Hindi News »Rajasthan »Nagour» छात्रों तक पेपर पहुंचने के 7 स्टैप, 4 कमजोर कड़ी

छात्रों तक पेपर पहुंचने के 7 स्टैप, 4 कमजोर कड़ी

सेट होने से लेकर सेंटर तक जाने के बीच प्रश्नपत्र ऐसे हुए हैं लीक 1 विशेषज्ञ परीक्षा से तीन-चार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:45 AM IST

छात्रों तक पेपर पहुंचने के 7 स्टैप, 4 कमजोर कड़ी
सेट होने से लेकर सेंटर तक जाने के बीच प्रश्नपत्र ऐसे हुए हैं लीक

1विशेषज्ञ

परीक्षा से तीन-चार माह पहले नवंबर-दिसंबर में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन तीन या चार विषय विशेषज्ञों (पेपर सेटर) से प्रश्नपत्र मंगवाता है। हर एक विशेषज्ञ प्रश्नपत्रों के तीन-चार सेट बोर्ड को भेजता है। एेसे में इन्हें खुद पता नहीं होता कौन से प्रश्न परीक्षा में आएंगे।

3प्रिंटिंग प्रेस

2011 में प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारी के शामिल होने की जांच

सीबीएसई द्वारा आयोजित एआईईईई के प्रश्नपत्र लीक मामले में उस प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों के शामिल होने की बात सामने आई थी, जहां पेपर छापे गए थे। यह जानकारी बोर्ड ने अपनी जांच रिपोर्ट में दी। इतना ही नहीं वर्तमान में पेपर लीक मामले में भी पुलिस मध्य दिल्ली के एक प्रिंटिग प्रेस तथा कोचिंग संचालकों के बीच साठगांठ का पता लगाने में जुटी है।

5बैंक

कमजोर कड़ी

2006 में बैंक मैनेजर शामिल मिला

इस बेहद चर्चित मामले में कक्षा 12वीं का बिजनेस स्टडीज पेपर लीक हुआ। सीबीएसई के इस प्रश्नपत्र के लीक हो जाने की जानकारी पुलिस को वाराणसी बम ब्लास्ट से जुड़ी पड़ताल के दौरान मिली। तब पुलिस आरोपियों की तलाश में हरियाणा के पानीपत शहर में होटल तथा ढाबों पर छापे मार रही थी। आरोपी तो हाथ नहीं लगे, लेकिन पुलिस को लीक प्रश्नपत्र मिल गए। बाद में पुलिस ने इस मामले में 6-7 लोगों की गिरफ्तारी की। इनमें एक बैंक मैनेजर तथा कैशियर भी शामिल था।

सेट में तैयार पेपर जनवरी में प्रिंट के लिए जाते हैं। कई तरह के सेट प्रिंटिंग के लिए भेजे जाते हैं, ताकि पता न चले कौन-सा फाइनल है। प्रिंटिंग प्रेस देश में कहीं भी हो सकती है। फिर यह कमजोर कड़ी है।

इन्हें सीधे सेंटर नहीं भेजा जाता। ये शहर के किसी बैंक में रख दिए जाते हैं। मगर यहां भी सेंध लग चुकी है।

इस हफ्ते सबसे चर्चित रहा सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई पेपर लीक मामला। इसने यह भी साफ कर दिया कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा हॉल तक पहुंचने की शृंखला में कई ऐसी कड़ियां हैं, जहां गड़बड़ी की आशंका है। ऐसे में यहां वो सबकुछ एकसाथ जो पेपर लीक के बारे में आप समझना चाहते हैं। साथ में इस एक्जाम सिस्टम की कमजोर कड़ियां। - भास्कर न्यूज नेटवर्क

2सीबीएसई

कमजोर कड़ी

2004 में यहीं के कर्मचारी पर लगे थे आरोप

सीबीएसई-पीएमटी से पहले दिल्ली पुलिस के हाथ फिजिक्स तथा केमिस्ट्री के प्रश्नों का ऐसा सेट लगा, जो असल प्रश्नपत्र से हू-ब-हू मेल खाता था। इसमें उत्तर भी थे। पुलिस ने मामले में सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय के एक कर्मचारी को आरोपी बनाया। उस पर एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक को प्रश्नपत्र बेचने के आरोप थे। इस मामले की तरह 2011 में नागपुर में भी सीबीएसई के एक सीनियर अफसर प्रीतम सिंह को पैसों के लालच में एआईईईई के पत्र बेचने का आरोपी बनाया गया था। वे 2005 से यह काम करते आ रहे थे।

इसके बाद सीबीएसई हेडक्वार्टर में क्वेश्चन पेपर कमेटी के सदस्य प्रश्नों को फाइनल करते हैं। तीन सेट में पेपर तैयार करते हैं। यह काम दिसंबर-जनवरी में होता है। सभी सेट हाथ से लिखे होते हैं, ताकि लीक होने पर हैंडराइटिंग से पहचान हो सके। फिर भी पेपर सुरक्षित नहीं।

6पर्यवेक्षक

परीक्षा की सुबह हर सेंटर के लिए सीबीएसई द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों को एसएमएस से जानकारी मिलती है कि उन्हें प्रश्नपत्रों का कौन सा सेट बैंक से लेना है। ये सेट लेकर परीक्षा हॉल तक पहुंचते हैं। मगर ध्यान रखते हैं कि पेपर 1 घंटे से ज्यादा पहले सेंटर न पहुंचे।

