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निवेश की 8 बड़ी घोषणाएं...

रियल इस्टेट सेक्टर को सबसे बड़ी राहत सरकार ने गाइडलाइन से 5% अंतर मान्य किया है। इससे जमीनों के सौदों में तेजी आ...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:45 AM IST
रियल इस्टेट सेक्टर को सबसे बड़ी राहत सरकार ने गाइडलाइन से 5% अंतर मान्य किया है। इससे जमीनों के सौदों में तेजी आ सकती है। इन प्रावधानों से रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा।

असल व गाइडलाइन में 5% अंतर मान्य

प्रावधान: सबसे बड़ी राहत 5% गाइडलाइन रेट पर दी है। अभी तक गाइडलाइन मूल्य और असल सेल प्राइज में कुल 50 हजार का अंतर मान्य था। 5% अंतर करने से महंगी प्रॉपर्टी के खरीदार-बेचवाल को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार ने एक बार फिर 2022 तक हर गरीब को घर देने का वादा दोहराया है।

कॉर्पाेरेट बॉन्ड अब इनवेस्टमेंट श्रेणी में

प्रावधान: ट्रिपल बी रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स अब इनवेस्टमेंट ग्रेड में कहलाएंगे। पहले डबल ए+ केटेगरी के बॉन्ड ही एलिजिबल इवेस्टमेंट कहलाते थे। अब कॉर्पोरेट्स ज्यादा पैसा उगा पाएंगे। हालांकि अब जमीन-मकान पर हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन की ही छूट सेक्शन 54ईसी के बॉन्ड पर मिल पाएगी जबकि पहले सभी कैपिटल गैन पर मिलती थी।


असर: 5% की रियायत के चलते जमीनों के सौदों में तेजी आ सकती है। इन प्रावधानों से रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में घर बनाने के लक्ष्य के कारण आने वाले समय में नये प्रोजेक्ट तेजी से आएंगे।

असर: बान्ड मार्केट में निवेश तेजी से बढ़ेगा। चूंकि बॉन्ड एक तय निश्चित अनुपात में रिटर्न देते हैं इसलिए सरकार ने निवेशकों के जोखिम को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। सरकार के इस कदम से बॉन्ड मार्केट और आकर्षक होगा।


गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम सरल होगी

प्रावधान: किसान और निम्न मध्यमआयवर्ग को ध्यान में रखते हुए गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम को सरकार ने और सरल बनाने की घाेषणा की है। सरकार ने इस योजना में कम निवेश को देखते हुए इसके नियमों को सरल करने की बात कही है। जिससे सोना और गोल्ड बांड में निवेश करना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा।

सिर्फ बुजुर्गों को ही दिया फायदा

प्रावधान: सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंको और डाकघरों में जमा राशि पर ब्याज आय में धारा 80टीटीबी के तहत 50 हजार रुपए की छूट दी है। ऐसी आय पर टीडीएस भी अब नहीं काटा जाएगा। इस कर की छूट फिक्स डिर्पोजिट और आवर्ती जमा (आरडी) योजनाओं के ब्याज पर भी लागू होगी।

असर: सरकार के इस प्रावधान के कारण सोना और गोल्डबॉन्ड जैसे प्रोडक्ट में आम लोगों को निवेश का मौका मिलेगा। या दूसरे शब्दों में कहें तो नये निवेशक गोल्ड से जुड़ेंगे। इसके कारण फिजिकल गोल्ड की डिमांड घट सकती है।

असर: बुजुर्गों की आय का मुख्य स्रोत ब्याज ही होता है, इसलिए उन्हें पहले से अधिक फायदा होगा। हालांकि इस छूट की उम्मीद सभी को थी। हालांकि सरकार के इस कदम से बुजुर्गों के लिए एफडी में निवेश आकर्षक बना रहेगा।


म्युचुअल फंड पर दोहरी मार

प्रावधान: सरकार ने म्युचुअल फंड की वितरित आय (डिस्ट्रीबयूटेड इनकम) पर 10 प्रतिशत की दर से कर लगाने की घोषणा की है। यह टैक्स पहली बार म्युचुअल फंड पर लगा है। इसके साथ ही इक्विटी बेस्ड म्युचुअल फंड पर भी सरकार ने लॉग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 फीसदी लगाया है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स आया

प्रावधान: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को दोबारा सरकार ने लगाया है। एक वर्ष से अधिक की अवधि और एक लाख रुपए से अधिक आय पर 10% की दर से यह कर लगेगा। जिसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा। हलांकि 31 जनवरी 2018 तक हुए सभी लाभ इसमें शामिल नहीं होंगे। वहीं शॉर्ट टर्म 15% कर जारी रहेगा।


असर:10% टैक्स के कारण म्युचुअल फंड में निवेश करने वालों को अब कम रिटर्न मिल पाएगा। निवेश पर छोटी अवधि में नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। इस क्षेत्र में रिटर्न बेहतर आने के कारण यह निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहेगा।

असर: आम निवेशकों को अब लॉन्गटर्म में कम रिटर्न मिल पाएगा। जिससे लॉगटर्म में निवेश प्रभावित होगा। सरकार ने सूचीकरण को शामिल नहीं किया है इससे जो लागत है उसी की छूट मिलेगी महंगाई दर से उसे बढ़ा हुआ नहीं माना जाएगा।

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