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अपहरण कर युवती से दुष्कर्म किया था, 6 साल बाद फैसला, 5 आरोपियों को 10-10 साल की सजा

विवाहिता के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में नागौर एडीजे कोर्ट संख्या 2 ने पांच दोषियों को 10-10 साल की सजा...

Danik Bhaskar | May 12, 2018, 05:55 AM IST
विवाहिता के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में नागौर एडीजे कोर्ट संख्या 2 ने पांच दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई है। उन पर अलग-अलग धाराओं में 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड नहीं देने पर दो-दो महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा भी सुनाई है। इस मामले में कोर्ट ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। यह मामला खींवसर थाना क्षेत्र के आकला गांव से जुड़ा है। जहां ससुराल से महिला का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। वारदात से एक महीने पहले ही महिला का गौना हुआ था।

अपर लोक अभियोजक कांता बोथरा ने बताया कि आकला गांव के एक युवक ने 5 जून 2012 को खींवसर थाने में रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया कि वह दोपहर में घर पर सो रहा था। उसकी मां और बहन किसी काम से बैरावास गई हुई थी। उसने उठकर देखा तो उसकी प|ी घर पर नहीं थी। बाहर गया तो एक युवक उसे जबरदस्ती बाइक पर बैठाकर ले जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में रायधनु निवासी नरेश उर्फ नैनाराम जाट, कैलाश जाट, मुन्नाराम उर्फ मुनिया जाट, कात्यासनी निवासी चैनाराम जाट, सूफा उर्फ सूफी देवी और चातरा मांजरा निवासी रामप्रसाद जाट के खिलाफ चालान पेश किया। ग्वालू निवासी कचराराम उर्फ अर्जुनराम जाट के खिलाफ भी चालान पेश किया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 27 गवाहों के बयान करवाए गए। एडीजे कोर्ट क्रम 2 न्यायाधीश राकेश शर्मा ने पांच आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में दोषी माना और सजा सुनाई है। परिवादी की ओर से अधिवक्ता भंवरलाल चौधरी ने पैरवी की।

पीड़िता के पीहर में पड़ोसी हैं यह तीन आरोपी

जानकारी के अनुसार, सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता का पीहर रायधनु गांव में हैं। अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी नरेश, कैलाश और मुन्नाराम भी रायधनु गांव के हैं। वह गांव में पीड़िता के पड़ोस में रहते हैं।

रायधनु के रहने वाले नरेश व मुन्नाराम दोनों सगे भाई, चार धाराओं में दोषी, सभी में 10-10 साल सजा, अर्थदंड भी दिया

कोर्ट ने नरेश और मुन्नाराम को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 366 में 10-10 साल, 376 में 10-10 साल, 114 के तहत 10-10 साल और 120बी के तहत भी 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। सभी धाराओं में 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। दोनों सगे भाई हैं। अर्थदंड नहीं देने पर दो-दो महीने का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। वहीं, रामप्रसाद और कैलाश को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 376 में 10-10 साल, 114 में 10-10 साल और 120बी में भी 10-10 साल की सजा सुनाई है। सभी धाराओं में 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, चैनाराम को धारा 114 और 120बी के तहत 10-10 साल की सजा और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि सूफा और कचराराम को कोर्ट ने बरी कर दिया है।