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हाईकोर्ट के फैसले को ठेकेदार ने अब दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सरकार ने भी लगा दी केविएट

भास्कर संवाददाता |मेड़ता सिटी नागौर लिफ्ट केनाल परियोजना के प्रथम चरण में मेड़ता व डेगाना क्षेत्र के 176 गांवों के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 16, 2018, 05:35 AM IST

हाईकोर्ट के फैसले को ठेकेदार ने अब दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, सरकार ने भी लगा दी केविएट
भास्कर संवाददाता |मेड़ता सिटी

नागौर लिफ्ट केनाल परियोजना के प्रथम चरण में मेड़ता व डेगाना क्षेत्र के 176 गांवों के लिए स्वीकृत कार्यों की री-टेंडरिंग प्रक्रिया को गलत व अनुचित बताकर हाईकोर्ट में रिट दायर करने वाले ठेकेदार ने अब जयपुर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मगर इस बार सुखद स्थिति ये है कि राज्य सरकार ने जयपुर हाईकोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद किसी भी तरह की परेशानियों से बचने के लिए पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में केविएट लगा दी। नतीजतन, इस बार किसी भी तरह रिट लगने पर स्टे मिलने के आसार कम है।

कारण साफ कि केविएट राजस्थान सरकार के विधि सचिव की ओर से दायर की गई है जिसमें अवगत कराया है कि नागौर जिले के मेड़ता व डेगाना विधानसभा क्षेत्र के 176 गांवों को पानी पिलाने की योजना लिफ्ट कैनाल के प्रथम चरण से लंबित है। इसलिए यदि जयपुर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देती हुई कोई भी रिट अब सुप्रीम कोर्ट में लगती है तो उस पर एकतरफा फैसला न किया जाए। बल्कि सरकारी पक्ष को भी सुना जाए। इस प्रकरण में अब बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इसके लिए नहरी परियोजना के मेड़ता एक्सईएन मनोहर सोनगरा भी सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे।

क्या है मामला

मेड़ता व डेगाना विधानसभा क्षेत्र के 176 गांवों में नहरी पानी पहुंचाने की के लिए प्रथम चरण में वर्ष 2012 में मंजूरी दी गई थी। तब केएसएस पेट्रोन इंडिया नामक ठेकेदारी फर्म ने काम शुरू किया। सुस्त कार्यशैली से नाराज होकर जब सरकार ने ठेकेदारी फर्म पर पर पेनल्टी लगाई तो नाराज फर्म ने परियोजना को अधूरी छोड़ काम रोक दिया। ऐसे में फर्म 176 करोड़ में से मात्र 67 करोड़ रुपए के काम ही हुए। यानी 40 प्रतिशत काम हुआ और 60 प्रतिशत नहरी परियोजना का काम अधूरा रह गया। तदोपरांत सरकार ने नए सिरे से नवंबर 2016 में निविदाएं आमंत्रित की। निविदाएं मिलने के बाद सरकार व परियोजना के अभियंता निविदाओं पर कोई निर्णय लेते इससे पहले ही मामला विवादों में आ गया। जोधपुर की फर्म मैसर्स विष्णु प्रसाद पुंगलिया की ओर से जोधपुर हाईकोर्ट में निविदा के खिलाफ रिट लगा दी गई, उन्होंने मनमर्जी का आरोप लगाते हुए टेंडर प्रक्रिया को गलत बताया तथा पूरा प्रोसेस अनुचित बता दिया। बाद में दोनों पक्षों को सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर ने अतिरिक्त मुख्य सचिव नहर विभाग की ओर से खोले गए टेंडर को सही करार दिया तथा सरकारी फैसले पर मुहर लगा दी। साथ ही न्यायालय ने कहा इस री-टेंडरिंग के खिलाफ रिट लगाकर मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया ने सरकार व अदालत का वक्त जाया किया और इससे नहरी परियोजना लेटलतीफी का शिकार हो गई। इसलिए न्यायालय ने रिट दायर करने वाली फर्म मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया से एक लाख रुपए का जुर्माना वसूलने के भी आदेश दिए। पुंगलिया इसी फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में गए हैं।

क्षेत्रवासियों को लंबे समय से है इंतजार

मेड़ता व डेगाना विधानसभा क्षेत्र से जुड़े इन 176 गांवों के ग्रामीणों को लंबे समय से नागौरी नहरी प्रोजेक्ट के पूरा होने और गांवों तक नहरी पानी पहुंचने का काफी लंबे समय से इंतजार है। लेकिन अलग-अलग कारणों से परियोजना में हाे रही देरी के कारण ग्रामीणों का इंतजार और बढ़ने लगा है। क्षेत्र के ग्रामीण अब आगामी कुछ समय में सब कुछ ठीक होने के बाद जल्द ही उन तक मीठे पानी की सौगात पहुंचने की उम्मीद में है।

14 मई

नवंबर 2016 में मांगी गई थी निविदाएं

हमने लगा दी थी केविएट, इसलिए सुप्रीम कोर्ट से स्टे नहीं मिलेगा

देखिए, 27 अप्रैल को जयपुर हाईकोर्ट की डबल बैंच ने नवंबर 2016 में नहरी परियोजना की री-टेंडरिंग को सही बताया था। निविदा में भाग लेने वाली एक फर्म मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया ने हमारे प्रोसेस को गलत बताकर रिट दायर की थी। हाईकोर्ट ने पुंगलिया की मांग को खारिज कर उन पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के खिलाफ मैसर्स विष्णु प्रकाश पुंगलिया ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की है। मगर घबराने की बात नहीं है। सरकार की ओर से लॉ सेक्रेट्री ने पहले से ही केविएट लगा रखी है। अब बुधवार को इसकी सुनवाई है। परिवादी को स्टे मिलने की संभावना कम है। मनोहर सोनगरा, एक्सईएन, नहरी परियोजना, मेड़ता

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