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बीते 21 में से 11 साल भर्ती नहीं, दस साल बाद ढूंढ़े नहीं मिलेंगे सीनियर आरएएस

पिछले दो दशक में राज्य सरकारों के कुप्रबंधन और राजनीतिक हस्तक्षेप से राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अफसरों के कैडर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:50 AM IST

पिछले दो दशक में राज्य सरकारों के कुप्रबंधन और राजनीतिक हस्तक्षेप से राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अफसरों के कैडर का ढांचा पूरी तरह बिगड़ गया है। हालत यह है कि अगले दस साल बाद राज्य में सीनियर आरएएस अफसर ढूंढ़े नहीं मिलेंगे। बीच में कई ऐसे साल आएंगे जब कोई अफसर आरएएस से आईएएस नहीं बन पाएंगे। इसका मुख्य कारण यह रहा कि कानूनी विवादों के कारण पिछले 21 साल में 11 साल में परीक्षाएं ही नहीं हुईं, जिसके कारण आरएएस अफसरों का चयन नहीं हुआ। राजस्थान प्रशासनिक सेवा का 1050 अफसरों का कैडर है। इसमें से 116 अफसर 1996 बैच तक के हैं, जो अगले कुछ सालों में आरएएस से आईएएस बन जाएंगे। कार्मिक विभाग की वेबसाइट के अनुसार 1997 से 2017 के बीच 754 आरएएस अफसर सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से केवल 401 आरएएस सीधे चयन वाले हैं। जबकि आरएएस अफसरों की कमी के चलते तहसीलदार सेवा के अफसरों को तय कोटे से अधिक प्रमोट करके आरएएस बनाया गया है। यह संख्या 353 है। ऐसे में राज्य में आने वाले समय में सीनियर ग्रेड में आरएएस अफसरों की कमी महसूस की जाएगी। सीनियर आरएएस सरकार में फील्ड और सचिवालय में आईएएस अफसरों के बीच सेतु का काम करते हैं।

राजनीतिक हस्तक्षेप और कानूनी विवादों से बिगड़ा आरएएस कैडर का ढांचा

इन वर्षों में नहीं हुआ आरएएस का चयन

2000, 2002, 2003, 2004, 2005, 2007, 2009, 2012, 2013, 2014 और 2016

...और इन वर्षों में चयन

सन संख्या

1997 51

1998 26

1999 19

2001 35

2006 56

सन संख्या

2008 11

2010 12

2011 70

2015 73

2017 48

आरएएस का कैडर स्ट्रेंथ

1050

आरएएस की मौजूदा तैनाती

राज्य को मिले हर साल आईएएस

राज्य को 1997 से 2017 के बीच हर साल आईएएस मिले। कोई भी ऐसा साल नहीं रहा, जब कानूनी विवादों के कारण राज्य को आईएएस न मिले हों। इस दौरान राजस्थान को 108 आईएएस मिले। इसमें सबसे कम 2009 में एक और सबसे अधिक 2014 में 10 आईएएस अफसर मिले है।

870

आईएएस का कैडर स्ट्रेंथ

313

प्रमोशन में आरपीएस से पिछड़ गए आरएएस

प्रमोशन के मामले में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अफसर राजस्थान पुलिस सेवा से नौ साल पिछड़ चुके हैं। 1997 बैच तक के आरपीएस अफसरों का भारतीय पुलिस सेवा में चयन हो चुका है। राजस्थान वन सेवा के 1995 तक के अफसर भारतीय वन सेवा में आ चुके हैं, लेकिन राजस्थान प्रशासनिक सेवा के 1989 बैच के अफसर ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकार के कुप्रबंधन का असर आरएएस अफसरों के कैडर पर भी पड़ रहा है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा राज्य की सबसे टॉप सर्विस है। इसके बावजूद यह हाल है। आरपीएस से आईपीएस में प्रमोट हुए तमाम अफसर जिले तो कई संभाग की कमान संभाल रहे हैं, जबकि उन्हीं के बैच के आरएएस अफसर अपने पुराने पदों पर ही कार्य कर रहे हैं। अधिक अंक पाकर आरएएस आज भी किसी जिले में एडीएम या जिला परिषद में सीईओ के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं।

राज्य में चाहे जिस पार्टी की सरकार हो। उसे चाहिए की स्थिरता लाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर राजस्थान पब्लिक सर्विस कमिशन को भी स्वतंत्र होकर कार्य करने देना चाहिए। यह तभी संभव है, जब राजनीतिक हस्तक्षेप कम हो। आखिर क्या कारण हैं कि यूपीएससी की परीक्षाएं हर साल होती हैं और आरपीएससी की परीक्षा कई साल तक नहीं हो पातीं। इसका जवाब सरकारों को देना चाहिए। मौजूदा स्थिति चिंताजनक है। -इंद्रजीत खन्ना, पूर्व मुख्यसचिव

सरकार को आरएएस अफसरों की वार्षिक तौर पर भर्ती करना चाहिए। उसी के अनुसार प्रमोशन भी करना चाहिए, तभी स्थिरता आएगी। साथ ही एक साल में एक ही वर्ष की भर्ती होना चाहिए। दो साल की एक वर्ष में परीक्षाएं आयोजित करने से भविष्य में प्रमोशन का संकट खड़ा हो जाता। -प्रेम सिंह चारण, उपाध्यक्ष आरएएस एसोसिएशन

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Web Title: बीते 21 में से 11 साल भर्ती नहीं, दस साल बाद ढूंढ़े नहीं मिलेंगे सीनियर आरएएस
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