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भामाशाह योजना के क्लेम के लिए बीमा कंपनी अस्पतालों से पूछ रही अजीब सवाल

Nagour News - भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में बीमा कंपनी अब अस्पतालों के क्लेम रोकने के लिए अलग अलग तरीके अपना रही है। एक के...

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 06:30 AM IST
भामाशाह योजना के क्लेम के लिए बीमा कंपनी अस्पतालों से पूछ रही अजीब सवाल
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में बीमा कंपनी अब अस्पतालों के क्लेम रोकने के लिए अलग अलग तरीके अपना रही है। एक के बाद एक कंपनी एक ही ऑपरेशन पर अस्पतालों से सवाल पूछ रही है। जिसके जवाब देने के बाद भी अस्पतालों के क्लेम दूसरे सवाल पूछ कर अटकाए जा रहे है।

जिससे बीमा कंपनी को लाभ ही मिल रहा है आैर योजना से जुड़े अस्पतालों को नुकसान पहुंच रहा है। कंपनी की ओर से अजीब सवाल पूछे जा रहे है जिसमें मरीजों के ताजा फोटो मांगे जा रहे है। जिसे अस्पताल संचालक देने में असमर्थता जता रहे है। ऐसा ही एक मामला शहर के निजी अस्पताल के सामने अाया जब मई में किए गए मरीज के अंगुली के ऑपरेशन का क्लेम भेजा गया। लेकिन उस पर सवाल लगा कर लौटा दिया गया। अस्पताल ने जवाब दिया तो कंपनी ने दूसरा सवाल दाग दिया। और उस केस को रिजेक्ट कर दिया गया। अब अस्पताल संचालक का कहना है कि जब आॅपरेशन किया गया तो सारी जानकारी भेजी गई थी। लेकिन अब कंपनी अजीब सवाल पूछ रही है। महादेव अस्पताल ने मरीज गोविंद पुत्र मनोहर उम्र 18 निवासी आकोड़ा जायल के अंगुली का ऑपरेश गत 10 मई को किया। उपचार के बाद क्लेम भेजा गया। लेकिन उसे रिजेक्ट कर दिया गया। इसके बाद लाइव फोटो नहीं होने पर उसे दूसरे जवाब के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। जबकि अस्पताल में एक दिन पहले ही उसका थंब इंप्रेशन लिया जा चुका था।

अस्पतालों का आरोप

भामाशाह योजना से जुड़े अस्पतालों का कहना है कि कंपनी ने ऐसे ऐसे मरीजों के लिए क्वेरी मांगी है जिन्हें नियमों के अनुसार नहीं किया जा सकता है। इन्हीं को लेकर कंपनी ऐतराज भी जता रही है। जिससे जवाब नकारात्मक रहने से क्लेम ही रिजेक्ट हो जाता है। यह सारा अनभिज्ञता के चलते हो रहा है। यहां तक कि ऑडिट करने वालों की भी विशेषज्ञता कम होती है। जिससे उनको जानकारी का अभाव रहता है। कंपनी कई बार गर्भवती महिला के आॅपरेशन के पूर्व और बाद के एक्स रे मांग लेती है। भुगतान भी अनियमित तरीके से किया जा रहा है जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कब और कौनसे केस का भुगतान किया गया है। इसके साथ ही अनावश्यक रूप से नियम विरुद्ध अस्पतालों को योजना से हटाया जा रहा है। अस्पताल द्वारा मामूली गलती करने पर भी सस्पेंड कर देना और मामले पर निर्णय होने तक अस्पताल को योजना में मरीज भर्ती नहीं करने देने से भी रोष है जबकि एनआईए की गलती पर उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। इस मामले में सरकार का भी पक्षपात पूर्ण रवैया है। डीजीआरसी भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

अज्ञानता पूर्वक भेजी जा रही क्वेरीज

जहां जहां हड़ताल वहां के क्लेम हुए पास

भामाशाह योजना को लेकर एक बात यह भी सामने आई है कि जहां जहां अस्पतालों ने इस योजना को लेकर विरोध किया है वहां वहां स्वास्थ्य विभाग ने उनके क्लेम जारी करने शुरू कर दिए है। नागौर, सीकर जैसे जिलों में अस्पतालों के क्लेम आने आरंभ हो चुके है। हालांकि यह भुगतान अभी पूरा नहीं हो पाया है लेकिन बीमा कंपनी ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिससे एक बारगी विरोध को ठंडा किया जा सके। लेकिन राज्य के अन्य जिलों में हालात ऐसे नहीं है। विरोध या बहिष्कार नहीं करने वाले जिलों में क्लेम अभी भी अटके हुए है।

संचालक बोले

निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि किसी भी प्रकार की महत्वपूर्ण मीटिंग्स और सुनवाई में निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया जाता है। फर्जीवाड़ा करने की नीयत से फेज 2 के एमओयू अभी तक अस्पतालों को नहीं दिया गया है। इससे किसी भी स्थिति में अस्पताल कानून का सहारा नहीं ले सके। सॉफ्टवेयर को इतना पेचीदा है कि अस्पताल के लिए मरीज की भर्ती प्रक्रिया भारी और मरीज के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वेंटिलेटर पर मरीज के थंब इंप्रेशन और लाइव फोटो परेशानी भरी है। महादेव अस्पताल के संचालक डॉ. हापूराम चौधरी का कहना है कि सरकार की यह योजना जरूरतमंद लोगों के लिए चलाई है लेकिन कंपनी की हठधर्मिता के कारण यह योजना गड़बड़ा गई है। वहीं नवजीवन अस्पताल के डॉ. रणवीर चौधरी ने कहा है कि छोटी छोटी बातों पर भी कंपनी की ओर से क्लेम रिजेक्ट किया जा रहा है।

एमओयू तक नहीं दिया गया

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