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मेड़ता मिनी डीसीटीसी लैब से 3 साल में Rs.12 हजार की बचत, अनुदेशक को नागौर से Rs.2.88 लाख वेतन के दिए

भास्कर संवाददाता | नागौर राज्य सरकार ने तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेशभर में 2006-07 से शुरू की डीसीटीसी...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 05:50 AM IST
भास्कर संवाददाता | नागौर

राज्य सरकार ने तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेशभर में 2006-07 से शुरू की डीसीटीसी लैब (जिला कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र) अलग-अलग कारणों के चलते अधिकतर जिलों में बंद हो चुकी हैं। लेकिन नागौर जिले में यह लैब कई तरह समस्याओं से जूझते हुए अभी चल रही है।

हालांकि यह लैब अभी किसी तरह के घाटे में नहीं है। फिर भी यदि समय रहते जिम्मेदारों ने इसकी व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किए तो वो दिन दूर नहीं जब ये लैब भी बंद हो जाएगी। सरकार ने एसएफएस (सेल्फ फाइनेंस सर्विस) के पैटर्न पर सभी जिलों में डीसीटीसी लैब शुरू कराई थी। जिसमें शुरुआती दौर में सरकार से लैब मेंटेनंेस के लिए कुछ फंड मिलता था, लेकिन वो भी कुछ सालों में बंद कर दिया गया। इसके बाद भी नागौर के कांकरिया स्कूल में चल रही डीसीटीसी लैब से होने वाली आय से कर्मचारियों का वेतन दिए जाने के साथ लैब का रखरखाव किया जा रहा है। लेकिन अब इस लैब की स्थिति भी कमजोर होती जा रही है। क्योंकि डीसीटीसी लैब में 2005 में लगाए गए पी-4 प्रोसेसर कंप्यूटर व मॉनिटर लगाए हुए हैं। अभी तक लैब में एलसीडी व कंप्यूटर सिस्टम को अपग्रेड नहीं कराया गया है। जिससे कंप्यूटर कोर्स करने के लिए आने अभ्यर्थी लैब में पूराने कंप्यूटर-मॉनिटर देखकर ही यहां से वापस जा रहे हैं।

डीसीटीसी लैब की तस्वीर: डीईओ शिक्षकों को इसी लैब से कोर्स करने को पाबंद करें

नागौर. सेठ किशनलाल कांकरिया स्कूल परिसर में बनी डीसीटीसी लैब।

अनदेखी

तीन माह से होनी थी बैठक, 2 साल से नहीं हुई

डीसीटीसी लैब की सही क्रियान्विति को लेकर प्रत्येक तीन महीने से शिक्षा विभाग माध्यमिक प्रथम, कलेक्ट्रेट से अकाउंटेंट, एनआईसी, अटल सेवा केंद्र से एसीपी, नागौर और मेड़ता मिनी लैब प्रभारी आदि की मौजूदगी में बैठक होनी थी। जिसमें कर्मचारियों का वेतन, कोर्सेज, लैब मेंटेनेंस आदि पर चर्चा होनी थी। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से ये बैठक गत 2 साल से नहीं हई है।

हालात : डीसीटीसी लैब में वर्तमान में 40 मॉनिटर और पीसी लगाए हुए हैं। लेकिन इनमें से 20 से अधिक कंप्यूटर सिस्टम खराब पड़े हैं। ये सभी कंप्यूटर पी-4 प्रोसेसर के हैं, जो चलते-चलते बंद हो जाते हैं। अधिकारियों को कई बार लैब को अपग्रेड करवाने की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं की। जबकि इसके लिए विभाग को अलग से फंड लेने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि डीसीटीसी के अकाउंट मेंं इतना फंड है।

संकट |मेड़तासिटी मिनी लैब के कारण बंद हो सकती है मुख्य लैब

मेड़तासिटी में डीसीटीसी की मिनी लैब चलती है। इस लैब में 15 कंप्यूटर लगाए गए हैं। इनमें से 7 कंप्यूटर खराब पड़े हैं। यह लैब लंबे समय से घाटे में चल रही है। यदि आंकड़ों की बात करें तो मेड़तासिटी मिनी लैब से पिछले 3 साल में कुल 77850 रुपए की आय हई। इसमें से 65324 रुपए लैब मेंटेनेंस पर खर्च हो गए। ऐसे में 3 साल में मात्र 12524 की बचत हुई। जबकि लैब में कंप्यूटर पढ़ाने के लिए गए अनुदेशक का वेतन 8 हजार रुपए महीने के हिसाब से प्रति वर्ष Rs.96000 नागौर में चल रही मुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुख्य लैब से होने वाली आय से दिया जा रहा है। तीन साल में 2 लाख 88 हजार रुपए वेतन के रूप में दिए गए। जबकि 3 साल में इस लैब से आय सिर्फ Rs.12524 ही हुई। हर साल 96 हजार रुपए मेड़तासिटी मिनी लैब अनुदेशक का वेतन दिए जाने से नागौर में चल रही मुख्य लैब भी घाटे में आती जा रही है। ऐसे में यदि मुख्य लैब बंद होती है तो मिनी लैब के अनुदेशाक का वेतन इस लैब की आय से दिया जाना इसका मुख्य कारण रहेगा।

लैब को अपग्रेड किया जाए


सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए कंप्यूटर का आरकेसीएल से आरएससीआईटी कोर्स करने के निर्देश हैं। कोर्स करने वाले शिक्षकों को शुरूआत में कोर्स की फीस के Rs.2700 देने होते हैं। बाद में सरकार इन शिक्षकों को फीस के साथ 675 रुपए प्रोत्साहन राशि जोड़कर 3375 रुपए वापस करती है। ऐसे में यदि नागौर ब्लॉक के शिक्षक ही किसी निजी कंप्यूटर सेंटर के बजाय इसी लैब से कोर्स करंे तो इस लैब की आय और बढ़ सकेगी। इसके लिए चाहिए कि डीईओ आदेश जारी कर शिक्षकों को पाबंद करें।

डीईओ को जानकारी ही नहींं