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आईएस से आजादी के बाद इराक में पहला चुनाव; 329 सीट, 7 हजार कैंडिडेट, ढाई करोड़ वोटर, 55 हजार वोटिंग बूथ बने

Dainik Bhaskar

May 13, 2018, 06:00 AM IST
आईएस से आजादी के बाद इराक में पहला चुनाव; 329 सीट, 7 हजार कैंडिडेट, ढाई करोड़ वोटर, 55 हजार वोटिंग बूथ बने

एजेंसी | बगदाद

आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) से आजाद होने के बाद पहली बार इराक में चुनाव हुए। शनिवार को देशभर में मतदान हुआ। कुल 329 सीट पर चुनाव हुए हैं। करीब 7 हजार प्रत्याशी मैदान में उतरे। देश के करीब ढाई करोड़ वोटरों ने 55 हजार वोटिंग बूथ पर मतदान किया। इससे पहले 2014 में देश में चुनाव हुए थे। तब इस्लामिक दवा पार्टी की जीत हुई थी और हैदर अल-अबादी प्रधानमंत्री बने थे। 2014 में जब अल-अबादी ने सत्ता संभाली थी, तब देश में आईएस का आतंक था। देश को आतंक से आजाद कराने का फायदा अल-अबादी को इस चुनाव में मिल सकता है। चुनाव का नतीजा 3 दिन में आने की उम्मीद है। नतीजा आने तक करीब 9 लाख सुरक्षाकर्मियों को हाईअलर्ट पर रखा गया है। एयरपोर्ट को मतदान के दिन के लिए बंद रखा गया। अल-अबादी का सीधा मुकाबला पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी से है। मलिकी 2006 से 2014 तक इराक के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। हालांकि उन पर सुन्नी मुस्लिमों की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं।

इराक की संसद में 25% सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रखी गई हैं। करीब 2600 महिला प्रत्याशी इस बार चुनावी मैदान में हैं।

लंबे समय तक आतंक प्रभावित रहे इराक में 4 साल बाद चुनाव हुए, इससे पहले 2014 में हुए थे

इराक में 4 साल बाद ऐसा नजारा दिख रहा है। सड़कें चुनाव प्रचार के पोस्टरों से पटी पड़ी हैं।

जॉर्ज बुश पर जूता फेंकने वाले जैदी भी चुनाव लड़ रहे

2008 में अमेरिकी राष्ट्रपति जाॅर्ज बुश पर जूते फेंकने वाले इराकी पत्रकार मुंतजर अल-जैदी भी चुनाव लड़ रहे हैं। जूता फेंकने के बाद जैदी को 9 महीने जेल की सजा हुई थी। अब वो सांसद बनने की दौड़ में हैं। जैदी कहते हैं- ‘अगर मैं प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जैसे किसी बड़े पद तक पहुंच पाता हूं तो भारत के साथ संबंध बेहतर करना मेरी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।’ जैदी कहते हैं कि भारत और इराक में काफी समानताएं हैं। दोनों ही देशों ने साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। इराक में लोग महात्मा गांधी का काफी सम्मान करते हैं।

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