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65 हजार फ्लोर डेस्क सप्लाई करने वाली थी कंपनी, नीलकमल से सैंपल लेकर अफसरों ने मैसर्स टेक्नोक्राफ्ट का बताकर मंत्री से अनुमोदन कराया

मुंबई की मैसर्स टेक्नोक्राफ्ट फर्म ने दलालों के मार्फत अफसरों से मिलीभगत कर सवा लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी...

Dainik Bhaskar

May 13, 2018, 05:35 AM IST
मुंबई की मैसर्स टेक्नोक्राफ्ट फर्म ने दलालों के मार्फत अफसरों से मिलीभगत कर सवा लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 65 हजार फ्लोर डेस्क की आनन-फानन में सप्लाई करने की तैयारी कर ली थी। इसके लिए कंपनी ने जयपुर, जोधपुर, बालोतरा, दौसा और नागौर के गोदाम में तैयार फ्लोर डेस्क को सप्लाई करने के लिए रखवा दिया था। तब अचानक एसीबी ने एक शिकायत पर पत्राचार शुरू किया तो आनन-फानन में समेकित बाल विकास सेवाएं विभाग के अफसराे को आनन-फानन में टेंडर निरस्त करना पड़ा। फर्म ने टेंडर के लिए तीन अफसरों को करीब 40 लाख रुपए की रिश्वत दे दी थी। यह खुलासा एसीबी की गिरफ्त में आए दलाल सीके जोशी और कमलजीत राणावत ने पूछताछ में किया है। एसीबी की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि टेक्नोक्राफ्ट कंपनी को टेंडर दिलाने के लिए अफसरों ने पूरे नियम कायदे ताक में रख दिए। आरोपी आईसीडीएस के सहायक निदेशक सोमेश्वर देवड़ा ने कंपनी को टेंडर दिलाने के लिए नीलकमल कंपनी से फ्लोर डेस्क सैंपल लेने के बाद मंत्री को मैसर्स टेक्नोक्राफ्ट के बताकर टेंडर के लिए अनुमोदन करा लिया। खास बात यह है कि टेक्नोक्राफ्ट कंपनी को माेनिका फर्म से प्लास्टिक के ब्लॉक और मुंबई की एक अन्य फर्म से स्टील खरीदने के बाद फ्लोर डेस्क बनाकर सप्लाई करनी थी। लेकिन फर्म ने नीलकमल से फ्लोर डेस्क सप्लाई करने के लिए ले लिए थे। एसीबी इन बिंदुओं पर जांच कर रही है।

वीम प्लास्ट कंपनी की दर ‌Rs.762 और टेक्नोक्राफ्ट की Rs.1206, बावजूद टेंडर महंगे में जारी किया

दरअसल सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी करके स्टील फर्नीचर के टेंडर राजस्थान की सूक्ष्म व लघु इकाइयों को ही देने का प्रावधान बनाया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने मुंबई की कंपनी मैसर्स टेक्नोक्राफ्ट को जारी कर दिया। खास बात यह है कि मुंबई की वीम प्लास्ट लिमिटेड ने भी इसमें हिस्सा ले लिया था। लेकिन टेंडर टेक्नोक्राफ्ट एसोसिएटस को दिया। वीम प्लास्ट लिमिटेड कंपनी की दर प्रति डेस्क 762 रुपए और टेक्नोक्राफ्ट एसोसिएटस दर 1206 रुपए थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने 12 अक्टूबर को वीम प्लास्ट लिमिटेड को बिना कोई वजह टेंडर प्रक्रिया से निकालकर महंगी दरो में टेक्नोक्राफ्ट एसोसिएटस को दे दिया। जबकि उद्योग विभाग के संयुक्त निदेशक पीआर शर्मा ने ही वीम प्लास्ट लिमिटेड कंपनी को एक बहुत बड़ी कंपनी माना था। पीआर शर्मा कमेटी में शामिल थे।

बिजली निगम के भी टेंडर तय करता था दलाल जोशी : आरोपी दलाल सीके जोशी और बिजली निगम के अफसरों के बीच भी गठजोड़ था। सीके जोशी बिजली निगम के दफ्तरों में बैठकर कौनसा सामान खरीदना है और किस फर्म को टेंडर देना निर्धारित करता था। आरोपी के घर पर बिजली निगम के अलग-अलग डिस्कॉम के एमडी फाइलें लेकर आते है। एक डिस्कॉम एमडी की तो एसीबी के पास सर्विलांस के दौरान बातचीत का रिकॉर्ड मौजूद है। सीके जोशी के एक तत्कालीन मुख्य सचिव से भी निकटता थी। उसके पीए के मार्फत जोशी ने महंगी शराब अफसर तक पहुंचाई थी। एसीबी ने टैंडर जारी करने के दौरान आईसीडीएस में रिश्वत के आरोप में दलाल कमलजीत राणावत व सीके जोशी को गिरफ्तार किया था।

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