नागौर

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क्योंकि...

इन 9 सवालों से आपके लिए बजट के मायने बजट कैसा है? - पूरी तरह चुनावी। चुनाव से पहले आने वाले पिछली तीन सरकारों...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:45 AM IST
इन 9 सवालों से आपके लिए बजट के मायने

बजट कैसा है?

- पूरी तरह चुनावी। चुनाव से पहले आने वाले पिछली तीन सरकारों के पूर्ण बजट किसी पॉपुलिस्ट दिशा में नहीं थे।

किन्तु टैक्स छूट न देने का कारण?

- मोदी सरकार मध्यम वर्ग से बचती है। शुरुआती बजट में ही अरुण जेटली ने स्पष्ट कहा था : ‘मध्यम वर्ग अपना ध्यान खुद रखे।’

मिडिल क्लास तो उन्हें जिताती है?

- इसी धारणा को वो तोड़ना चाहते हैं।

और उनकी नाराज़गी?

- कुछ नहीं होगा। मध्यम वर्ग बजट वाले दिन टैक्स छूट न मिलने पर बुरी तरह नाराज़ होता है। किन्तु अंतत: वह ‘गुड गवर्नेंस’ पर ही वोट देता है।

महंगाई का क्या?

- बढ़ेगी।

और आमदनी?

- मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर की नहीं बढ़ेगी। जबकि खर्च बढ़ेगा।

बजट की सबसे बड़ी बात?

- ग़रीबों के लिए 5 लाख का बीमा। वास्तव में यह देश के इतिहास की पहली योजना है जिसमें 50 करोड़ लोग, नाम के साथ फायदा ले सकेंगे। बग़ैर कोई काम किए। मनरेगा में करोड़ों युवाओं को लाभ है। किन्तु ये काम है।

क्या यह चुनावी है?

- यह ग़ज़ब की क्रांतिकारी पहल है। वैसे यह सरकारी अस्पतालों में चल रही घोर लापरवाही से ही उभरी लगती है। कि सरकार इलाज करे, इसकी बजाय इलाज के पैसे दे दे।

कारोबार के लिए कुछ अलग?

- 250 करोड़ टर्न ओवर तक टैक्स कम कर दिया। सभी सक्रिय, तेज़ और पैसा कमाने वाले कारोबार इसी श्रेणी में हैं। तो फ़ायदा बढ़ेगा।

कुलजमा यह बजट ‘मोदीकेयर’ के लिए यादगार रहेगा। क्योंकि इतना बड़ा बीमा तो बड़ी-बड़ी निजी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी नहीं देतीं।



1.87 लाख पाठकों ने राय दी, 5 ने दिए सभी सवालों के सही जवाब

बजट बताओ चैलेंज में 1.87 लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। सभी छह सवालों के सही जवाब देने वाले 5 पाठकों को पहला पुरस्कार। 5 सही जवाब देने वाले पहले 20 पाठकों को दूसरा पुरस्कार। विस्तार से dainikbhaskar.com पर देखें।

पहले पुरस्कार के पांच विजेता

1. मोनू सैनी, जयपुर, 2. भव्य मनीषभाई सोनेसरा, भावनगर, 3. बंकिम प्रद्युमनभाई वैष्णव, राजकोट, 4. सुमित सिंघल, ग्वालियर, 5. मनीष शर्मा, जयपुर

(सभी जवाब बजट भास्कर के पेजों पर)

अंदर के पन्नों पर पढ़ें

बजट कथा के बहाने इस बजट का आम नागरिकों पर क्या रहेगा असर।

इ तिहास में पहली बार आम बजट में देश में निर्मित कोई सामान सस्ता-महंगा नहीं हुआ। क्योंकि अब यह अधिकार सरकार के पास है ही नहीं। 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू हुआ। और तब से जीएसटी काउंसिल ही कीमतें तय करवाती है। इसे संसद की मंजूरी की जरूरत भी नहीं है। और इस व्यवस्था में बदलाव के लिए संविधान संशोधन करना होगा। हालांकि पेट्रो उत्पाद, शराब, बिजली व रियल एस्टेट जीएसटी से बाहर हैं। सरकार के पास बजट के लिए सिर्फ कस्टम ड्यूटी बची है। जो सिर्फ विदेशी सामान पर लगती है। जैसे कि इस बजट में टीवी और मोबाइल पर लगाई है। किसी समय में बजट की सुर्खियां बनने वालीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें काफी समय से अब तेल कंपनियों के जिम्मे हैं। पिछले साल से तो इनकी कीमतें रोज बदल रही हैं। हालांकि सरकार ने पेट्रो उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी लगाते हुए पिछले साल 2.42 लाख करोड़ रुपए हमसे कमा लिए। ...फिर भी जिस तरह प्रमुख तेल कंपनियों पर सरकार का ही नियंत्रण है, ठीक वैसे ही जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली ही हैं।

दैनिक भास्कर प्रस्तुति

मोदी सरकार ने चुनाव पूर्व आखिरी पूर्ण बजट को सीधे दो हिस्सों में बांट दिया

गुरुवार को पेश बजट वास्तव में सीधे-सीधे दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखा। पहला हिस्सा गांव-गरीब और किसान को खुश करने पर समर्पित रहा। क्योंकि गुजरात चुनाव में इन्हीं वर्गों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। जबकि दूसरा हिस्सा मिडिल क्लास का था जिसे कोई फायदा नहीं दिया।

