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5वीं बोर्ड परीक्षा- 4 मई को अधूरा परिणाम जारी किया, खुलासा हुआ तो कुचामन डाइट प्राचार्य ने खुद ही 5 सदस्यीय कमेटी बना जांच कराई

5वीं बोर्ड का आधा-अधूरा परिणाम जारी करने के मामले में अब कुचामन डाइट अधिकारी अपना पीछा छुड़ाने के प्रयास में जुट गए...

Dainik Bhaskar

May 12, 2018, 05:55 AM IST
5वीं बोर्ड का आधा-अधूरा परिणाम जारी करने के मामले में अब कुचामन डाइट अधिकारी अपना पीछा छुड़ाने के प्रयास में जुट गए हैं। 4 मई को आधे-अधूरे जारी हुए पांचवीं बोर्ड परिणाम में डाइट स्तर के अधिकारियों ने खुद को दोषमुक्त साबित करने के लिए अपने स्तर पर ही कमेटी गठन कर अपने ही अधिकारियों से जांच करवा ली।

पूरा मामला सामने आने के बाद अब डाइट के अधिकारियों ने बयान तक बदलने शुरू कर दिए। भास्कर की पड़ताल में पूरा मामला उजागर होने के बाद इस संबंध में जानकारी के लिए जब डाइट अधिकारियों से संपर्क किया तो उनमें खलबली मच गई। बयान बदलते हुए बोले कि हमने तो कमेटी का गठन शेष रहे परिणाम को अपलोड करवाने के लिए किया था, ताकि बच्चे अपने परिणाम को लेकर परेशान नहीं हो। जबकि हकीकत यह है कि 8 मई को डाइट प्रभारी द्वारा दिए गए बयान में कहा था कि डाइट स्तर पर परिणाम में कहां चूक रही है इसके लिए कमेटी का गठन किया गया है, जो परिणाम का अध्ययन करने के बाद चूक कहां हुई इसकी रिपोर्ट देगी। इधर, चौंकाने वाली बात यह है कि इस कमेटी का गठन डाइट प्राचार्य जगदीशप्रसाद मीणा ने ही किया था, जो स्वयं संबंधित फर्म को आधी-अधूरी सूचना देने के कारण 31450 बच्चों के रुके परिणाम के जिम्मेदार हैं। इस 5 सदस्य कमेटी में सभी डाइट के ही अधिकारी रहे। गौरतलब है कि डाइट द्वारा 5वीं बोर्ड के 67098 बच्चों का 4 मई को संबंधित फर्म को आधा-अधूरा डाटा भेज 35648 बच्चों का ही परिणाम जारी करवा लिया था। 31450 बच्चों का परिणाम रूकने व गड़बड़ी को लेकर 5 दिनों तक अभिभावक व बच्चे परेशान होते रहे।

गड़बड़ी भी इनकी, जांच करने वाले भी यही, रिपोर्ट बनाई खुद को बचाने वाली

डाइट प्रभारी बोले- डाटा भेजा था उड़ गया होगा


1. 67098 बच्चों की कॉपियां 20 अप्रैल से पहले जंचवानी थी, लेकिन डाइट अधिकारी ऐसा नहीं करवा पाए।

2. 16 अप्रैल तक 14 बीईईओ को 67098 बच्चों की सत्रांक व अंक सूची भिजवानी थी, केवल परबतसर व नावां ने ही भिजवाई थी। 12 बीईईओ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

3. 3 मई शाम तक डाइट अधिकारी 67098 में से 35648 बच्चों की अंक सूची व सत्रांक फर्म को भिजवा पाए। दबाव बना तो आधे बच्चों का परिणाम जारी करवा दिया।

4. अधूरे परिणाम पर विवाद बढ़ा तो फर्म पर डाइट ने फिर दबाव बना 31450 बच्चों का पूर्णत: परिणाम तैयार होने से पहले ही जारी करवा दिया। इसकी सूचना भास्कर मेल आईडी पर भी दी गई।

5. 31450 बच्चों के परिणाम में ग्रेड गायब होने पर जिलेभर में अचानक बढ़े विवाद के बाद 9 मई को संशोधित परिणाम जारी करवाना पड़ा। खुद को लापरवाही व दोष से बचाने डाइट स्तर पर ही कमेटी गठन कर अपने अधिकारियों से खुद के बचाव में जांच करा ली।

इस कमेटी से कराई प्राचार्य ने जांच

31 हजार बच्चों के साथ खिलवाड़ किया, अब बार बार बदल रहे हैं बयान

: कुचामन डाइट प्राचार्य जगदीश प्रसाद मीणा ने पांच सदस्य कमेटी में डाइट में कार्यरत डॉ अजित सिंह देता, वरिष्ठ व्याख्याता रतन लाल, अखिलेश चंद्र राय, रामनिवास, सुखाराम सहित डाइट प्रभारी रूपसिंह राजपुरोहित को शामिल किया। जिन्होंने डाइट परिणाम में रही चूक की जांच कर रिपोर्ट प्राचार्य को सौंपी। जिसमें अधूरे परिणाम घोषित करने व बच्चों के ग्रेड गायब होने के जिम्मेदार फर्म को ठहराया दिया। जबकि कमेटी में शामिल लोग डाइट के ही हैं। डीडी के नोटिस का अभी जवाब नहीं दिया है।

प्राचार्य जगदीश प्रसाद मीणा का अब यह बयान

भास्कर : कमेटी की जांच में क्या रहा ?

प्राचार्य : बीईईओ स्तर पर जो डाटा बाकी था वो अपलोड करवाया।

भास्कर : आपने तो कमेटी जांच में फर्म को जिम्मेदार ठहराया है, वो दोषी है या आपने अधूरा परिणाम भेजा वह गलत ?

प्राचार्य : पहले बोले - जांच करवाई थी, फिर बोले-वंचित डाटा भिजवाने के लिए कमेटी गठित की है।

भास्कर : डाइट ने अधूरा परिणाम जारी किया, अब डाइट ही जांच करवा रहा है, क्या यह सही है?

प्राचार्य : हमने ऐसा नहीं किया, आंकड़े छूट न जाए उसे दुरुस्त करवाने के लिए ऐसा किया।

सीधी बातचीत

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