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अन्याय से अर्जित किए गए धन से मनुष्य को कभी भी जीवन में नहीं मिल पाता है सुख : समणी सुयश निधि

श्री अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वाधान में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत समणी...

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 06:06 AM IST
अन्याय से अर्जित किए गए धन से मनुष्य को कभी भी जीवन में नहीं मिल पाता है सुख : समणी सुयश निधि
श्री अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वाधान में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत समणी निर्देशिका डॉ. सुयशनिधि, समणी सुगमनिधि, समणी सुधननिधि, समणी सुयोगनिधि, समणी श्रद्धानिधि आदि ठाणा 5 के सान्निध्य में निरंतर धर्म अनुष्ठान सुगमता के साथ चल रहे हैं। प्रवचन सभा में डॉ. समणी सुयशनिधि ने “जीवन के उद्देश्य क्या होना चाहिए - धन या सुख” विषय को पुष्टित करते हुए कहा कि जिस अर्थ की जड़ में पाप है, अन्याय है, वह सुख कैसे दे सकेगा? जिस वृक्ष की जड़ में नमक सींच रहे है, क्या वह मीठे फल देगा? सुख तो शुभ कार्य के उदय से मिलता है, व व्यक्ति धन कमाने के लिए अशुभ कार्य कर रहा है, यह उल्टी गंगा बह रही है। अन्याय से अर्जित धन से सुख नहीं मिल सकता। सुख धन से नहीं, मन से मिलता है। समणी सुगमनिधि ने तीर्थंकर महावीर स्वामी के गणधर इंद्रभूति गौतम की प्रभु के प्रति समर्पण भाव को बखूबी से दर्शाया। प्रवचन की प्रभावना के लाभार्थी ताराचंद, निर्मलचंद, नरपतचंद, सुशीलकुमार रहे। दर्शन प्रतिमा के लाभार्थी कंवरीलाल, राजकुमार ललवानी रहे। एकाशन के दौरान हुई प्रतियोगिता के पुरस्कार ताराचंद, श्रीपालकुमार द्वारा दिए गए। किशोर सुराणा ने बताया की हरकचंद ललवानी, सरोज देवी, हेमलता ने उत्तर दिए। इस मौके पर विनीता पींचा, संतोष चौरड़िया, शोभा चौरड़िया, शांति देवी चौरड़िया मौजूद थे।

‘धर्म के क्षेत्र में मानव कर लेता है संतोष’

नागौर| कनक अराधना भवन काली पोल उपासरा में खरतरगच्छ जैन साध्वी माता के सान्निध्य में साध्वी शासन प्रभा श्री जी ने दैनिक प्रवचन के दौरान कहां कि आज के जमाने में संसार में परिवर्तन स्वत ही हो जाता है। लेकिन धर्म के क्षेत्र में परिवर्तन वहीं के वहीं है। साध्वी श्रीजी ने कहा कि सन्तोष व असंतोष यह दो महत्वपूर्ण शब्द है। उन्होंने सन्तोष व असंतोष के बारे में विस्तार से बताया कि हम धर्म के क्षेत्र में सन्तोष कर लेते हैं । जबकि संसार के क्षेत्र में मानव सन्तोष नहीं करते हे। इसलिए संसार के क्षेत्र में असंतोष ही रहता है। साध्वी निष्ठांजना श्रीजी ने कहा कि सिर्फ नवकार महामंत्र ही एक ऐसा मंत्र है जो कि भवो-भव तक साथ में चलने वाला है। ओर साथ में कुछ भी नहीं चलने वाला है। संघ मीडिया प्रभारी प्रदीप डागा ने बताया कि कल नवकार महामंत्र अराधना तप मुख्य कलश, कुंभ कलश व भगवान पार्श्वनाथ की स्थापना के बाद में शुरू होगा। नवकार महामंत्र अराधना तप 68 दिनों तक चलेगा। इस अवसर पर संघ अध्यक्ष गौतम कोठारी, रिखबचंद डागा, संघ सचिव केवल राज बच्छावत, माणक डोसी, सुभाष चन्द्र बोथरा, खेमचंद खजांची, पदम चंद कोठारी, मनीष खजांची, विकास बोथरा आदि उपस्थित थे।

नागौर| रामपोल में चातुर्मास के सत्संग के दौरान गुरुवार को संत हरिविलास महाराज ने कहा कि भक्ति शुद्ध मन से की जाए। जब तक हम शुद्ध मन से भगवान की भक्ति नहीं करते है तब तक भगवान हमपर कृपा नहीं करेंगे। इस मौके पर रामनामी महंत संपतराम महाराज ने कहा कि मन ही हर काम में बाधक बनता है। इसलिए मन पर अपना नियंत्रण रखना जरूरी है। भगवान को निर्मल मन वाले मानव प्रिय होते है। इसलिए मन की मलिनता को दूर कर भक्ति करनी जरूरी है। मन पर नियंत्रण रखकर भक्ति करे तो भगवान प्रसन्न होंगे। इस मौके पर संत मुरलीराम महाराज भी मौजूद थे।

अन्याय से अर्जित किए गए धन से मनुष्य को कभी भी जीवन में नहीं मिल पाता है सुख : समणी सुयश निधि
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