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निश्चित वार व नक्षत्र के संयोग से इस बार अक्षय तृतीया पर 18 अप्रैल को बनेगा सर्व सिद्ध योग, मनोकामनाएं होंगी पूरी

इस बार अक्षय तृतीय पर्व 18 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन सर्व सिद्ध योग में अक्षय तृतीय का महासंयोग बन रहा है जो कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:40 AM IST

निश्चित वार व नक्षत्र के संयोग से इस बार अक्षय तृतीया पर 18 अप्रैल को बनेगा सर्व सिद्ध योग, मनोकामनाएं होंगी पूरी
इस बार अक्षय तृतीय पर्व 18 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन सर्व सिद्ध योग में अक्षय तृतीय का महासंयोग बन रहा है जो कि अत्यंत शुभ योग है। आचार्य पंडित विमल पारीक के अनुसार निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से यह योग बनता है। इस योग में किया गया कार्य सर्व इच्छा तथा मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इस बार अक्षय तृतीया विक्रम संवत 2075 वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को बुधवार 18 अप्रैल 2018 को है, जो कि कृतिका नक्षत्र युक्त है। जिससे सर्वार्थ सिद्धि योग बनते हैं। इससे पूर्व कृतिका नक्षत्र युक्त अक्षय तृतीया 17 अप्रैल 1980, 23 अप्रैल 1985, 24 अप्रैल 1993, 20 अप्रैल 1996, 18 अप्रैल 1999, 16 अप्रैल 2007, 24 अप्रैल 2012, 21 अप्रैल 2015 को थी। आचार्य पारीक ने बताया कि रविवार के दिन यदि अश्वनी, पुष्य, तीनों उत्तरा नक्षत्र, हस्त, मूल नक्षत्र हो तो सर्व सिद्धी योग का महासंयोग बनता है। इसी प्रकार सोमवार के दिन रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा, श्रवण, मंगलवार के दिन अश्वनी, कृतिका,आश्लेषा, उत्तराभाद्रपद, बुधवार के दिन कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा, गुरुवार के दिन अश्वनी, पुनर्वसु, पुष्य, अनुराधा, रेवती, शुक्रवार के दिन अश्वनी, पुनर्वसु, अनुराधा, श्रवण, रेवती तथा शनिवार के दिन रोहिणी, स्वाति, श्रवण उक्त नक्षत्र होने पर सर्वसिद्धि योग का महासंयोग बनता है। भगवान विष्णु के अवतार श्री ब्रह्मा समर्थ परशुराम का अवतरण पृथ्वी पर इसी दिन हुआ था। तब भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का संयोग भी इसी दिन बना था। इस कारण अक्षय तृतीया को सर्वश्रेष्ठ स्थिति के अनुसार माना जाता है तथा इस दिन को स्वयं सिद्ध मुहूर्त जिसे हम अपनी भाषा में अबूझ मुहूर्त कहते हैं। इसे मरुप्रदेश में आखातीज के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय तृतीया को दिया गया दान पुण्य लक्षगुणा फल प्रदान करता है। कृषक गण भी इसी दिन खुशियां मनाते हैं क्योंकि उनकी फसलें कट जाती है और वे घर में धन धान्य से संपन्न हो जाते हैं। इस दिन स्वर्ण आभूषण की खरीदारी की जा जाती है क्योंकि इस खरीदारी को संपन्नता का प्रतिरूप माना जाता है।



ज्योतिषियों के अनुसार, आखातीज पर किया दान होता है फलदायी, इस दिन रहता है अबूझ मुहूर्त

भास्कर संवाददाता| मकराना

इस बार अक्षय तृतीय पर्व 18 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन सर्व सिद्ध योग में अक्षय तृतीय का महासंयोग बन रहा है जो कि अत्यंत शुभ योग है। आचार्य पंडित विमल पारीक के अनुसार निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से यह योग बनता है। इस योग में किया गया कार्य सर्व इच्छा तथा मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इस बार अक्षय तृतीया विक्रम संवत 2075 वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को बुधवार 18 अप्रैल 2018 को है, जो कि कृतिका नक्षत्र युक्त है। जिससे सर्वार्थ सिद्धि योग बनते हैं। इससे पूर्व कृतिका नक्षत्र युक्त अक्षय तृतीया 17 अप्रैल 1980, 23 अप्रैल 1985, 24 अप्रैल 1993, 20 अप्रैल 1996, 18 अप्रैल 1999, 16 अप्रैल 2007, 24 अप्रैल 2012, 21 अप्रैल 2015 को थी। आचार्य पारीक ने बताया कि रविवार के दिन यदि अश्वनी, पुष्य, तीनों उत्तरा नक्षत्र, हस्त, मूल नक्षत्र हो तो सर्व सिद्धी योग का महासंयोग बनता है। इसी प्रकार सोमवार के दिन रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा, श्रवण, मंगलवार के दिन अश्वनी, कृतिका,आश्लेषा, उत्तराभाद्रपद, बुधवार के दिन कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा, गुरुवार के दिन अश्वनी, पुनर्वसु, पुष्य, अनुराधा, रेवती, शुक्रवार के दिन अश्वनी, पुनर्वसु, अनुराधा, श्रवण, रेवती तथा शनिवार के दिन रोहिणी, स्वाति, श्रवण उक्त नक्षत्र होने पर सर्वसिद्धि योग का महासंयोग बनता है। भगवान विष्णु के अवतार श्री ब्रह्मा समर्थ परशुराम का अवतरण पृथ्वी पर इसी दिन हुआ था। तब भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का संयोग भी इसी दिन बना था। इस कारण अक्षय तृतीया को सर्वश्रेष्ठ स्थिति के अनुसार माना जाता है तथा इस दिन को स्वयं सिद्ध मुहूर्त जिसे हम अपनी भाषा में अबूझ मुहूर्त कहते हैं। इसे मरुप्रदेश में आखातीज के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय तृतीया को दिया गया दान पुण्य लक्षगुणा फल प्रदान करता है। कृषक गण भी इसी दिन खुशियां मनाते हैं क्योंकि उनकी फसलें कट जाती है और वे घर में धन धान्य से संपन्न हो जाते हैं। इस दिन स्वर्ण आभूषण की खरीदारी की जा जाती है क्योंकि इस खरीदारी को संपन्नता का प्रतिरूप माना जाता है।

