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हरियाली के साथ आर्थिक संबल; कभी सूखे रहे कांखी-कुंडल की धरा पर अनार की बंपर पैदावार

Nagour News - सिवाना. क्षेत्र के खेत में बोए गए अनार के पौधे। सिवाना | एक समय में सिवाना क्षेत्र का कांखी व कुंडल गांव...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:40 AM IST
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सिवाना. क्षेत्र के खेत में बोए गए अनार के पौधे।

सिवाना | एक समय में सिवाना क्षेत्र का कांखी व कुंडल गांव सूखाग्रस्त होने से यहां कोई आना भी पसंद नहीं करता था। लोग जब यहां आने की सोचते, तो जल के अभाव में पानी की बोतल साथ ले आते हैं, लेकिन आज इसी धरा पर अनार की बंपर पैदावार होने से इन गांवों की काया ही पलट गई। क्षेत्र के किसानों ने नवाचार अपनाते हुए आज उन्हीं धोरों में बड़ी मात्रा में अनार की खेती शुरू कर दी है। परिस्थितियां बदले के साथ उन्नत तकनीकी से खेती से किसानों की तकदीर बदल दी। कहते कि कुछ कर गुजरने की ललक और मेहनत साथ हो तो असंभव भी कुछ नहीं होता।

सालाना 8- 9 लाख की आमदनी : किसान बाबूलाल बिश्नोई ने बताया कि वह अपने खेत में 2 हैक्टेयर में 1350 पौधे पर 20 माह से अनार की खेती कर रहे हैं। उनको सालाना 8 से 9 लाख के बीच आमदनी हो रही है। कांखी-कुंडल में पहले पानी की बहुत किल्लत थी, लेकिन खेती में नवाचार अपनाने के साथ अनार की फसल करने से यहां काफी कुछ बदल गया है। अब पर्याप्त मात्रा में पानी की भी व्यवस्था हो रही है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अनार की खेती करने पर काफी मुसीबत सामने आई। पानी की कमी व संसाधनों का अभाव रहा, लेकिन धीरे-धीरे उन्नति होने पर यहां अनार की बंपर पैदावार है।



एक हैक्टेयर में 3.5 लाख की आय : जिले में करीब 1000 हैक्टेयर में अनार की खेती हो रही है। एक हैक्टेयर में अनार के अनुमान 625 पौधे लगाए जाते हैं। पौधा पूर्ण रूप से तैयार होने पर उसकी ऊंचाई 7-8 फीट तक होती है। जिले में सिंदुरी किस्म के अनार की खेती होती हैं। इसमें एक हैक्टेयर में सालाना 3 से 4 लाख आमदनी होने का अनुमान है। पादरू, काठाड़ी, कुंडल, कांखी, धारणा, मिठौड़ा, सिणेर सिवाना, सहित जिले के कई हिस्सों पर अनार की खेती हो रही है। सिणधरी क्षेत्र के जागसा गांव में सबसे ज्यादा पैदावार है।

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