4परिवहन

प्रिंट हो चुके प्रश्नपत्र सील बंद बॉक्स में एक बार फिर सीबीएसई के ‘सेक्रेसी’ डिपार्टमेंट पहुंचते हैं। यहां से ये करीब एक हफ्ते पहले अलग-अलग शहरों के लिए रवाना कर दिए जाते हैं।

7परीक्षा केंद्र

सेंटर पर परीक्षा से 15 मिनट पहले प्रश्नपत्रों की सील खोली जाती है। मगर ऐसा न हो तो गड़बड़।

कमजोर कड़ी

2011 में प्रिंसिपल दोषी

निकोबार में सीबीएसई की 12वीं का फिजिक्स व गणित का पेपर लीक हुआ था। मामले में पोर्ट ब्लेयर की विशेष कोर्ट ने नवंबर 2011 में चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसमें लापैथी के सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल कृष्णन राजू भी शामिल था। इस मामले में पेपर बैंक में नहीं, प्रिंसिपल के पास सुरक्षित थे।

ताजा केस में क्या-क्या हुआ?

28मार्च

दो हफ्ते से पेज लीक होने की खबरों से इंकार करते रहे सीबीएसई ने 10वीं के गणित तथा 12वीं के इकोनॉमिक्स का पेपर रद्द कर दिया। सीबीएसई ने माना कि हाथ से लिखे पेपर जो व्हाट्स-एप पर छात्रों के पास पहुंचे वे हू-ब-हू असल प्रश्न-पत्र जैसे ही हैं। 10वीं का पेपर इस घोषणा से सिर्फ 90 मिनट पहले ही खत्म हुआ था। वहीं इकोनॉमिक्स का सोमवार को हो चुका था।

29मार्च

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन। दावा किया कि सीबीएसई के सभी पेपर लीक हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने करीब 15 जगह छापेमारी की। 18 स्टूडेंट्स और पांच कोचिंग सेंटर संचालकों सहित 25 लोगों से पूछताछ की। झारखंड के चतरा में भी छह छात्रों और कोचिंग संचालकों को हिरासत में लिया गया।

30मार्च

जंतर-मंतर के साथ-साथ दिल्ली में सीबीएसई ऑफिस के सामने भी छात्रों का धरना। कक्षा 12 के इकोनॉमिक्स के पेपर की तारीख 25 अप्रैल तय की। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गूगल को पत्र लिख सीबीएसई चेयरपर्सन को मेल भेजने वाले की जानकारी मांगी।

कहां तक पहुंची जांच?: पुलिस सोर्स तक पहुंचने के लिए व्हाट्स-एप पर प्रश्नपत्र फॉरवर्ड करने वाले फोन नंबरों की चेन को खंगाल रही है। अभी तक ऐसे 40 मोबाइल नंबर हाथ लगे हैं। ये नंबर 10वीं के 24 और 12वीं के 10 छात्र हैं।

आगे क्या?: जानकारों का मानना है कि पेपर लीक करने वाला काफी चालाक है। इसलिए उसने पेपर हाथ से लिखे। वह इन्हें गैस पेपर बता सकता है। क्योंकि परीक्षा के दिनों में गैस पेपर बाजार में आना सामान्य बात है।

बोर्ड को चेताया या चुनौती दी?

क क्षा 10वीं का गणित का जो प्रश्न-पत्र लीक हुआ है, उसकी एक कॉपी एक दिन पहले सीबीएसई चेयरपर्सन के मेल पर भेजी गई थी। यानी पेपर लीक करने वाले गिरोह ने सीबीएसई के सामने खुली चुनौती पेश की। या फिर एक दिन पहले सीबीएसई को पेपर लीक की जानकारी देकर कोई व्हिसलब्लोअर का काम करना चाहता था?

08

लाख छात्र 12वीं के

देशभर के छात्र क्यों हुए प्रभावित?

इ स बार सीबीएसई का पेपर लीक होने से देशभर के छात्र प्रभावित हुए हैं। इसलिए कि सीबीएसई ने इसी साल देशभर में एक्जाम को सेंट्रलाइज्ड कर दिया है। पहले रीजन के लिहाज से प्रश्नपत्र अलग होते थे, लेकिन अब एक से होते हैं। इतना ही नहीं अब तक पेपर के कई सेट बनते थे। अलग-अलग सेट्स में सवालों में कुछ अंतर भी होता था। मगर इस बार सीबीएसई ने परंपरा तोड़ी और इकोनॉमिक्स के प्रश्नपत्र का एक ही सेट बनाया। इससे देशभर के 12वीं के छात्र प्रभावित हुए।

1000

छात्र

ये एसएससी जैसा लीक या अलग?

स्टा फ सेलेक्शन कमीशन यानी एसएससी द्वारा इस साल 17 से 22 फरवरी तक हुई कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा के दूसरे चरण से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक हुए थे। एसएससी ने 21 फरवरी का पेपर-वन रद्द करने की घोषणा तीन दिन बाद की। लीक सोशल मीडिया पर हुआ, लेकिन अंतर यह है कि एसएससी अॉनलाइन थीं, सीबीएसई ऑफलाइन। इसलिए एसएससी में परीक्षा आयोजित करवाने वाली निजी एजेंसी व सेंटर संचालक जांच के घेरे में हैं।

इन्हें फिर से परीक्षा देनी होगी। 10वीं के 16.38 लाख छात्र, लेकिन सभी की दोबारा परीक्षा नहीं होगी।

सेे ज्यादा तक पहुंच चुका था, सीबीएसई का लीक प्रश्नपत्र, ऐसी पुलिस ने आशंका जताई है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Nagour

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×