घनमूल निकालने का तरीका पूछते दिख सकते हैं। मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी वही आदमी बन सकेगा जो राजनीति से ज्यादा त्रिकोणमिति का ज्ञान रखेगा, इस तरह से राजनीति में शिक्षित लोगों को लाने का सपना भी पूरा हो जाएगा।

    तब बजाय ये कहने कि फलाने 5 बार विश्वेश्वरैया नहीं बोल सकेंगे, ये कहा जाएगा कि फलाने 15 मिनट में बीजीय व्यंजक और सर्वसमिकाओं के 5 सवाल हल नहीं कर पाएंगे। अभी भले विवाद कैम्ब्रिज एनालिटिका के जरिए वोटरों को लुभाने पर होता हो, तब खुलासे कुछ यूं होंगे कि फलाने पार्टी ने लोकसभा चुनाव के पहले अपने अध्यक्ष को "अजय मैथ्स एंड इंग्लिश क्लासेज' पढ़ने भेजा था। फिलहाल विवाद सड़कों के नाम बदलने पर होते हैं, तब विवाद कुछ यूं होंगे कि एक पार्टी सत्ता में आते ही सारे देश में देवनागरी अंक चलवाना चाहेगी और दूसरी पार्टी अन्तरराष्ट्रीय अंकों पर अड़ जाएगी।

    मुझे तो उस दिन का इंतज़ार है जब राजनीति में गणित इस कदर घुस जाए कि लाइव टीवी डिबेट में दो प्रवक्ता इस बात पर भिड़ जाएं कि द्विघात समीकरण का पूर्ण वर्ग बनाकर हल करना किसकी पार्टी ने पहले सीखा था। त्रिभुजों की समरूपता के सवाल पर विधानसभाएं भंग होने लगें। और किसी दिन किसी मुख्यमंत्री की कुर्सी सिर्फ इस बात पर चली जाए जब वो ये न बता पाएं कि एक उम्मीदवार ने अगर 8 लाख में एक टिकट खरीदा और विधायक बनने के बाद 45 लाख में अपना समर्थन किसी पार्टी को बेच दिया तो उसे कुल कितने प्रतिशत लाभ या हानि हुई?



    जेडीएस वाले कह रहे हैं कि भाजपा उनको 100 करोड़ में खरीदना चाह रही है। -"इससे ज्यादा चाहिए' बताने का ये बहुत घरेलू तरीका है।

    इस हफ़्ते रेस-3 का ट्रेलर रिलीज़ हुआ है। -मुझे लगता है कि अब साइनाइड का उत्पादन रोक देना चाहिए।

    कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर चल रही है। -जिसमें कांटा बीजेपी के पास है और कांग्रेस के पास गुब्बारा!

    शशि थरूर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस बन रहा है। -बीजेपी ज्वाइन कर लेते तो ऐसी मोटिवेशन स्किल के लिए पद्मभूषण मिल रहा होता।

    मनमोहन सिंह ने मोदीजी के ख़िलाफ़ पत्र लिखा है। -चिट्ठी के पन्ने से समोसे का तेल सुखा लेते तो भी इससे अच्छा यूज़ रहता।



    अमित तिवारी

    1. एडम एंजेलो कोडिंग करते समय कौन-सा गाना गाते थे? जवाब मेरा जीवन Quora कागज़,Quora ही रह गया।

    2. ट्रकवाले क्यों परेशान होते हैं? जवाब क्योंकि उसको लोड लेने के पैसे मिलते हैं।

    3. फास्टफूड वाले और प्रोड्यूसर में क्या एक जैसा होता है? जवाब दोनों ही रोल देते हैं।

    4. डिस्प्रिन को पानी के साथ रहना क्यों नहीं पसंद?

    जवाब क्योंकि वो घुल-घुल कर मरती है।



    व्यंग्य



    पुलिस ने शशि थरूर के खिलाफ 3000 पेज की चार्जशीट फाइल की है। आधे पेज पर प|ी के सुसाइड और बाकी पर ट्विटर पर प्रयोग किए अंग्रेजी के शब्दों का अर्थ पूछा गया है।

    कर्नाटक चुनाव क्रिकेट के डकवर्थ लूइस नियम जैसा रहा। कौन और कैसे जीत गया, पता ही नहीं चला।

    कांग्रेस विधायकों का सीट जितने के बाद मंत्री पद का तो पता नहीं, लेकिन शपथ से पहले हफ़्तों महंगे रिजॉर्ट्स में रहने का मौक़ा मिल जाता है।

    एक मंत्रालय तो उन लोगों को भी दिया जाना चाहिए जो कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का पूरा नाम बूकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा बिना देखे बोल दें!

    उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में आरओ का पानी मिलेगा, वैसे सबसे ज्यादा आरओ की मशीन की आवश्यकता तो ट्रेन के शौचालयों में है।

    फ्लिपकार्ट को वॉलमार्ट ने ख़रीदा है। अब वॉलमार्ट को भारत के हर त्योहारों के बारे में गहन अध्ययन करना पड़ेगा।

    कटाक्ष

    अफवाह



    अगर ये मान गए तो सजा के ले जाएंगे, नहीं तो उठा के। -कर्नाटक में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स

    बहुत हुई मनमानी अब अमंगल होगा। -एशियाड कैंप से बाहार फोगाट बहनें

    दिन महीने साल गुजरते जाएंगे, अच्छे दिन आएंगे। -मोदी सरकार के 4 साल

    हमारे बिजनेस में सीटें जितनी कम हों उतना ही बिजनेस बढ़ता है। -हॉर्स ट्रेडिंग करते नेता

    प्रतीक गौतम

    विवादों से बचने के लिए पिता फैज़ इन्हें आगे कर देते थे

    चर्चित|मोनिज़ा हाशमी, लेखिका

    जन्म- 1945

    पिता- फैज अहमद फैज (ऊर्दू शायर), मां- एलिस, बहन- सलीमा हाशमी

    परिवार- पति- हुमैर हाशमी, बेटे- अली और अदील हाशमी

    क्यों चर्चा में- इन्हें भारत आमंत्रित किया, लेकिन बोलने से मना कर दिया और भारत से लौटा दिया।

    रोचक | मेलानिया ट्रम्प, अमेरिकी राष्ट्रपति की प|ी

    इन्हें देखते ही ट्रम्प इनका नंबर मांग बैठे थे, लेकिन...

    बात 1998 की है, 52 वर्षीय डोनाल्ड ट्रम्प अपनी दूसरी प|ी मार्ला मेपल्स से भी अलग हो चुके थे। उन्हीं दिनों वे न्यूयॉर्क फैशन वीक की पार्टी में मेनहटन किटकैट क्लब गए। वे मेलानिया को देखकर खुद को रोक नहीं सके। जबकि वे खुद किसी और सुपरमॉडल से मिलने गए थे, जो मेलानिया के पास में बैठी थीं। मेलानिया उस वक्त 28 वर्ष की थीं। शो के आयोजक इटैलियन आंत्रप्रेन्योर पाओलो जामपोली थे। उन्होंने मेलानिया को ट्रम्प से मिलवाया। आनन-फानन में ट्रम्प मेलानिया का नंबर मांग बैठे। चूंकि वे किसी और के साथ डेट कर रहे थे, तो मेलानिया ने नंबर देना ठीक नहीं समझा, लेकिन कहा-आप अपना नंबर मुझे दे दीजिए। मैं देखना चाहती हूं कि आप कारोबार के संबंध में मुझसे चर्चा करना चाहते हैं या कुछ और। तब ट्रम्प ने कहा- मैं आपके साथ बिज़नेस की बात नहीं करूंगा।

    यूगोस्लाविया के स्लोवेनिया में रेडिस नामक कस्बे में मेलानिया का जन्म हुआ। पिता कार और मोटरसाइकल डीलर थे। मां कस्बे में ही कपड़े बनाने के कारखाने काम करती थी। बचपन से मॉडलिंग करती थीं, लिहाजा अमेरिका आ गईं।

    बड़ी बेटी मोनिज़ा को फैज़ साहब गुल नाम से बुलाते थे। मोनिजा हाशमी और उनकी बहन सलीमा हाशमी दोनों की शादी पाकिस्तान के हाशमी परिवार में हुई है। ये दोनों बहने हाशमी परिवार के दो भाइयों को दी हुई हैं। बहनों को मुस्लिम और ईसाई दोनों वातावरण घर में मिला। पर पिता से मिलना हो ही नहीं पाता था। फैज़ उन दिनों अखबार के दफ्तर में काम करते थे। जब वे घर आते, तब तक बेटियां सो चुकी होती थीं और जब फैज सुबह तक सोए रहते थे, तब बेटियां स्कूल निकल जातीं थीं। जब मोनिज़ा कॉलेज की पढ़ाई के लिए कराची में होस्टल में रहती थीं, तो फैज अक्सर आकर दोपहर में उन्हें घुमाने ले जाते थे। उस वक्त में वे कहीं चाइनीज़ खिलाया करते थे।

    जब मोनिजा का बेटा अली हुआ तो फैज़ उसके कान में अज़ान दिया करते थे। फैज़ कभी भी विवाद की स्थिति बनने नहीं देते थे, वे इसमें खड़े ही नहीं होते थे। न ही कोरी बस में वे उलझते थे। किसी विषय पर खुली बहस करना होती थी, तो वे टाल जाते थे। जब भी घर में ऐसे मौके आते थे, तो वे मोनिज़ा को आगे कर देते थे। मोनिज़ा से कहते- मैं थक गया हूं अब तुम सम्हालो। जब मोनिज़ा पूछती कि क्या आप डरते हैं, तो वे बड़ी चतुराई से जवाब देते थे। दरअसल, बात ये थी कि वे शब्दों से किसी को चोट नहीं पहुंचाना चाहते थे।

    जन्म- 26 अप्रैल 1970

    पिता- विक्टर नास, माता- अमालिजा, एक बड़ी बहन इनेस, एक सौतेला भाई।

    शिक्षा- सेकंडरी स्कूल ऑफ डिज़ाइन, यूनिवर्सिटी ऑफ लुब्लिआना से आर्किटेक्चर और डिजाइनिंग।

