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जैकेट व पेज एक का शेष

सरकार चाहती है कि संसदीय सचिवों के मामले में कोर्ट से उसे समय मिल जाए। लेकिन सूत्रों के मुताबिक महाधिवक्ता ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:45 AM IST

सरकार चाहती है कि संसदीय सचिवों के मामले में कोर्ट से उसे समय मिल जाए। लेकिन सूत्रों के मुताबिक महाधिवक्ता ने सरकार के उच्च अधिकारियों को यह स्पष्ट कह दिया है कि इस मामले में सरकार का पक्ष बेहद कमजोर है और उसे संसदीय सचिवों के इस्तीफे ले लेने चाहिए। संसदीय सचिवों को लाभ के पद के आधार पर अयोग्य होने से बचाने के लिए सरकार पिछले साल ही विधानसभा में विधेयक पारित करवा चुकी है। विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि कोई विधायक संसदीय सचिव नियुक्त हो जाता है तो वह लाभ के पद के आधार पर अयोग्य नहीं होगा।

राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका : सुप्रीम कोर्ट ने बिमोलांगशु रॉय बनाम स्टेट ऑफ आसाम एंड अदर्स के फैसले में साफ कर दिया है कि राज्य सरकारों को संसदीय सचिव की नियुक्ति की पावर ही नहीं है। राजस्थान हाईकोर्ट में इस आदेश की पालना करवाने के लिए जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार राज्य सरकारें संसदीय सचिवों की परिकल्पना ही नहीं कर सकती है। संसदीय सचिवों की नियुक्त करना तो दूर की बात है। हाईकोर्ट से अपील की है कि वह प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को तुरंत प्रभाव से रद्द करें।

हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट मान चुके हैं संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध : संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को कई राज्यों में चुनौती दी जा चुकी है। इन पर सुनवाई करते हुए संबंधित राज्यों के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट संसदीय सचिवों को मंत्रिमंडल की 15 प्रतिशत की सीमा में शामिल मान चुके हैं। इस सबसे पहला केस गोवा विधानसभा में आया। सुनवाई करते हुए संसदीय सचिवों को मंत्रिमंडल की 15 प्रतिशत सीमा में मानते हुए इनकी नियुक्ति को अवैध माना। हिमाचल हाईकोर्ट ने भी वहां की विधानसभा में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध ठहराया। पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट ने भी इसी प्रकार का फैसला देते हुए संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध बताया। असम में हाल में इसी तरह की याचिका पेश हुई जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंगवाया और डिसाइड किया कि संसदीय सचिव 15 प्रतिशत की सीमा में ही आते हैं।

पिछली सरकार में संसदीय सचिवों की नियुक्ति के खिलाफ कोर्ट गए थे भाजपा नेता : पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने अपने कार्यकाल में 13 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी। इनमें जाहिदा खान, रामस्वरूप कसाना,राजेंद्र सिंह विधुड़ी, ममता भूपेश, कन्हैया लाल झवर, जयदीप डूडी, गजेंद्र सिंह, गिरिराज सिंह, रमेश मीणा, रामकेश मीणा, दिलीप सिंह चौधरी, ब्रह्मदेव कुमावत और नानालाल निनामा शामिल थे। इन संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए भाजपा के कालीचरण सराफ व अशोक परनामी कोर्ट चले गए। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली।

शुरुआती आधे कॅरिअर...

स्मिथ के कॅरिअर को इसलिए भी बड़ा धक्का लगा है क्योंकि हाल ही में एशेज के शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें ‘बेस्ट सिंस ब्रैडमैन’ कहा जा रहा था, जबकि अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल ने कहा है कि- मुझे नहीं लगता कि स्मिथ अब कभी टीम के कप्तान बन पाएंगे। क्योंकि कप्तान के प्रति टीम के अन्य खिलाड़ियों में सम्मान होना चाहिए, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे दोबारा यह सम्मान पा सकेंगे।

पति-प|ी का बैंक...

