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देव व पितरों को प्रसन्न करने जन्म नक्षत्र के मुताबिक करें पौधरोपण

हरियाली अमावस्या 11 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन शनिश्चरी अमावस्या का अदभुत संयोग बन रहा है। यह संयोग देवताओं व...

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 06:10 AM IST
हरियाली अमावस्या 11 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन शनिश्चरी अमावस्या का अदभुत संयोग बन रहा है। यह संयोग देवताओं व पितरों को प्रसन्न करने के लिए विशेष शुभ है। इतना ही नहीं इस दिन अपने जन्म नक्षत्र या नाम के नक्षत्र के अनुसार पौधरोपण करना शास्त्र सम्मत है व विशेष फलदायी है। लिहाजा हरियाली अमावस्या के दिन न केवल पौधरोपण करें बल्कि उनकी बड़े होने तक देखरेख करने का संकल्प लें।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अमावस्या तिथि का प्रारंभ 10 अगस्त को शाम 7:07 बजे से पुष्य नक्षत्र में हो जाएगा। यह तिथि शनिवार दोपहर 3:27 बजे तक रहेगी। शनिवार के दिन अमावस्या उदया तिथि होने के कारण हरियाली अमावस्या एवं शनिचरी अमावस्या 11 अगस्त शनिवार के दिन ही मनाई जाएगी। इसी दिन देव, पितर कार्य भी किए जाएंगे। पर्यावरण को संरक्षित करने तथा देवता व पितरों को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पौधरोपण करके उनका पालन-पोषण करने का संकल्प लेना चाहिए। नक्षत्रों के अनुसार पौधरोपण करने से देवता और पितर प्रसन्न होते हैं। साथ ही हमें ग्रहों की अनुकूलता भी मिलती है। यदि कोई व्यक्ति अपने नक्षत्र के अनुसार पौधरोपण करता है तो उसके स्वास्थ्य, धन, सुख-समृद्धि, संतान की उन्नति, शिक्षा आदि में वृद्धि होती है। साथ ही उसके कष्टों का निवारण होता है।

ज्योतिर्विद आचार्य पंडित विमल पारीक शास्त्री के अनुसार हरियाली अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है, लिहाजा इस दिन गरीबों, असहाय लोगों को दानपुण्य करने का विशेष महत्व है। वे बताते हैं कि ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है और शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं। इससे मनुष्य के जीवन में लाभ हेाता है।

हरियाली और शनिश्चरी अमावस्या का विशेष संयोग 11 को, मंदिरों में तैयारियां शुरू

किस नक्षत्र में जन्मे जातक के लिए कौन सा पौधा

राशि किस्म

अश्वनी कुचला

भरणी आंवला

कृत्तिका गूलर

रोहिणी जामुन

मृगशिरा खेरी वृक्ष

आर्द्रा कृष्ण गुरु

पुनर्वसु देसी बबूल

पुष्य पीपल

अश्लेषा नाग चंपा

मघा वट

पूर्वा फाल्गुनी अशोक

उत्तरा फाल्गुनी खेजड़ी

हस्त नक्षत्र जूही

चित्रा बिल्व

स्वाति अर्जुन

विशाखा नागकेसर

अनुराधा नागकेसर

ज्येष्ठा नीम

मूल वैत

पूर्वाआषाढ़ अर्क

उत्तराषाढ़ कटहल

श्रवण श्वेत

धनिष्ठा नारियल

सतविशा आम

पूर्वाभाद्रपद कदम्ब

उत्तराभाद्रपद मेहंदी

रेवती बेर

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