Hindi News »Rajasthan »Nagour» मुश्किल वक्त में स्थिति अपने हाथों में लेनी चाहिए

मुश्किल वक्त में स्थिति अपने हाथों में लेनी चाहिए

अमिताभ बच्चन को भी कोलकाता के भोवानीपोर के 23 वर्षीय युवक अमित मोंडल को देखने के लिए अपना सिर ऊपर उठाना पड़ता।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 12, 2018, 06:20 AM IST

मुश्किल वक्त में स्थिति अपने हाथों में लेनी चाहिए
अमिताभ बच्चन को भी कोलकाता के भोवानीपोर के 23 वर्षीय युवक अमित मोंडल को देखने के लिए अपना सिर ऊपर उठाना पड़ता। क्योंकि वह न सिर्फ गोरे रंग का खूबसूरत जवान था बल्कि उसकी ऊंचाई भी 6.3 फीट थी! इसलिए तकनीकी रूप से यह सभंव नहीं था कि 6.2 फीट ऊंचाई के अमिताभ उन्हें निगाह नीची करके देख सकें। हालांकि, उसकी हरसतें उससे ऊंची नहीं थीं। वह तो सिर्फ ट्रैफिक सार्जेंट बनना चाहता था। उसके पिता धनंजय मोंडल मिस्री थे और उसकी मां झारना गृहिणी।

लेकिन, 13 माह पहले अमित को लकवे का दौरा आया और डॉक्टरों ने िदमाग में फूल रही रक्त वाहिका को इसका कारण बताया। उन्होंने स्टेंट लगवाने की सलाह दी, जिसकी कीमत 7 लाख रुपए थी। चूंकि उसके परिवार के पास पैसा नहीं था तो उसे सरकारी अस्पताल जाना पड़ा। हालांकि, बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेस में भर्ती होने के लिए उन्हें नौ माह इंतजार करना पड़ा। साउथ कोलकाता कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएट अमित को इस साल 25 जनवरी को ‘ब्रेन एन्यूरिज़्म’ के इलाज के लिए भर्ती किया गया। अमित के डॉक्टर डीके रॉय ने उसके भर्ती होने के दिन स्टोरकीपर पलाश दत्ता को स्टेंट के लिए नोट लिखकर भेजा। उसके बाद से धनंजय अपनी फाइल की मंजूरी के लिए दत्ता के यहां चक्कर लगा रहे थे। आरोप है कि दत्ता ने धनंजय से 3.50 लाख रुपए की रिश्वत मांगी।

बेटे की स्थिति को न देख पा रहे धनंजय ने इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर से मिलने की कोशिश की लेकिन, उनके निजी सहायक ने उन्हें मिलने नहीं दिया। धनंजय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष मंत्री अरूप बिस्वास के निवास पर कई चक्कर लगाए। जैसे-तैसे वे मुख्यमंत्री कार्यालय से 20 मार्च, 2018 की तारीख वाला एक नोट हासिल करने में कामयाब हुए, जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि अमित की ज़िंदगी बचाने के लिए स्टेंट देने की मंजूरी दे दी जाए। लेकिन, कुछ भी नहीं हुआ। वे और उनकी प|ी असहाय होकर रोज बेटे को तकलीफ भुगतते देखते रहते, जिसकी अंतत: लकवे के दूसरे दौरे के बाद 28 अप्रैल को मौत हो गई। जब यह खबर फैली तो मुख्यमंत्री को बहुत बुरा लगा, उन्होंने जांच शुरू की और स्टोर कीपर को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब नतीजा कुछ भी क्यों न निकले 23 साल का वह खूबसूरत युवा हमेशा के लिए चला गया है।

इस भयंकर घटना से मुझे 2016 की एक अन्य घटना याद आई, जिसमें एक अधिकारी को रिश्वत देने के लिए 15 वर्षीय बालक को भीख मांगना पड़ रही थी। तमिलनाडु के विल्लुपुरम के अजित के पिताजी कोलांजी की फरवरी 2016 में मौत के बाद उसका कोई नहीं था लेकिन, राज्य की किसान सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत वह 12,500 रुपए पाने का हकदार था। किंतु जब वह प्रशासनिक अधिकारी के पास पहुंचा तो उसने 3 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। इसलिए उसने एक प्रेरक कदम उठाया। उसने विल्लुपुरम की गलियों और बसस्टैंड पर भीख मांगना शुरू कर दिया। उसने साथ में एक बैनर रख लिया कि वह क्यों भीख मांग रहा है। शर्मिंदा जिला प्रशासन ने तत्काल उसे भुगतान किया और उस अधिकारी को तबादला करके दंडित भी किया। कल्पना कीजिए कि यदि धनंजय या उनकी प|ी ने अस्पताल के बाहर भीख मांगने का अजित जैसा साहस दिखाया होता तो क्या नतीजा होता!

फंडा यह है कि  जब मुश्किल परिस्थितियों से सामना हो तो बुनियादी साहस दिखाते हुए स्थिति को अपने हाथ में लेना चाहिए।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें FUNDA और SMS भेजें 9200001164 पर

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Nagour

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×