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शहर में सप्लाई होने वाले पानी में मल के बैक्टीरिया, एसई ने कहा लीकेज ठीक कराओ, वरना लोग बीमार पड़ जाएंगे

शहर में दूषित पानी की सप्लाई में जलदाय विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जो दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है...

Dainik Bhaskar

May 15, 2018, 05:20 AM IST
शहर में सप्लाई होने वाले पानी में मल के बैक्टीरिया, एसई ने कहा लीकेज ठीक कराओ, वरना लोग बीमार पड़ जाएंगे
शहर में दूषित पानी की सप्लाई में जलदाय विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जो दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है उसमें मल व नालियों में बहने वाले दूषित पानी के बैक्टीरिया हैं। जलदाय विभाग के एसई ने इस मामले में नगर परिषद आयुक्त व एक्सईएन पीएचईडी को नोटिस भेजे हैं। शहर के 10 इलाकों में दूषित पानी की रिपोर्ट साथ में दी है। उन्होंने कहा कि इन लीकेज को जल्दी ठीक कराएं वरना लोग बीमार पड़ जाएंगे। शहर में पिछले कई दिनों से लोग कलेक्ट्रेट आकर दूषित जल सप्लाई की जानकारी दे रहे थे। इस बीच पीएचईडी की प्रयोगशाला में जीवाणु व क्लोरीन जांच की गई। जांच में यह सामने आया है कि शहर में सप्लाई होने वाले पानी में ऐसे बैक्टीरिया भी शामिल हैं जो मल में होते हैं। यही नहीं इस पानी में नाइट्रेट व अन्य बैक्टीरिया होने की बात भी सामने आई है। सोमवार को इस संबंध में शहर के 10 मोहल्लों की रिपोर्ट तैयार कर नगर परिषद आयुक्त व अधिशासी अभियंता को भेजी गई।

भास्कर पड़ताल

नागौर. निवार गली में गंदे पानी की सप्लाई का विरोध जताती महिलाएं।

नागौर पीएचईडी की कनिष्ठ रसायनज्ञ प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि लीकेज सही नहीं होने की वजह से शहर में दूषित पानी सप्लाई हो रहा है। शहर में नहरी पानी 2009 से दिया जा रहा है मगर यहां बिछाई गई पाइप लाइनें 20 साल से ज्यादा पुरानी हैं। इस वजह से आए दिन यह लाइनें लीकेज हो रही हैं। इनमें नालियों का दूषित पानी लीकेज लाइनों के बहते पानी से मिल जाता है। उसी पानी के साथ मिक्स होकर बाद में यह गंदा पानी घरों में सप्लाई हो रहा है।

लाइनें 20 साल पुरानी, अमृत योजना का फायदा नहीं मिला, रूडिप भी जिम्मेदार

होना यह चाहिए| जल वितरण ढांचा हो, रूट मैप बने

शहर में अभी जल सप्लाई को लेकर पुराने कर्मचारियों पर ही भरोसा है। जो अभियंता यहां तबादला हो आते हैं उन्हें यह भी नहीं पता कि किसी वार्ड या मोहल्ले में कौनसी पाइप लाइन कनेक्ट है। ऐसे में पुरानी पाइप लाइनों की कनेक्टिवटी को लेकर शहर का कोई रूट मैप तैयार नहीं है। पुरानी बूस्टर प्रणाली भी इसकी बड़ी वजह है। नगर परिषद के पास भी शहरी जल वितरण व्यवस्था का कोई मैप मौजूद नहीं है।

अब तक | 10 मोहल्ले, 13 नमूने जांचे, सब फेल

प्रयोगशाला में 13 नमूनों की जांच की गई है। इनमें सभी नमूनों में दूषित पानी आपूर्ति होने की पुष्टि हुई है। इसमें बाजरवाड़ा, गांधी चौक, जोशीवाड़ा, किले की ढाल, ब्रह्मपुरी, दड़ा मोहल्ला, कुम्हारी दरवाजा, दिल्ली दरवाजा, काजियों का चौक समेत 10 मोहल्लों की रिपोर्ट शामिल है।

नागौर. सिगियो की पोल के पास पाइप लाइन सही करते कर्मचारी।

आगे क्या

कलेक्टर को भेजी रिपोर्ट

इस मामले में कलेक्टर को भी रिपोर्ट भेज शहर में जहां लीकेज हैं वहां तत्काल मरम्मत की आवश्यकता जताई है। कलेक्टर कुमारपाल गौतम ने कहा कि शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी। लोगों को स्वच्छ और मीठा पानी दिलाने के लिए सख्त एक्शन लिया जाएगा। अधिकारियों को भी गंभीरता से जिम्मेदारी निभानी होगी।

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