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190 शहरों को बनाने होंगे एक-एक सेंट्रल पार्क और बालोद्यान

जयपुर। जयपुर की 50 लाख जनता के फेंफड़े मजबूत करने के लिए खातीपुरा-वैशाली के पास प्रस्तावित दूसरा सेंट्रल पार्क तो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:45 AM IST

जयपुर। जयपुर की 50 लाख जनता के फेंफड़े मजबूत करने के लिए खातीपुरा-वैशाली के पास प्रस्तावित दूसरा सेंट्रल पार्क तो अटक गया, लेकिन राजधानी के पुराने सेंट्रल पार्क की तर्ज पर 190 अन्य शहरों में सेंट्रल पार्क बनाने होंगे। यह योजना स्वायत्त शासन विभाग की है। अब जयपुर की तर्ज पर मिड ऑफ सिटी सेंट्रल पार्क को लाइफ लाइन मानते हुए दूसरे सभी शहरों में ग्रीन स्पेस तैयार किया जाएगा। हर शहर में 15 फीसदी ग्रीन स्पेस की सेंटर की गाइड लाइन की पालना में ये सेंट्रल पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग सभी स्थानीय निकायों को अपने मास्टर व जोनल प्लान का सेंट्रल पार्क को प्रमुख स्थान के रूप में शामिल करवाने की योजना फाइनल कर चुके हैं। इसके लिए हर स्थानीय निकाय को अपने सिटी का ग्रीन कवर एरिया का प्लान बनाकर सरकार के पास भेजना होगा। इसके बाद उसे सेंट्रल पार्क का दर्जा मिलेगा।

शहरी पार्कों की सूची बनेगी, हर साल एक पार्क विकसित करेंगे

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में खेल, हरियाली या बच्चों के लिए छोड़े गए स्थानों के साथ पार्कों की सूची तैयार होगी। सभी उद्यान के रूप में विकसित करने से पहले पार्कों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद हर साल उस सूची में प्रत्येक शहर को एक-एक पार्क बालोद्यान के रूप में और एक-एक पार्क सीनियर सिटीजन पार्क के रूप में विकसित करने का प्लान है।

नया प्लान केवल सड़क-बिजली-पानी की लाइन पर आधारित नहीं है। बल्कि हर शहर का डवलपमेंट प्लान तैयार कर रहे हैं। इसमें ग्रीन स्पेस का खास महत्व दिया है। -आर.के. विजयवर्गीय, सीनियर टाउन प्लानर, एलएसजी

हर शहर में कम से कम एक बालोद्यान जरूरी

सरकार की योजना है कि हर शहर में एक बालोद्यान भी बनाया जाए। बच्चे बालोद्यान के माध्यम से मछली, पशु-पक्षी से अवगत हों तथा उनका मनोरंजन हो। इसके लिए हर नगर निगम, नगर परिषद और पालिका क्षेत्र में एक-एक बालोद्यान बनाने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। जयपुर में बालोद्यान के बाद जेएलएन मार्ग से बने तितली गार्डन की तर्ज पर बच्चों को आकर्षित करने वाले बालोद्यान बनाने पर जोर रहेगा।

खाली जमीनों के जरिये हरियाली बढ़ाएंगे

सरकार की योजना है कि शहरों में सरकार की खाली पड़ी जमीनों के माध्यम से भी हरियाली को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए योजना बनाई जा रही है कि हर सरकारी जमीन को पीपीपी मॉडल पर निजी हाथों में देने की योजना बनाई जाए। निजी क्षेत्र में कुछ साल के लिए सरकारी जमीनें दी जाएगी, उसके लिए शर्तें रखी जाएंगी, कि उसके 60 या 70 फीसदी क्षेत्र में केवल वृक्षारोपण अनिवार्य होगा।

डूंगरसिंह राजपुरोहित

जयपुर। जयपुर की 50 लाख जनता के फेंफड़े मजबूत करने के लिए खातीपुरा-वैशाली के पास प्रस्तावित दूसरा सेंट्रल पार्क तो अटक गया, लेकिन राजधानी के पुराने सेंट्रल पार्क की तर्ज पर 190 अन्य शहरों में सेंट्रल पार्क बनाने होंगे। यह योजना स्वायत्त शासन विभाग की है। अब जयपुर की तर्ज पर मिड ऑफ सिटी सेंट्रल पार्क को लाइफ लाइन मानते हुए दूसरे सभी शहरों में ग्रीन स्पेस तैयार किया जाएगा। हर शहर में 15 फीसदी ग्रीन स्पेस की सेंटर की गाइड लाइन की पालना में ये सेंट्रल पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग सभी स्थानीय निकायों को अपने मास्टर व जोनल प्लान का सेंट्रल पार्क को प्रमुख स्थान के रूप में शामिल करवाने की योजना फाइनल कर चुके हैं। इसके लिए हर स्थानीय निकाय को अपने सिटी का ग्रीन कवर एरिया का प्लान बनाकर सरकार के पास भेजना होगा। इसके बाद उसे सेंट्रल पार्क का दर्जा मिलेगा।

शहरी पार्कों की सूची बनेगी, हर साल एक पार्क विकसित करेंगे

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में खेल, हरियाली या बच्चों के लिए छोड़े गए स्थानों के साथ पार्कों की सूची तैयार होगी। सभी उद्यान के रूप में विकसित करने से पहले पार्कों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद हर साल उस सूची में प्रत्येक शहर को एक-एक पार्क बालोद्यान के रूप में और एक-एक पार्क सीनियर सिटीजन पार्क के रूप में विकसित करने का प्लान है।

नया प्लान केवल सड़क-बिजली-पानी की लाइन पर आधारित नहीं है। बल्कि हर शहर का डवलपमेंट प्लान तैयार कर रहे हैं। इसमें ग्रीन स्पेस का खास महत्व दिया है। -आर.के. विजयवर्गीय, सीनियर टाउन प्लानर, एलएसजी

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