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श्रीमद् भागवत कथा में सभी ग्रंथों का सार, इसे श्रवण करने मात्र से ही मनुष्य को मिल जाती है पापों से मुक्ति : महाराज

विकलांग विकास सेवा समिति व ग्रामीणों के सहयोग से हाउसिंग बोर्ड के सामुदायिक भवन ताउसर रोड में 7 दिवसीय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 06:16 AM IST

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    विकलांग विकास सेवा समिति व ग्रामीणों के सहयोग से हाउसिंग बोर्ड के सामुदायिक भवन ताउसर रोड में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को कथावाचक उग्रसेन महाराज ने शिव द्वारा पार्वती को अमृत कथा सुनाने का प्रसंग सुनाया। इस दौरान राजा परीक्षित के जीवन वृतांत के बारे में और राजा द्वारा भागवत कथा सुनकर 7 दिन में मोक्ष प्रदान करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सभी ग्रंथों का सार है। इसे सुनने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान भजनों की प्रस्तुतियां दी गई। पापालाल सांखला ने बताया कि असहाय, दीन, दुखी गरीब विकलांग बच्चों के शिक्षण भोजन सहयोगार्थ के लिए कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान अध्यक्ष रामकुवांर भाटी, हड़मान भाटी, भंवरलाल तंवर, कपिल सांखला, कानाराम सुथार, रामप्रसाद सुथार, पंडित मालचंद दाधीच, जंवरीलाल, भंवरलाल टाक, भीखाराम कच्छावा, गौरव सांखला, भंवरलाल वैष्णव, किशनदान, अजित ओझा, ब्रजमोहन ओझा, तोलाराम तिवारी, संस्था के समाजसेवी गुलाबचंद भाटी, कैलाश सारस्वत, पंडित ताराचंद और राकेश माथुर आदि मौजूद थे।

    सुख भोगने वाला मनुष्य हो जाता है आलसी, भक्ति नहीं कर सकता : संत

    नागौर| रामपोल सत्संग भवन में बुधवार को चातुर्मास धर्मसभा में रामनामी महंत संपतराम महाराज ने कहा कि संसार का भोग एवं सुख सुविधा भोगने वाला मनुष्य भक्ति नहीं कर सकता। उसका मन बिगड़ चुका होता है। सुख भोगने से तन आलसी हो जाता है। इसलिए उसको भगवान की भक्ति करना कठिन लगता है। भक्ति में प्रति क्षण आनंद बढ़ता जाता है। जबकि भोग में आनंद घटता है। उन्होंने कहा कि भोग मनुष्य के पतन, रोग, क्लेश, अशांति, दुख आदि का कारण होता है। संत हरिविलास महाराज ने कहा कि मनुष्य को आंतरिक शांति तो चाहिए लेकिन हमारे सारे प्रयास बाहर की तरफ होते हैं। उन्होंने कहा कि अंधेरा घर के भीतर है और हम घर की दोहरी से बाहर दीप जलाकर अंधेरे से लड़ने का प्रयास कर रहे हैं। संत मुरलीराम महाराज सहित श्रद्धालु मौजूद थे।

    मेड़ता रोड| मेड़ता रोड में स्थित प्रीतमदास जी के रामद्वारा में चल रही कथा के दौरान बुधवार को संत गोरधनदास रामस्नेही ने प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य को सत्संग नियमित रूप से करना चाहिए। सत्संग से स्वयं का मन शुद्ध होता है तो आस पास का वातावरण भी शुद्ध हो जाता है। इसलिए नियमित सत्संग से व्यक्ति के चरित्र का निर्माण होता है। सत्संग किसी भी समय की जा सकती है। अच्छे गृहस्थी को परिवार में सामंजस्य से रहना चाहिए व परिजनों का ख्याल रखते हुए एक-दूसरे का ध्यान रखना चाहिए, मन, कर्म व वचन से किसी को भी तकलीफ ना हो ऐसा प्रयास करना चाहिए। कथा में जुगलकिशोर जोशी, नरेन्द्र, लालदास वैष्णव, कमल शर्मा, राधेश्याम जांगला सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित हुए।

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