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मोदी की 3 बड़ी चुनौती: सपा-बसपा का संभावित गठजोड़, जाट आरक्षण, भाजपा सांसदों से नाराजगी

आम चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है जाटों को आरक्षण। बागपत, मेरठ, शामली से लेकर...

Dainik Bhaskar

May 19, 2018, 05:55 AM IST
आम चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता है जाटों को आरक्षण। बागपत, मेरठ, शामली से लेकर मुरादाबाद और अमरोहा तक जाट बिरादरी के लोग फैले हुए हैं। अमरोहा के चौधरी सुरेन्द्र सिंह कहते हैं कि 2014 में भी हमसे वादा किया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। साथ बैठे चौधरी पवन सिंह कहते हैं कि हम किसानों की बात कोई सुनता ही नहीं है। चुनाव आता है तभी नेता आते हैं। इधर सहारनपुर में इस समय भीम आर्मी का मुद्दा गरमाया हुआ है। हाल ही में यहां भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष के भाई की संदिग्ध मौत हुई। भीम आर्मी का आरोप है कि हत्या ठाकुरों ने की है। भीम आर्मी के मुद्दे से दलित वोट बीजेपी से खासा नाराज है। यहां भाजपा सांसदों के प्रति नाराजगी भी लोगों की जुबान पर खुलकर आने लगी है। 5 लोकसभा सीटों पर तो सांसद की तलाश के पोस्टर भी लग चुके हैं। सांसद से नाराजगी संभल और अलीगढ़ जिले में भी देखने को मिली। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी से भी जनता नाराज है। मुरादाबाद के सपा के प्रदेश सचिव डीपी यादव कहते हैं कि इस बार चुनाव राष्ट्रवादी भावना के साथ-साथ दलितों के मुद्दे, सहारनपुर में हुई हिंसा को लेकर लड़े जाएंगे।





प. उत्तर प्रदेश में लग चुके हैं 5 सांसदों की तलाश के पोस्टर

18% जाट

5 से 6 लोकसभा सीट प्रभावित करने का माद्दा। कई जिलों में आबादी 40% तक है।

पार्टियों में चर्चा गठबंधन को लेकर

सपा प्रवक्ता एमएलसी सुनील साजन का कहना हैं कि सपा-बसपा गठबंधन होगा। वहीं पूर्व सपा मंत्री राजकिशोर सिंह का कहना है कि सीटों के बंटवारे पर कोई भी विवाद नहीं होना है। बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर का कहना है कि गठबंधन पर अंतिम निर्णय बहनजी ही लेंगी। भाजपा प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी कहते हैं कि जनता गठबंधन के स्वार्थ को जानती है। कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत का कहना हैं कि बीते चार साल में मोदी सरकार ने जो भी काम किए वो सारे काम कांग्रेस सरकार के समय के हैं। मोदी सरकार में जीरो टॉलरेंस के दावे खोखले साबित हुए हैं।

सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले और राजनीतिक रूप से अहम उत्तर प्रदेश से 52 ग्राउंड रिपोर्ट की शुरुआत

लखनऊ। चुनाव के ठीक एक साल पहले भास्कर ने उत्तर प्रदेश के 75 में से 40 जिलों में मतदाताओं का मन टटोला। सामने आया कि बीजेपी सांसदों के प्रति लाेगों की नाराजगी पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। हालांकि ज्यादातर लोग मोदी की कार्यशैली से खुश हैं।

