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केंद्रीय गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद राज्य सरकार ने जारी की गाइडलाइन

मासूम बच्चियों सहित दुष्कर्म के आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। ऐसे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 12, 2018, 06:15 AM IST

मासूम बच्चियों सहित दुष्कर्म के आरोपियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। ऐसे प्रकरणों के अनुसंधान दो महीने में पूरा कर चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, तय कर दिया है कि आरोप पत्र के साथ ही मेडिकल से संबंधित तमाम रिपोर्ट संलग्न करनी होगी। सरकार ने कहा है कि सिर्फ महिला पुलिस अधिकारी ही प्रथम सूचना रिपोर्ट लिख सकेंगी। जहां तत्काल ऐसी व्यवस्था नहीं हो वहां महिला अधिकारी या अन्य महिला से लिखवाई जा सकेगी। मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के आरोपी को फांसी की सजा सहित महिला अपराधों को लेकर देश भर में नया कानून लागू हो चुका है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी के बाद राज्य सरकार ने पुलिस मुख्यालय सहित कलेक्टर-एसपी को एक गाइडलाइन जारी की है। राज्य सरकार ने मानसिक या शारीरिक रूप से निशक्त पीड़िता की एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को उसके निवास स्थान जाने तक के निर्देश दिए गए हैं।

महिला पुलिस अधिकारी ही लिखेंगी दुष्कर्म या छेड़छाड़ की रिपोर्ट, निशक्त की एफआईआर दर्ज करने घर जाएगी पुलिस

पुलिस अफसरों को यह प्रक्रिया अपनानी होगी

दुष्कर्म, छेड़छाड़, पोक्सो सहित महिला संबंधी गंभीर मामलों में एफआईआर सिर्फ महिला पुलिस अधिकारी को ही दर्ज करनी होगी। कोई महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं है तो महिला अफसर या फिर किसी एनजीओ से संबंधित महिला की मदद ली जा सकेगी। पीड़िता को तत्काल प्रभाव से विधिक और स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता की सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।

पीड़िता स्थाई या अस्थाई रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से निशक्त है, पुलिस अधिकारी ऐसी रिपोर्ट पीड़िता के निवास स्थान या फिर सुविधा के स्थल पर लिखेंगे। ऐसी सूचना की वीडियोग्राफी की जाएगी।

दुष्कर्म या छेड़छाड़ की शिकार पीड़िता सहित जिस किसी व्यक्ति ने ऐसी घटना की सूचना दी है उसे भी प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति तत्काल प्रभाव से उपलब्ध करवाई जाएगी। ताकि, किसी तरह की कोई शिकायत हो तो तत्काल दूर की जा सके।

2 महीने में चार्जशीट करनी होगी

दुष्कर्म से संबंधित प्रकरणों में अनुसंधान 2 महीने में पूरा करना होगा। वहीं, कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करते समय चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के साथ विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी संलग्न करना अनिवार्य होगी। यानी एफएसएल से संबंधित पूरी रिपोर्ट 2 माह में तैयार कर कोर्ट में पेश करनी होगी।

सरकारी कर्मचारियों पर सख्ती

गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक उप्रेती की ओर से जारी परिपत्र में कहा गया है कि इस तरह के अपराधों में शामिल सरकारी अफसरों एवं कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी। यानी सरकारी कार्मिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट का हाईकोर्टों को निर्देश

दो माह के भीतर गठित की जाएं यौन उत्पीड़न निरोधक समितियां

नई दिल्ली | देश की सभी अदालतों में दो माह के भीतर यौन उत्पीड़न शिकायत सेल या समितियां गठित हो जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में शुक्रवार को सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट निर्धारित अवधि के भीतर अपने यहां और जिला अदालतों में यौन उत्पीड़न निरोधक समितियां गठित करें।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल से कहा है कि वह दिल्ली की सभी जिला अदालतों में यौन उत्पीड़न निरोधक समितियों का गठन एक हफ्ते में करें। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक महिला वकील की याचिका की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

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