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3 साल से 176 गांवों को नहरी पानी का इंतजार कोर्ट तक पहुंचा मामला, अब 24 माह और लगेंगे

भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी नागौर लिफ्ट केनाल परियोजना के प्रथम चरण में मेड़ता व डेगाना क्षेत्र के 176 गांवों के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 05:35 AM IST

भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी

नागौर लिफ्ट केनाल परियोजना के प्रथम चरण में मेड़ता व डेगाना क्षेत्र के 176 गांवों के लिए स्वीकृत कार्यों की री-टेंडरिंग प्रक्रिया को गलत बताकर हाईकोर्ट में रिट दायर करने वाले ठेकेदार को न्यायालय ने दोषी मानते हुए उससे एक लाख रुपए का जुर्माना वसूलने के आदेश दिए हैं।

साथ ही न्यायालय ने मेड़ता-डेगाना क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचाने के लिए नवंबर 2016 में दुबारा खोले गए टेंडरों को सही बताते हुए शीघ्र काम शुरू करने के आदेश दिए हैं। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर की डबल बैंच ने विगत 27 अप्रैल को ये आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों की पालना में 11 मई को नहर विभाग ने मैसर्स रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड हैदराबाद तथा मैसर्स पप्पूराम डारा एण्ड कंपनी जोधपुर को ज्वाइंट वेंचर में ये ठेका देकर वर्क ऑर्डर जारी किए हैं।

विगत 27 अप्रैल को जयपुर हाईकोर्ट की डबल बैंच ने नवंबर 2016 में नहरी परियोजना की री-टेंडरिंग पर मुहर लगा दी है। अब मेड़ता व डेगाना के 176 गांवों में मैसर्स रामकी इन्फा्रस्ट्रक्चर हैदराबाद व मैसर्स डारा कंपनी ज्वाइंट वेंचर के रूप में अधूरे काम 24 माह में पूरा करंेगी। मनोहर सोनगरा, एक्सईएन, नहरी परियोजना, मेड़ता

176 करोड़ में से 67 करोड़ रुपए के हुए कार्य, फिर पहुंचा मामला कोर्ट में

176 गांवों में 176 करोड़ की लागत से नहरी पानी पहुंचाने की इस नहरी परियोजना को वर्ष 2012 में मंजूर मिली थी। तब केएसएस पेट्रोन इंडिया नामक ठेकेदारी फर्म ने काम शुरू किया था। लेकिन धीमी गति से कार्य किए जाने से नाराज होकर जब सरकार ने ठेकेदारी फर्म पर पैनल्टी लगाई तो नाराज फर्म ने परियोजना काे अधूरा छोड़ काम रोक दिया। ऐसे में 67 करोड़ रुपए के काम ही हुए। सरकार ने नए सिरे से नवंबर 2016 में निविदाएं आमंत्रित की। एकबारगी तो कोई भी फर्म नहीं आई मगर दूसरी बार ऑनलाइन निविदाएं मांगने पर मुंबई की फर्म मैसर्स ऑफसोर इंडिया तथा हैदराबाद की मैसर्स रामकी एण्ड कंपनी व डारा एण्ड कंपनी जोधपुर की दरें समान पाई गईं। सरकार व परियोजना के अभियंता निविदाओं पर कोई निर्णय करते इससे पहले ही मामला विवादित हो गया। दो फर्मों ने निविदाओं में गड़बड़झाले के आरोप लगा दिए और परियोजना के अभियंताओं पर मनमर्जी से ठेका देने के आरोप लगाने शुरू कर दिए। सरकार अपना पक्ष रखती इससे पहले ही जोधपुर की फर्म मैसर्स विष्णु प्रसाद पुंगलिया ने टेंडर प्रक्रिया को गलत बताते हुए जोधपुर हाईकोर्ट में निविदा के खिलाफ रिट लगा दी। इधर, हैदराबाद की मैसर्स रामकी एंड कंपनी आदि ने जयपुर हाईकोर्ट में रिट लगा दी थी।

2012 में टेंडर, 2015 में करना था पूरायह मामला पहले तो जोधपुर व जयपुर हाईकोर्ट के बीच अटका रहा। बाद में मामला जयपुर हाईकोर्ट की डबल बैंच में सुनवाई के लिए रखा गया। यहां नहरी परियोजनाओं के अभियंताओं ने सरकार का पक्ष रखा। अभियंताओं ने बताया कि मेड़ता व डेगाना विधानसभा के 176 गांवों में नहरी परियोजना के प्रथम चरण में ही पानी पहुंचाना था। वर्ष 2012 में खोला गया पेट्रोन इंडिया का टेंडर 2015 तक पूर्ण होना था मगर इस बीच पेट्रोन इंडिया काम बीच में छोड़कर चली गई। जिसके बाद री-टेंडरिंग का कार्य किया गया। अब जल्द से जल्द वंचित गांवों में नहरी पानी पहुंचाना है। रिट लगाने वाली दोनों फर्मो के बीच व्यवसायिक प्रतिस्पर्द्धा है, इसलिए ये लोग टेंडर को गलत ठहरा रहे हैं। जबकि नियमानुसार री-टेंडरिंग सही दरों पर की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद टेंडर को सही करार दिया तथा सरकारी फैसले पर मुहर लगा दी। न्यायालय ने कहा इस री-टेंडरिंग के खिलाफ रिट लगाकर मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया ने सरकार व अदालत का वक्त जाया किया और इससे नहरी परियोजना लेट हुई। इसलिए फर्म मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया से 1 लाख रुपए का जुर्माना वसूलने के आदेश दिए।

मेड़ता क्षेत्र में ये निर्माण अधूरे

मेड़ता सिटी, इंदावड़, डोडियाना, थांवला, भंवाल, पादूकलां और रियांबड़ी मिलाकर 7 पंप हाउस बनने थे। थांवला व रियांबड़ी में तो पंप हाउस निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया। शेष 5 गांवों में पंप हाउस निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।

मेड़ता क्षेत्र के 56 गांवों में पानी की टंकियां बनानी थी। इन 50 गांवों में से 40 गांवों में टंकियों का निर्माण अटका पड़ा है। 16 गांवों में निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया। यानि 56 गांवों की सभी टंकियाें का कार्य चार साल बाद भी अधूरा पड़ा है।

6 गांवों में भूतल स्वच्छ जलाशय बनने प्रस्तावित थे। इनमें से पादूकलां में आज तक काम ही शुरू नहीं हो पाया। इंदावड़ व भंवाल में 5% निर्माण हुआ और बंद हो गया। डोडियाना, रियांबड़ी, थांवला में भी काम अधूरा है।

7 गांवों में निर्माणाधीन पंपिंग हाउस पर 132 केवी जीएसएस से 33 केवी की बिजली आपूर्ति की लाइन खींचनी थी। आज तक कार्य अधूरा है। नहरी पानी को प्रेशर के साथ टंकियों में चढ़ाने पंप हाउस पर 33 केवी जीएसएस बनने का काम नहीं हुआ।

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