    परिवार-पति-डोनाल्ड ट्रम्प, बेटा बैरन

    क्यों चर्चा में- इनकी सर्जरी हुई है।

    बात 1998 की है, 52 वर्षीय डोनाल्ड ट्रम्प अपनी दूसरी प|ी मार्ला मेपल्स से भी अलग हो चुके थे। उन्हीं दिनों वे न्यूयॉर्क फैशन वीक की पार्टी में मेनहटन किटकैट क्लब गए। वे मेलानिया को देखकर खुद को रोक नहीं सके। जबकि वे खुद किसी और सुपरमॉडल से मिलने गए थे, जो मेलानिया के पास में बैठी थीं। मेलानिया उस वक्त 28 वर्ष की थीं। शो के आयोजक इटैलियन आंत्रप्रेन्योर पाओलो जामपोली थे। उन्होंने मेलानिया को ट्रम्प से मिलवाया। आनन-फानन में ट्रम्प मेलानिया का नंबर मांग बैठे। चूंकि वे किसी और के साथ डेट कर रहे थे, तो मेलानिया ने नंबर देना ठीक नहीं समझा, लेकिन कहा-आप अपना नंबर मुझे दे दीजिए। मैं देखना चाहती हूं कि आप कारोबार के संबंध में मुझसे चर्चा करना चाहते हैं या कुछ और। तब ट्रम्प ने कहा- मैं आपके साथ बिज़नेस की बात नहीं करूंगा।

    यूगोस्लाविया के स्लोवेनिया में रेडिस नामक कस्बे में मेलानिया का जन्म हुआ। पिता कार और मोटरसाइकल डीलर थे। मां कस्बे में ही कपड़े बनाने के कारखाने काम करती थी। बचपन से मॉडलिंग करती थीं, लिहाजा अमेरिका आ गईं।

    चर्चित शख्स विवादों में

    उषा अनंतसुब्रमनियन- सीईओ, इलाहाबाद बैंक

    सरकारी बैंक की पहली प्रमुख जिनका नाम चार्जशीट में

    जन्म- 1 अक्टूबर 1960

    शिक्षा- मद्रास यूनिवर्सिटी से सांख्यिकी में पीजी, मुंबई यूनिवर्सिटी से प्राचीन भारतीय संस्कृति में पीजी।

    क्यों चर्चा में- बतौर सीईओ इनके सारे अधिकार छीन लिए गए हैं।

    उषा के साथ कई प्रथम जुड़े हुए हैं। 2013 के बजट में जब देश की पहली महिला बैंक की घोषणा की गई तो इसकी पहली प्रमुख उषा बनाई गईं। इसके बाद इंडियन बैंक एसोसिएशन की वे पहली महिला अध्यक्ष रहीं। अब वे किसी सरकारी बैंक की पहली महिला प्रमुख हैं, जिनके खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है। नीरव मोदी जो बैंकों का पैसा लेकर भाग गया है, उस मामले में उषा का नाम भी सामने आया है।

    दक्षिण भारतीय उषा की पहली नौकरी जीवन बीमा निगम की थी। 1982 में वे पहली बार बैंक में आई। दक्षिण भारतीयों में अमावस्या को शुभ माना जाता है, लिहाजा नौकरी जॉइन करने के लिए इन्होंने अमावस्या का दिन चुना। लेकिन बैंक में उनके अफसर उत्तर भारतीय थे, जहां अमावस्या को अच्छा नहीं माना जाता है। वे कहने लगे कि यह दिन ठीक नहीं है, मैं घर चले जाता हूं।

    नौकरी के शुरुआती दिनों में उषा के साथ एक वाकया हुआ, जिसे वे कभी भूल नहीं पाती हैं। वे मुंबई में बैंक ऑफ बड़ौदा की कफ परेड ब्रांच में काम कर रही थीं। तभी एक युवा, जो 22-25 वर्ष का था, उनके समक्ष आकर खड़ा हो गया। वह मछुआरा था। अपना काम खत्म करके लौटा था। उसकी पतलून भी गिली थी और मछली की गंध उसके पास से आ रही थी। जिस बिल्डिंग में बैंक थी, उसके तल मंजिल पर दो अन्य बैंकों की शाखाएं थीं, लेकिन उस मछुआरे की बात पर किसी ने गौर नहीं किया। लिहाजा वह बैंक ऑफ बड़ौदा में आ गया। उसने उषा से पूछा कि वह लोन चाहता है, जो उसे मिल नहीं रहा है। वह किस तरह से मदद कर सकती हैं। तब उषा को लगा कि उन्हें इस नौकरी के जरिए ऐसा अवसर मिला है, जिसमें वे देश के दोनों पक्ष गरीब और अमीर दोनों को लोन दे सकती हैं।

  • कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे
    +4और स्लाइड देखें
  • कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे
    +4और स्लाइड देखें
  • कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे
    +4और स्लाइड देखें
  • कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे
    +4और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Nagar News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: कर्नाटक जैसे नतीजे आएं तो पढ़े-लिखे नेता खूब बढ़ेंगे
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Nagar

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×