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14 साल में कुचामन क्षेत्र में 60 फीट तक गिरा भू-जल स्तर, जिले में 100 से अधिक नलकूप बंद, 131 बंद के कगार पर

जिले में गत 13 वर्षों में कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर करीब 50 फीट से अधिक नीचे चला गया है। इतना ही नहीं कुचामन क्षेत्र...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:40 AM IST

14 साल में कुचामन क्षेत्र में 60 फीट तक गिरा भू-जल स्तर, जिले में 100 से अधिक नलकूप बंद, 131 बंद के कगार पर
जिले में गत 13 वर्षों में कई क्षेत्रों में भू-जल स्तर करीब 50 फीट से अधिक नीचे चला गया है। इतना ही नहीं कुचामन क्षेत्र में तो भू-जल का स्तर करीब 60 फीट तक नीचे गिर चुका है। सुनकर कुछ हैरानी जरूर होगी। लेकिन यही सच है। ऐसे में यदि समय रहते पानी बचाने के लिए विभिन्न उपाय नहीं किए तो वो दिन दूर नहीं होगा जब पानी के लिए त्राहिमाम मच जाएगी। इधर भू-जल स्तर के लगातार गिरने को लेकर भू-जल वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इसी तरह पानी को बर्बाद किया जाता रहा तो आगामी समय में भू-जल स्तर इतना नीचे चला जाएगा कि पानी की ट्यूबवैल, नलकूप आदि संसाधान किसी काम के नहीं रहेंगे। ऐसे में ना सिर्फ नागौर जिले में बल्कि प्रदेश में जल संकट विकराल रूप ले सकता है। इस भयाभय स्थिति से पहले नागौर जिले में 1 अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 तक तक भू-जल स्तर गिरने के कारण 83 नलकूप बंद हो चुके हैं। जबकि 131 नलकूप बंद होने के कगार पर हैं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि जलदाय विभाग से मिले आंकड़े बोल रहे हैं। ये तो सिर्फ चंद महीनों की रिपोर्ट है यदि पिछले कुछ समय की रिपोर्ट ली जाए तो स्थिति काफी चौंकाने वाली होगी। हालांकि विभाग की इस रिपोर्ट को कई जानकार गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि जिले में 100 से भी अधिक नलकूप बंद हो चुके हैं। लेकिन विभागीय अधिकारी अपनी साख बचाने के लिए गलत जानकारी दे रहे हैं।

जिले में सबसे ज्यादा कुचामन क्षेत्र में 59.46 फीट गिरा भू-जल स्तर, जबकि लाडनूं के कसुम्बी गांव में मात्र 23 फीट पर ही जल मिल जाता है।

जिले में कहां कितना गिरा भू-जल स्तर

भू-जल विभाग द्वारा वर्ष 2017 में किए गए सर्व रिपोर्ट के अनुसार जिले में सर्वाधिक कुचामन में 59.46 फीट भू-जल स्तर गिरा है। इसके अलावा मौलासर में 54.35 तथा 54.18 फीट भू-जल स्तर गिरने वाला खींवसर जिले में तीसरे स्थान पर है। चौंकाने वाली बात ये है कि खींवसर के ही नागड़ी गांव वर्तमान में 511 फीट नीचे पानी है। जिसके चलते जलदाय विभाग द्वारा खींवसर क्षेत्र को डार्क जॉन घोषित किया गया जा चुका है। इसी प्रकार मूंडवा में 53.92 फीट, मेड़ता में 46.95, परबतसर में 40.62, जायल में 40.52, मकराना में 29.56, डेगाना 28.61, रियां में 27.58, लाडनूं 15.08, डीडवाना 13.43 फीट भू-जल स्तर गिरा है। जबकि नावां में 9.27 और नागौर मुख्यालय पर 2.01 फीट भू-जल स्तर गिरकर जिले में सबसे अच्छी स्थिति में है। जिले में लाडनूं के कसुम्बी गांव का भू-जल स्तर सबसे ऊपर है। जहां पर मात्र 23 फीट पर ही जल मिल जाता है।

रिपोर्ट

जिले में घटते जल स्तर का परिणाम:

जलदाय विभाग द्वारा जिले भर में 4029 हैण्डपंप लगाए गए। जिनमें से 3753 ग्रामीण क्षेत्र में व 276 शहरी क्षेत्र में लगाए गए। जलदाय विभाग द्वारा जहां भूमिगत जल का स्तर 60 मीटर तक है वहां ऑडनरी हैण्डपंप व 90 मीटर तक के लिए एक्स्ट्रडीप हैण्डपंप लगवाए जाते है। डार्क जॉन वाले एरिया जहां जल का स्तर 90 मीटर से भी ज्यादा है वहां सोल्फर बेस्ट हैण्डपंप लगाए जाते हैं। जिले के खींवसर, मूंडवा, मेड़ता सिटी, मकराना, डेगाना, परबतसर आदि ब्लॉक जल स्तर में डार्क जॉन में होने के कारण वहां पर सोल्फर बेस्ट हैण्डपंप लगाए जा रहे हैं।

ऐसी फसलें करें, जिनमें पानी की खपत कम हो:

भूमि-जल स्तर को सुधारने के लिए सिंचाई के लिए ऐसे साधनों का प्रयोग करें जिससे भू-जल का प्रयोग कम मात्रा में हो। कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों का प्रयोग व भू-जल संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए। आर के गोदारा, भूजल वैज्ञानिक, नागौर

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