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सस्ते घरों के लोन में डिफॉल्ट का बढ़ रहा जोखिम : रिपोर्ट

सरकार सस्ते घरों के निर्माण पर जोर दे रही है, लेकिन इस सेगमेंट में बैंकों का जोखिम बढ़ रहा है। इसकी वजह कर्ज की...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 06:10 AM IST
सरकार सस्ते घरों के निर्माण पर जोर दे रही है, लेकिन इस सेगमेंट में बैंकों का जोखिम बढ़ रहा है। इसकी वजह कर्ज की अदायगी में चूक (डिफॉल्ट) का रुझान अधिक होना है। घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिफ हाईमार्क की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2017 में होम लोन लेने वालों में से 1.96% ने 90 दिन तक किस्त अदा नहीं किया है। इस अवधि में किस्त (ईएमआई) न चुकाने को डिफॉल्ट माना जाता है। सस्ते मकानों की श्रेणी में आने वाले 25 लाख रुपए से कम कीमत वाले मकानों के मामले में ऐसे लोगों की संख्या 2.33% तक है। जबकि 10 लाख रुपए से कम कीमत वाले मकानों की श्रेणी में इनकी संख्या 4% तक है। यह पूरे उद्योग के औसत से दो गुना से भी अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में बांटे गए 15.78 लाख करोड़ रुपए के होम लोन में 7.79 लाख करोड़ रुपए के साथ करीब 50% हिस्सा अफोर्डेबल हाउसिंग का है। इस वित्त वर्ष में बैंकिंग सिस्टम में अब तक होम लोन का बकाया बढ़कर 13.6% तक पहुंच गया है। 10 लाख से कम कीमत वाले मकानों की श्रेणी के कर्ज में सबसे अधिक विदेशी बैंक प्रभावित हुए हैं। इनका फंसे कर्ज का आंकड़ा बढ़कर 16.20% तक पहुंच गया है। फंसे कर्ज की मात्रा अफोर्डेबल हाउसिंग में सबसे ज्यादा कोलकाता, चेन्नई और गाजियाबाद में है। कुल हाउसिंग लोन में सबसे ज्यादा डिफॉल्ट दिल्ली, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में हुए हैं। कुल 15.78 लाख करोड़ रुपए के होम लोन में महाराष्ट्र की सबसे ज्यादा 23% हिस्सेदारी है। 40 लाख रुपए के औसत होम लोन के साथ राज्यों में दिल्ली टॉप पर है।

ऐसे बढ़े होम लोन डिफॉल्ट के मामले

मार्च 2016 - 1.36%

जून 2017 - 1.89%

सितंबर 2017 - 1.96%

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का बढ़ रहा कारोबार

देश के होम लोन मार्केट में सरकारी बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की 40%-40% की हिस्सेदारी है। लेकिन फाइनेंस कंपनियों का कारोबार तेजी से बढ़ा है। पिछले तीन साल में नए होम लोन देने में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 10% घटी है। जबकि फाइनेंस कंपनियों की हिस्सेदारी 12% बढ़ी है।