भास्कर संवाददाता| मकराना

इस बार अक्षय तृतीय पर्व 18 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन सर्व सिद्ध योग में अक्षय तृतीय का महासंयोग बन रहा है जो कि अत्यंत शुभ योग है। आचार्य पंडित विमल पारीक के अनुसार निश्चित वार और निश्चित नक्षत्र के संयोग से यह योग बनता है। इस योग में किया गया कार्य सर्व इच्छा तथा मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इस बार अक्षय तृतीया विक्रम संवत 2075 वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को बुधवार 18 अप्रैल 2018 को है, जो कि कृतिका नक्षत्र युक्त है। जिससे सर्वार्थ सिद्धि योग बनते हैं। इससे पूर्व कृतिका नक्षत्र युक्त अक्षय तृतीया 17 अप्रैल 1980, 23 अप्रैल 1985, 24 अप्रैल 1993, 20 अप्रैल 1996, 18 अप्रैल 1999, 16 अप्रैल 2007, 24 अप्रैल 2012, 21 अप्रैल 2015 को थी। आचार्य पारीक ने बताया कि रविवार के दिन यदि अश्वनी, पुष्य, तीनों उत्तरा नक्षत्र, हस्त, मूल नक्षत्र हो तो सर्व सिद्धी योग का महासंयोग बनता है। इसी प्रकार सोमवार के दिन रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा, श्रवण, मंगलवार के दिन अश्वनी, कृतिका,आश्लेषा, उत्तराभाद्रपद, बुधवार के दिन कृतिका, रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा, गुरुवार के दिन अश्वनी, पुनर्वसु, पुष्य, अनुराधा, रेवती, शुक्रवार के दिन अश्वनी, पुनर्वसु, अनुराधा, श्रवण, रेवती तथा शनिवार के दिन रोहिणी, स्वाति, श्रवण उक्त नक्षत्र होने पर सर्वसिद्धि योग का महासंयोग बनता है। भगवान विष्णु के अवतार श्री ब्रह्मा समर्थ परशुराम का अवतरण पृथ्वी पर इसी दिन हुआ था। तब भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का संयोग भी इसी दिन बना था। इस कारण अक्षय तृतीया को सर्वश्रेष्ठ स्थिति के अनुसार माना जाता है तथा इस दिन को स्वयं सिद्ध मुहूर्त जिसे हम अपनी भाषा में अबूझ मुहूर्त कहते हैं। इसे मरुप्रदेश में आखातीज के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय तृतीया को दिया गया दान पुण्य लक्षगुणा फल प्रदान करता है। कृषक गण भी इसी दिन खुशियां मनाते हैं क्योंकि उनकी फसलें कट जाती है और वे घर में धन धान्य से संपन्न हो जाते हैं। इस दिन स्वर्ण आभूषण की खरीदारी की जा जाती है क्योंकि इस खरीदारी को संपन्नता का प्रतिरूप माना जाता है।

मंगल अश्विनी योग से निर्मित हो तो गृह प्रवेश श्रेष्ठ

आचार्य विमल पारीक ने बताया कि यदि सर्वसिद्धि योग में गुरु पुष्य योग से युक्त हो तो विवाह योग के लिए पूर्ण रूप से वर्जित है। यदि सर्वसिद्धि योग में शनि रोहिणी योग से निर्मित है तो यात्रा के लिए पूर्ण रूप से निषेध है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार मंगल अश्विनी योग से निर्मित हो तो ग्रह प्रवेश, भूमि पूजन, भूमि खनन कार्य कुआं, बावड़ी, तालाब, नलकूप के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। इस दिन कोई भी नवीन कार्य, नया कारोबार व्यापार, नवीन गृह प्रवेश, भूमि पूजन आदि कर सकते हैं। इस दिन सोने चांदी के आभूषण एवं वाहन, भूमि क्रय, महायज्ञ, अनुष्ठान, तंत्र साधना के लिए शुभ योग बनाता है।

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