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डॉक्टरों की सेवानिवृति आयु बढ़ाने के बाद प्रशासनिक पदों को लेकर विवाद शुरू

जयपुर| डॉक्टरों की सेवानिवृति आयु सीमा बढ़ाने के बाद प्रशासनिक पदों की परिभाषा को लेकर रेजीडेंट और प्रोफेसर...

Danik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:30 AM IST
जयपुर| डॉक्टरों की सेवानिवृति आयु सीमा बढ़ाने के बाद प्रशासनिक पदों की परिभाषा को लेकर रेजीडेंट और प्रोफेसर डाॅक्टरों के बीच विवाद शुरू हो गया है। रेजीडेंट डाक्टर अस्पताल अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल,अतिरिक्त अधीक्षक-प्रिंसिपल सहित हॉस्टल के वार्डन के पद पर तैनात अधिकारियों को प्रशासनिक मान रहे हैं। वहीं प्रोफेसर डॉक्टर अधीक्षक और प्रिंसिपल को ही प्रशासनिक पद मान रहे हैं। रेजीडेंट डॉक्टर जहां डॉक्टरों के प्रमोशन के नुकसान को लेकर विरोध कर रहे हैं। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि सेवानिवृत आयु बढ़ने से मरीजों को अनुभवी डॉक्टरों का फायदा मिलेगा। लोगों को निजी अस्पतालों में नहीं जाना पड़ेगा। सरकार का तर्क है कि सेवानिवृति के बाद सीनियर डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें दिखाने के लिए लोगों को महंगा दाम में इलाज कराना पड़ता है। साथ ही सेवानिवृत आयु बढ़ने से डॉक्टरों की कमी की पूर्ति होगी। सेवानिवृति आयु सीमा बढ़ने के बाद प्रदेश के करीब 75 डॉक्टर अब 31 मार्च को सेवानिवृत नहीं हो सकेंगे। सेवानिवृति फाइल पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर के बाद शुक्रवार को आयु सीमा बढ़ाने वाली फाइल पर कार्मिक विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही मनोचिकित्सालय अस्पताल के अधीक्षक प्रदीप शर्मा, महिला चिकित्सालय के अधीक्षक बीएस मीणा और माइक्रोबायलोजी में प्रोफेसर नित्या व्यास अब 3 साल और सेवा में रहेंगी।

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