अवध में विकास की जरूरत और रोजगार है बड़ा मुद्दा

आदित्य तिवारी

फैज़ाबाद की जनता का कहना हैं योगी यहां पर विकास पर ध्यान दे रहे हैं। अयोध्या-फैज़ाबाद की जनता की मांग है कि 2019 के चुनावी बिगुल की शुरुआत अयोध्या से हो। अयोध्या से राम मंदिर का मुद्दा फिर उठेगा। हालांकि लोग इस पर बहुत ज्यादा बात नहीं करना चाहते। यहां बात विकास पर ज्यादा हुई। अवध विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर मनोज दीक्षित कहते हैं कि अयोध्या में रुकने लायक कोई अच्छा होटल नहीं है। लाेग आते हैं शाम को फैजाबाद चले जाते हंै। यहां व्यवस्था हो तो पर्यटक यहां कुछ दिन गुजारें भी। नरेंद्र देव कृषि विवि के प्रोफेसर डॉ. डीके द्विवेदी का कहना है कि अवध उपजाऊ भूमि एवं सहज भूमिगत जल वाला क्षेत्र है, लेकिन यहां फलों-सब्जियों के लिए बड़ी मंडी नहीं हैं। नानपारा के डॉ. निशीथ साहू कहते हैं कि अयोध्या, बहराइच, गोंडा-बलरामपुर इनकी गिनती पिछड़े इलाकों में ही होती है। इधर गृहमंत्री राजनाथ के गृहक्षेत्र लखनऊ में उनसे ज्यादा मोदी का मैजिक दिखा। हालांकि यहां राजनाथ सिंह के दौरे पहलेे से तेज हो गए हैं। सपा के राज्यसभा सांसद जावेद अली कहते हैं कि सपा-बसपा का गठबंधन सिर्फ नेताओं का गठबंधन नहीं बल्कि जनता का गठबंधन है। जनता इसे स्वीकार कर रही है।

25% दलित

सामान्य वर्ग-16%, पिछड़ी जाति -35 % और मुस्लिम 18% हैं जबकि 6% अन्य हैं।

उत्तर प्रदेश एक नजर में


जिले-75

(कैराना की सीट सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई है)।













पूर्वांचल में योगी बड़ा फैक्टर लाेग चाहते हैं ये खुद लड़ें

अमित मुखर्जी

मोदी पूर्वांचल की वाराणसी सीट से सांसद हैं। मोदी और दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा के क्षेत्र गाजीपुर को छोड़कर ज्यादातर क्षेत्रों में जनता सांसद से नाराज है। चंदौली लोकसभा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पाण्डेय का क्षेत्र है। लोगों का कहना है कि सांसद 4 सालों में कभी जनता से नहीं मिले हैं। योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर की जनता यहां से उन्हें ही सांसद देखना चाहती है। गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने होटल चलाने वाले श्यामदास का कहना है कि योगी के अलावा कोई लोकसभा चुनाव लड़ा तो गोरखपुर सीट फिर भाजपा हार जाएगी। हार-जीत में अहम भूमिका निभाने वाले निषाद जाति के वोटर भी योगी को ही वोट करना चाहते हैं। गोल बाजार में दुकान चलाने वाले नंदगोपाल कहते हैं कि योगी नहीं लड़े तो देवरिया, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर समेत 9 सीट पर भाजपा की जीत आसान नहीं होगी। सपा सांसद प्रवीन निषाद का कहना है कि ‘हम एक बार फिर चुनाव जीतेंगे। 4 लाख निषाद वोटर्स हैं, जिनके आरक्षण को लेकर हम लगातार लड़ रहे हैं’। वैसे क्षेत्र की दो सबसे बड़ी समस्याओं बाढ़ और इंसेफेलाइटिस पर ज्यादा बात यहां नहीं होती। हर साल 20 से 30 जिले बाढ़ में डूब जाते हैं। इंसेफेलाइटिस से एक लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।

25% निषाद

वर्ग के वोटर्स हैं जिनका पूर्वांचल ही नहीं यूपी की 35 सीटों पर अहम रोल है।

बुंदेलखंड: रोजगार, पलायन और पानी का मुद्दा

बुंदेलखंड में झांसी, जालौन, हमीरपुर और बांदा चार सीटें हैं। झांसी केंद्रीय विद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुनील तिवारी कहते हैं कि यहां खनन का काम जोरों पर है। फिर भी रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं। पलायन की समस्या बढ़ रही है। मंत्री उमा भारती झांसी से सांसद हैं और उन्होंने यहां के परंपरागत जल स्रोतों को बचाने की बात कही थी, लेकिन काम धरातल पर नहीं आया। पहुज नदी को उन्होंने गोद लिया था उसकी हालत 4 साल बाद बहुत ही दयनीय है।

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