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सेल्फ एम्प्लाॅइड को फायदा

ट्रस्टों और संस्थानों द्वारा 10 हजार से अधिक नकद भुगतान अब नहीं कैश लेन-देन को नियंत्रण में रखने के लिए...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:35 AM IST
ट्रस्टों और संस्थानों द्वारा 10 हजार से अधिक नकद भुगतान अब नहीं

कैश लेन-देन को नियंत्रण में रखने के लिए ट्रस्टों और संस्थानों को 10 हजार रुपए से अधिक के भुगतान करने की अनुमति नहीं होगी अन्यथा इस पर टैक्स लगेगा। इसके अलावा यदि उसने टीडीएस नहीं दिया और खर्च किया तो खर्च की राशि का 30 प्रतिशत उसकी इनकम में जुड़ जाएगा। साथ ही इन संस्थानों ने यदि 2.5 लाख रुपए से ज्यादा का निवेश किया है तो पैन अनिवार्य होगा।

काले धन पर रोक। ये ट्रस्ट अब कार, भवन या अन्य वस्तुएं नकद नहीं ले सकेंगे।


सेल्फ एम्प्लाॅइड को फायदा

ब जट प्रावधान में कस्टम ड्यूटी में की गई कमी और बढ़ोतरी का असर घर की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ेगा। हालांकि विदेशी सामान और विदेशी कंपनियों से भारतीय कंपनियों को संरक्षित करने के लिए इस तरह का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा।

वेतनभोगी के लिए बजट में खास राहत नहीं है। मामूली राहत नई कामकाजी महिलाओं के लिए ईपीएफ के रूप में दी है। साथ ही काॅर्पोेरेट छूट से कुछ हद तक कारोबार बढ़ेगा, साथ ही नई नौकरियां मिल सकेंगी। सोनल अरोड़ा, वीपी, टीमलीज़

ड्यूटी में बदलाव का आप पर असर, महंगा ज्यादा- सस्ता कम

टैक्स तो सरकार ले ही लेगी

माेबाइल, लैपटॉप महंगे


सेल्फ एम्प्लाइड के एनपीएस आहरण पर 40% की टैक्स छूट मिलेगी। पहले यह वेतनभोगियों को ही मिलती थी।

स्टॉक इन ट्रेड को इनवेस्ट में बदलने पर लगेगा टैक्स

स्टॉक इन ट्रेड को इनवेस्ट में बदलने पर वर्तमान मार्केट रेट से टैक्स लग जाएगा। इसे एेसे समझें- मान लीजिए किसी भवन निर्माता के पास कई भवन हैं। यदि वह इसे इनवेस्टमेंट बताकर इन्डेक्सेशन (महंगाई दर के हिसाब से एक सीमा तक छूट) का फायदा उठाना चाहता है तो उसे सरकार को टैक्स देना पड़ेगा। अभी तक इस तरह का कोई प्रावधान नहीं था और इसका फायदा ट्रेडर उठाते थे।

सरकार का टैक्स इससे बढ़ेगा। ट्रेडर इस तरह की बेजा छूट का फायदा नहीं ले पाएगा।

नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम बजट का सबसे चर्चित फैसला है। इस बार कई छोटे-छोटे प्रावधान किए गए हैं जो किसानों को प्रोत्साहन देंगे। एमएसएमई से लेकर कार्पोरेट सेक्टर तक, सबका ख्याल रखा गया है। -उषा अनंत सुब्रमण्यम, चेयरमैन, आईबीए

आपकी आयकर की फाइल कौन देख रहा अब पता नहीं होगा

टैक्स असेसमेंट की नई योजना पेश की है। अब टैक्स असेसमेंट इलेक्ट्रोनिक मोड से होगा। इनकम टैक्स आकलन को कर क्षेत्र से मुक्त करने का प्रावधान है। मकसद भ्रष्टाचार खत्म करना है। नई व्यवस्था में दिल्ली के व्यक्ति की जांच मुंबई का अफसर सॉफ्टवेयर के द्वारा दिए गए कोड के आधार पर करेगा। अफसर उस व्यक्ति से संपर्क नहीं कर सकेगा, जिसकी आयकर जांच हो रही है।

अभी टैक्स का आकलन उसी क्षेत्र में होता है, करदाता जहां का निवासी होता है।

सस्ता


एमएसएमई फंडिंग जीएसटीएन से जुड़ेगी

बैंकों के द्वारा एमएसएमई फंडिंग को जीएसटीएन से जोड़ने की घोषणा की, है जिससे एमएसएमई बैंकों को गलत स्टॉक स्टेटमेंट तथा फायनेंशियल स्टेटमेंट इत्यादी सबमिट नहीं कर पाएंगे जिससे गलत फंडिंग संभव नहीं होगी।

स्वास्थ्य और गरीबों के कल्याण पर ज्यादा जोर दिया है। वेतनभोगियों को राहत देते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन फिर से दी गई है जो सरकार का बेहतर कदम है। बुजुर्गों को एफडी ब्याज पर छूट अच्छा कदम है। सीए भावना दोषी, वरिष्ठ सलाहकार केपीएमजी

इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं

ट्रांसपोर्ट , मेडिकल रींबर्समेंट भत्ते छीनकर दी मात्र 177 रु. राहत

5 लाख वाले को 177 की बचत जबकि 20 लाख सालाना वाले को 2315 का बोझ


टैक्स कितना बचेगा- कोई नौकरीपेश कितना टैक्स बचाएगा, ये उसके टैक्स स्लैब पर निर्भर करेगा। अभी तक जो लोग 5 प्रतिशत टैक्स चुका रहे हैं, वे इस स्टैंडर्ड डिडक्शन तथा सेस के कारण टैक्स में 177 रुपये की छूट पाएंगे। 20 प्रतिशत टैक्स चुकाने वाले 81 रुपए जबकि आय अगर 20 लाख रुपए है ऐसे में 30 प्रतिशत टैक्स वाले 2315 रुपये का अतिरिक्त बोझ आएगा।

कॉर्पोरेट टैक्स 25 प्रतिशत करने से 99 प्रतिशत कंपनियों को फायदा


इससे 99 फीसदी कंपनियों को फायदा होगा। सरकार के इस फैसले से देश के उद्योगों को 2018-19 में 7 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा इससे वे नए रोजगार पैदा कर सकेंगे।

महिलाओं को जेटली का गिफ्ट, हाथ में आएगी ज्यादा सैलरी



आम चुनाव के चलते कृषि, नौकरीपेशा व बुजुर्ग सबको फायदा दिया है लेकिन कर राहत न देना और एलटीसीजी टैक्स उम्मीद के विपरीत है। क्रूड के बढ़ते दाम व बैंकों का एनपीए जैसी चुनौतियां है। -अनुराधा राव, एमडी एंड सीईओ, एसबीआई म्युचुअल फंड

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