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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केस के मीडिया ट्रायल की इजाजत नहीं, लक्ष्मण रेखा खींचे प्रेस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मुकदमों के मीडिया ट्रायल की इजाजत नहीं दे सकते। प्रेस को लक्ष्मण रेखा खींचनी...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 05:16 AM IST
Nagar - सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केस के मीडिया ट्रायल की इजाजत नहीं, लक्ष्मण रेखा खींचे प्रेस
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मुकदमों के मीडिया ट्रायल की इजाजत नहीं दे सकते। प्रेस को लक्ष्मण रेखा खींचनी चाहिए। मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म केस की मीडिया कवरेज पर पटना हाईकोर्ट की रोक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने बिहार सरकार और सीबीअाई से इस मामले में जवाब मांगा है।

पत्रकार निवेदिता झा की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा, "यह मामला इतना भी साधारण नहीं है। मीडिया कभी बिल्कुल चरम पर पहुंच जाता है। आप अपनी मर्जी से कुछ नहीं बोल सकते। रिपोर्टिंग न तो चरम पर होनी चाहिए और न उस पर पाबंदी लगनी चाहिए। प्रेस की स्वतंत्रता और कवरेज में संतुलन जरूरी है।' मीडिया कवरेज को लेकर गाइडलाइंस होनी चाहिए या नहीं? इस पर विचार के लिए कोर्ट ने अपर्णा भट्‌ट को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। याचिकाकर्ता के वकील शेखर नाफड़े और फौजिया शकील से भी कोर्ट ने इस पर राय मांगी है। अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। पटना हाईकोर्ट ने 23 अगस्त को मुजफ्फरपुर कांड की कवरेज पर रोक लगाई थी। निवेदिता की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट का आदेश मीडिया की अभिव्यक्ति के अधिकार और लिखने की आजादी का उल्लंघन है। पाबंदी गलत है। संविधान के तहत नागरिकों को मिला सूचना का मौलिक अधिकार भी इससे खत्म हो जाएगा।

पीड़िताओं से बात के लिए महिला वकील की नियुक्ति पर भी रोक

मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िताओं के इंटरव्यू दिखाने पर रोक लगा दी थी। बच्चियों के पुनर्वास के लिए कोर्ट ने नालसा के अधिकारी को उनसे बात करने को कहा था। सुनवाई के दौरान पता चला कि इस काम के लिए हाईकोर्ट ने भी एक महिला वकील को कोर्ट मित्र नियुक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी।

जम्मू-कश्मीर में कार्यवाहक डीजीपी की तैनाती में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली | जम्मू-कश्मीर में कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति में दखल देने से मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया का पालन नहीं करने का हवाला देकर एक याचिका में दखल की मांग की गई थी। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 6 सितंबर को डीजीपी एसपी वैद्य को हटाकर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर दिया था। उनकी जगह दिलबाग सिंह कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किए थे। सरकार ने 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एक पुराने आदेश में सुधार की मांग की थी। उसमें कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। साथ ही डीजीपी की नियुक्ति से पहले राज्य के तीन सबसे सीनियर आईपीएस अधिकारियों की सूची यूपीएससी को भेजना अनिवार्य किया गया था।

राज्य के वकील शोएब आलम ने कहा कि यूपीएससी की सलाह से नए डीजीपी की नियुक्ति तक ही कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त हुआ है। डीजीपी वैद्य का तबादला करने के 12 घंटे के अंदर ही यूपीएससी से सलाह की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। याचिकाकर्ता प्रकाश सिंह की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्य के सुरक्षा आयुक्त से चर्चा किए बिना डीजीपी को नहीं हटाया जा सकता। कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किए गए अधिकारी को पहले भर्ती घोटाले में सस्पेंड किया जा चुका है।

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