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ध्यान के माध्यम से करें क्रोध विसर्जन : डॉ. सुरेखा

भरतपुर| रणजीत नगर स्थित दादाबाड़ी जैन मंदिर में चातुर्मास के तहत प्रवचन करते हुए मंगलवार को साध्वी डॉ. सुरेखा...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 05:15 AM IST
भरतपुर| रणजीत नगर स्थित दादाबाड़ी जैन मंदिर में चातुर्मास के तहत प्रवचन करते हुए मंगलवार को साध्वी डॉ. सुरेखा श्रीजी ने कहा कि बिना स्वस्थ मन और तन के किसी भी प्रकार की पूजा और साधना असंभव है। तन को स्वस्थ करने से पूर्व मन को स्वस्थ करना होगा। रोगों का जन्म मन से होता है। मन स्वस्थ होगा तो तन और वाणी स्वस्थ हो जाएंगे। ध्यान के समय हमें मन को संसार से हटाकर स्वयं के भीतर ले जाना चाहिए। ध्यान के माध्यम से हमें अपने अंदर मौजूद नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना चाहिए। ध्यान के माध्यम से क्रोध, अहंकार का विसर्जन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को नियमित रूप से योग करना चाहिए। साथ ही कहा कि प्रभु की दीक्षा एवं साधना का मार्ग हर व्यक्ति को समस्याओं के समाधान और आनंदमय जीवन निर्वाह की शिक्षा देता है। प्रवचनों के दौरान जैन समाज के कई श्रद्धालु मौजूद थे। इससे पूर्व मंदिर में कई धार्मिक आयोजन हुए जिनमें समाज के लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।