जांच में यह भी पता चला कि कंपनी को जनवरी 2012 से अगस्त 2012 के बीच करीब 145.76 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। जिसमें से सिर्फ 16.51 करोड़ रुपए कंसोर्टियम बैंक के खातों में जमा किए गए, जबकि 121.25 करोड़ रुपए गलत तरीके से दूसरे खातों में डाइवर्ट कर दिया गया। शिकायत में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि कंपनी ने अपने खर्चों को अधिक दिखाने के लिए लेबर चार्ज को बढ़ा कर दिखाया, जबकि दूसरी लागतों में किसी तरह की वृद्धि नहीं हुई। यह काम फंड को गलत तरीके से दूसरे खातों में स्थानांतरिक करने के लिए किया गया था।

सीबीआई के सूत्रों के अनुसार तोतेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की गड़बड़ियों का पता चलने के बाद बैंक ने कंपनी के खातों का फाॅरेंसिक आडिट कराना चाहा था। लेकिन कंपनी के डायरेक्टर्स ने उनका सहयोग नहीं किया।

1173 करोड़ का...

वर्ष 2010-11 में जहां एज्युकेशन लोन का प्रति छात्र अकाउंट 2.5 लाख रुपए था वहीं वर्ष 2016-17 में यह बढ़कर 6.77 लाख रुपए हो गया है। शुक्ल ने बताया कि सरकार ने शिक्षा ऋण में एनपीए को कम करने के लिए छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आईबीए आदर्श शिक्षा योजना में बदलाव किया है। जिसके तहत पुनर्भुगतान अवधि को 15 वर्ष तक बढ़ाना शामिल है। साथ ही एज्युकेशन लोन के लिए क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम (सीजीएफईएल) शुरू की है, जिसके तहत 7.5 लाख रुपए तक के लोन दिए जाते हैं। इसमें 75 फीसदी चूक की राशि की गारंटी केंद्र सरकार देगी। सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार मार्च 2017 तक 67,678.5 करोड़ रुपए के एज्युकेशन लोन का बकाया था जिसमें 5,191.72 करोड़ रुपए का एनपीए था। अगर बैंकों के हिसाब से देखें तो इस दौरान केनरा और इंडियन आेवरसीज बैंक का एनपीए बीते वर्ष की तुलना में घटा है। केनरा बैंक का मार्च 2016 में एनपीए 316.6 करोड़ रुपए था जो मार्च 2017 में घटकर 265.49 करोड़ रुपए पर आ गया। इसी दौरान इंडियन ओवरसीज बैंक का एनपीए 651.16 करोड़ से घटकर 384.2 करोड़ रुपए पर आ गया। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए बढ़ा है। पीएनबी का एनपीए मार्च 2016 के 388.67 करोड़ रुपए से बढ़कर 478.03 करोड़ रुपए हो गया। वहीं एसबीआई का एनपीए इस दौरान 454 करोड़ से बढ़कर 538.17 करोड़ रुपए पर आ गया। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में राज्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और भारतीय स्टेट बैंक ने आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार एनपीए को प्राइवेट असेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनीज़ (एआरसी) को बेच दिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने 1565 करोड़ एनपीए में से 915.28 करोड़ रुपए के एनपीए बेंच दिए हैं।

घर खर्च चलाने...

इस बारे में महिला थाना की एएसआई ममता शर्मा बताती हैं कि सीमा महिला थाने आई थी। पूछताछ में उसने बताया कि उसे अपने पति से ही जान का खतरा है। वो उसे पीटता है। प्रेग्नेंसी की हालत में पेट में लातें मारता है।

महिला थाना प्रभारी और पुलिस उप महानिरीक्षक को अपने पति के खिलाफ सीमा ने शिकायत दर्ज कराई है। उसने लिखा है कि उसे जान का खतरा है।

(स्टोरी में महिला की पहचान छिपाने के उद्देश्य से पति-प|ी के नाम परिवर्तित किए गए हैं।)

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