गरीब किसान भाइयो

जीते रहो

दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थकेयर प्रोग्राम घोषित




8 करोड़ महिलाओं को गैस कनेक्शन



असर : आयुष्मान भारत योजना से देश की करीब 40% आबादी को फायदा होगा। वहीं अमेरिका के सबसे चर्चित ओबामाकेयर से 16% आबादी यानी सिर्फ 64 लाख लोगों को ही मेडिकल सुविधाओं का फायदा मिल पाता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर को 5.97 लाख करोड़

इंफ्रास्ट्रक्चर
को अब तक का सबसे ज्यादा पैसा दिया गया है। कुल 5.97 लाख करोड़ रु. इसके लिए रखे गए हैं। पिछली बार 4.94 लाख करोड़ रु. दिए गए थे।

गांवों को 14.34 लाख करोड़

बजट में गांवों को 14.34 लाख करोड़ रुपए दिए गए हैं। इनसे न सिर्फ रोजगार दिया जाएगा, बल्कि 3.17 लाख किमी सड़कें बनवाई जाएंगी। 51 लाख नए घर, 1.88 करोड़ टॉयलेट्स बनवाए जाएंगे।

99 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाएंगे, विकास पर 2.04 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे।

1.38 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक संरक्षण के लिए।

500 शहरों में 19,428 करोड़ रुपए की लागत से पानी की स्थिति सुधारी जाएगी।

असर : इन सैक्टर्स पर खर्च होने वाली रकम का ज्यादातर हिस्सा गांवों में ही खर्च किया जाएगा। इसके जरिये भी मोदी ग्रामीण इलाके के मतदाताओं को आकर्षित करना चाहते हैं। यही पूरे बजट का फोकस रहा।

कुल पृष्ठ 24 (यंग भास्कर, एेच्छिक Rs. 10.00) मूल्य Rs. 4.50 | वर्ष 10, अंक 269

4 करोड़ घरों को बिजली

आलू के लिए ऑपरेशन ग्रीन




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...और मिडिल क्लास

जीवित रहो

टैक्स छूट नहीं, 34200 लेकर 40 हजार दिए




टैक्स स्लैब वही का वही

टैक्स स्लैब वही का वही

कमाई मौजूदा दर टैक्स बिना सेस

0-2.5 लाख 0% 00 --

2.5-3.5 लाख 5% 2500 100

3.5-5 लाख 5% 12,500 500

5-10 लाख 20% 112500 4500

10-20 लाख 30% 412500 16500

कमाई मौजूदा दर टैक्स बिना सेस

0-2.5 लाख 0% 00 --

2.5-3.5 लाख 5% 2500 100

3.5-5 लाख 5% 12,500 500

5-10 लाख 20% 112500 4500

10-20 लाख 30% 412500 16500

बिना खर्च किए मिलेगा स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ- ट्रांसपोर्ट (19200 सालाना) व मेडिकल अलाउंस (15000 हजार सालाना) की छूट थी पहले, अब दोनों खत्म। स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा 40 हजार खर्च किए बिना भी मिलेगा।

असर : मिडिल क्लास की बजट में पूरी तरह अनदेखी की गई। टैक्स छूट सीमा बढ़ाने की बात पर ध्यान नहीं दिया गया। साथ ही जेटली ने होम लोन का जिक्र तक नहीं किया, जिससे मिडिल क्लास को ही सीधा फायदा होता।

250 करोड़ रु. तक सालाना टर्नअोवर वाली कंपनियों को भी कॉर्पोरेट टैक्स में 5 फीसदी की छूट। यानी 25% होगी काॅर्पोरेट टैक्स की दर। अभी तक पचास करोड़ सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को ही इससे छूट मिल रही थी।

शेयर मार्केट में 1 लाख से अधिक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स पर 10 फीसदी टैक्स। सरकार यह टैक्स 14 साल बाद दोबारा लेकर आई है।


असर : कॉर्पोरेट टैक्स में इस कटौती के बाद सिर्फ 7000 कंपनियां ही ऐसी रहेंगी जो 30 फीसदी के टैक्स स्लैब में बची रहेंगी।

4 फीसदी सेस

4 फीसदी सेस

पेट्रोल पर जितनी ड्यूटी घटाई, उतना ही सेस बढ़ा दिया



 महंगा: खाद्य तेल, बाइक, मोबाइल, सनग्लासेज, फ्रूट जूस, परफ्यूम-डियो, शेविंग किट, सिल्क, जूते, जेम स्टोन, डायमंड, स्मार्ट वॉच/वियरेबल डिवाइस, एलसीडी/एलईडी पैनल्स, फर्नीचर, मैट्रेसेज, लैंप, खिलौने, सिगरेट, लाइटर, कैंडल।

 सस्ता: काजू, सोलर टैंपर्ड ग्लास, इम्प्लांट्स में काम आने वाली चुनिंदा एसेसरी

2.95 लाख करोड़ (7.81% बढ़ोतरी)

यह जीडीपी का 1.5 फीसदी। यह 1962 के बाद अब तक का सबसे कम प्रतिशत है।

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