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गुजरात याद रहा, इसलिए गांव-गरीब पर ध्यान

 ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर की राशि और कृषि ऋण लक्ष्य में इजाफा। सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी देने जा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 06:35 AM IST

 ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर की राशि और कृषि ऋण लक्ष्य

में इजाफा। सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी देने जा रही है। 1 करोड़ घर बनेंगे। गरीबों को 5 लाख सालाना तक का स्वास्थ्य बीमा।

मायने: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भी भाजपा की स्थिति गुजरात सी। इसलिए यहां के ग्रामीण वोटों पर नजर।

 उज्ज्वला योजना के तहत 3 करोड़ और गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देंगें। महिलाओं को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करने की भी बात। नौकरीपेशा महिलाओं का पीएफ भी सिर्फ 8% काटा जाएगा।

मायने : 2009 में 18% रहा बीजेपी का महिला वोट बैंक 2014 में 29% था। इसे बरकरार रखने का प्रयास।

 नए रोजगार पैदा करने के लिए खर्च 20 फीसदी बढ़ाया। सरकार ने 70 लाख नई नौकरियों का एेलान भी किया। इसके अलावा ईपीएफ में भी अपना योगदान बढ़ाया है।

मायने : गुजरात में इनकी नाराजगी झेली। 52% में से 38% कांग्रेस के साथ चले गए। इसलिए बड़े कदम।

गांवों में बुरी तरह पिटी थी भाजपा, युवाओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ी थी

किसान-आिदवासियों को साधने की कोशिश, कर्नाटक में मेट्रो के बहाने शहरी वोटर्स पर नजर

मध्यप्रदेश : नाराज किसान को मनाने की कोशिश

15 साल से बीजेपी सत्ता में। एंटी इन्कम्बेंसी। किसान नाराज। ऐसे में सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान, वह भी लागत से 1.5 गुना ज्यादा, यहां के किसानों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसलिए भी कि मंदसौर गोलीकांड, फसल के कम दाम, वादे पूरे न होने से किसानों में गुस्सा है। वहीं बजट के माध्यम से यहां आदिवासियों को साधने का प्रयास भी है। राज्य में 21% आदिवासी हैं।

राजस्थान : व्यापार-रोजगार का वादा

यहां हर बार सरकार बदलने का ट्रेंड। सातवें वेतनमान की वजह से निराशा। जाट और गुर्जर आरक्षण की मांग से असंतोष है। ऐसे में यहां जनाधार बरकरार रखने के लिए भाजपा किसानों के अलावा व्यापारी वर्ग और बेरोजगार युवा पर निगाहे रखे हुए है। टेक्सटाइल के लिए मंजूर 1 हजार करोड़ रुपए यहां फायदा पहुंचाएंगे। इसलिए कि राज्य में भीलवाड़ा सहित कुछ अन्य क्षेत्र टेक्सटाइल सेंटर हैं।

उत्तर-पूर्व के चार राज्यों में भी इस साल चुनाव होने हैं। एेसे में एकलव्य स्कूल तथा बांस पैदावार को लिए 1290 करोड़ के प्रवाधान से भाजपा यहां फायदा तलाशेगी। मेघालय में 86.2%, नागालैंड में 86.4%, त्रिपुरा में 31.1%, मिजोरम में 94.4% आदिवासी हैं।

4 राज्य ये भी

छत्तीसगढ़ : 32.5% आदिवासियों पर फोकस

तीन बार से बीजेपी की सरकार। पिछली बार बड़ी मुश्किल से जीते थे। ऐसे में आबादी में 32 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले आदिवासियों पर पार्टी का फोकस है। एकलव्य स्कूल इसी फोकस का नतीजा है। किसानों को दी गई राहत से यहां भी फायदा तलाशने की कोशिश होगी। क्योंकि राज्य में 2015-16 में करीब 252 किसानों ने कर्ज, गरीबी और बीमारी से तंग आकर आत्महत्या की।

कर्नाटक : मेट्रो से लुभाने की कवायद

यहां कांग्रेस की सरकार है। भाजपा के पास भ्रष्टाचार में घिरे येदियुरप्पा के अलावा विकल्प नहीं है। गुजरात चुनावों को देखते हुए भाजपा के लिए चुनौती और कड़ी नजर आ रही है। ऐसे में बेंगलुरू मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 17 हजार करोड़ की घोषणा की गई है। इससे केंद्र ने राज्य में रेलवे को और आधुनिक करने के साथ-साथ युवाओं में रोजगार बढ़ने की उम्मीद जगाई है। यहां 4.5 करोड़ मतदाता हैं।

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