• Hindi News
  • Rajasthan
  • Nagour
  • जेटली फिर आर्थिक नियति बदलने वाला साहस न दिखा सके
--Advertisement--

जेटली फिर आर्थिक नियति बदलने वाला साहस न दिखा सके

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:35 AM IST

Nagour News - ब जट में अच्छी बात यह है कि किसानों को काफी कुछ मिल सकता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना यह भाजपा का बहुत पुराना वादा...

जेटली फिर आर्थिक नियति बदलने वाला साहस न दिखा सके
ब जट में अच्छी बात यह है कि किसानों को काफी कुछ मिल सकता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना यह भाजपा का बहुत पुराना वादा है और अच्छी बात है कि अंतत: यह पूरा हुआ। किसानों को हमेशा दोनों तरफ अच्छा मिल जाता है। यही वजह है कि हमारे इतने सारे सांसद जताते रहते हैं कि वे किसान हैं। वे आयकर नहीं चुकाते और अब उनकी खरीफ फसल से उन्हें 50 फीसदी के मुनाफे की गारंटी है। कोई बुरी बात नहीं है खास तौर पर तब जब हममें से ज्यादातर लोग बिज़नेस में नफा-नुकसान बराबर ही कर पाए तो खुद भाग्यशाली मानेंगे।

स्वास्थ्य रक्षा में पहल का स्वागत है। गरीब परिवार एक गंभीर बीमारी के प्रहार से पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं। उम्मीद है कि अंतत: यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य रक्षा कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा। इससे कई कम आय वाले परिवार हेल्थकेयर की बढ़ती लागत से निपट पाएंगे अौर दरिद्र होेने से बच जाएंगे। ईश्वर न करें परिवार में किसी को ऐसा रोग हो जाए जिस पर अस्पताल में लंबे संघर्ष के बाद िवजय पाई जा सके।

मध्यमवर्ग को वाकई कुछ नहीं मिला। बल्कि उसे तो कैपिटल गेन्स टैक्स भी देना होगा, जो मुझे लगता है शेयर बाजार के उत्साह को खत्म कर देगा। निवेशक शेयर और इक्विटी म्युच्युअल फंड में पैसा लगाने के पहले दो बार सोचेंगे। कम से कम अभी तो यही दशा होगी। लेकिन बैंकों की ब्याज दरें देखते हुए मेरा अनुमान है कि उनके पास इक्विटी म्युच्युअल फंड में बने रहने के अलावा चारा नहीं है। पेंशनभोगियों को आंशिक मार पड़ेगी। उन्हें कुछ तो मिला है लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं है कि उनका पूरा भला करे।

वैश्विक चलन और ट्रम्प द्वारा अमेरिका में कॉर्पोरेट टैक्स 35 से 21 फीसदी लाने से जिन कॉर्पोरेट्स को इसकी उम्मीद थी, वे बहुत हताश हुए हैं। हमें कॉर्पोरेट टैक्स को अधिक तर्कसंगत स्तर पर लाना होगा। इतने स्तर पर कि विदेशी निवेशक इतने दूर आकर भारत में अपना पैसा लगाएं। वरना उनके लिए भारत में निवेश के कारण घटते ही जाएंगे। मुझे लगता है 18 फीसदी का मतलब होगा अधिक निवेश और अधिक विदेशी निवेश का मतलब होगा भारतीयों के लिए अधिक जॉब।

हम भूतकाल से ( और शेष दुनिया से भी) अब भी कुछ नहीं सीखे हैं कि जितना कम टैक्स आप लगाएंगे उतना उसका बेहतर पालन होगा और उतना अधिक टैक्स इकट्ठा होगा। लेकिन, यहां कोई सरकार यह जोखिम लेने को तैयार नहीं है। यह दुखद है।

कुल-मिलाकर ओके बजट है, जिसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। कल्पनाहीन, पर्याप्त साहस का अभाव, लेकिन खराब तो बिल्कुल नहीं है। 10 के पैमाने पर मैं तो 4 अंक दूंगा। मेरा मानना है कि अरुण जेटली इससे बेहतर कर सकते थे। वे स्मार्ट हैं, जानते हैं कि दुनिया में क्या चल रहा है और भारतीय वित्त नीति पर अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। मुझे अचरज है कि हर बार वे खुद को वह करने से रोक क्यों लेते हैं, जो भारत की आर्थिक नियति बदल सकता है। यही बात मुझे चिंतित कर देती है।

भास्कर विशेष

प्रीतीश नंदी

वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म निर्माता

X
जेटली फिर आर्थिक नियति बदलने वाला साहस न दिखा सके
Astrology

Recommended

Click to listen..