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प्रेरक | जस्टिस एस.जे. कत्थावाला न्यायाधीश, बॉम्बे हाईकोर्ट

शिक्षा- विल्सन कॉलेज से ग्रेजुएट, गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी। क्यों चर्चा में- ग्रीष्म अवकाश के पहले रात 3:30 बजे...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 12, 2018, 06:20 AM IST

प्रेरक | जस्टिस एस.जे. कत्थावाला न्यायाधीश, बॉम्बे हाईकोर्ट
शिक्षा- विल्सन कॉलेज से ग्रेजुएट, गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी।

क्यों चर्चा में- ग्रीष्म अवकाश के पहले रात 3:30 बजे तक बैठकर मामले पूरे किए।

समय व्यर्थ न हो इसलिए छुट्‌टी के दिन फैसले लिखवाते हैं

बात 2010 के मई माह की है। मुंबई में रेल सेवाएं मोटरमैन की हड़ताल के कारण अवरुद्ध थी। तमाम स्टेशनों पर डिसप्ले में कुछ दिख नहीं रहा था। लाखों यात्री परेशान हो रहे थे। हाईकोर्ट के स्टाफ मेंबर जैसे केपीपी नायर व चार अन्य बांद्रा में रहते थे, जो दूर था। लोकल ट्रेन नहीं चलने के कारण बसों की हालत ऐसी थी कि पांव रखना मुश्किल था, तो उसमें चढ़ना तो और भी कठिन था। नायर जस्टिस पीबी मजूमदार के सेक्रेटरी थे। तभी नायर की भेंट कोर्ट में काम करने वाली जस्टिस शाहरुख जिमी कत्थावाला की सेक्रेटरी श्रीमती इंगले से हुई। श्रीमती इंगले ने नायर और अन्य साथियों से उस गाड़ी में बैठने को कहा, जिसमें वे जा रही थी। साथ ही उन्हें घर छोड़ने की पेशकश की। ये गाड़ी और किसी ने नहीं वरन जस्टिस कत्थावाला ने भिजवाई थी। कुछ लोग बांद्रा, कुछ बोरीवली और कुछ विरार के थे, जो हाईकोर्ट से काफी दूर हैं। यह संदेश भी था कि यदि परेशानी हो तो उनका घर खुला है, उसमें रह सकते हैं, ताकि अगले दिन कोर्ट आने में परेशानी न हो।

59 वर्षीय जस्टिस कत्थावाला 1985 में महाराष्ट्र और गोआ बार के लिए एनरोल हुए थे। और 2009 में हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने, 2011 से स्थायी रूप से न्यायाधीश हैं। काम के प्रति उनका लगाव इस कदर है कि अवकाश के दिन भी वे सचिव को बुलाकर फैसलों के डिक्टेशन दिया करते हैं, ताकि किसी भी तरह से अदालत का समय व्यर्थ नष्ट न हो। इन्होंने 79 परिवारों को उनके फ्लैट दिलाने के लिए एक वर्ष में करीब 36 आदेश पारित किए, जबकि बिल्डरों की ओर से टालमटोल के कारण ये लोग पिछले एक दशक से भटक रहे थे। इतना ही नहीं बिल्डर के बहानों को व्यर्थ साबित करने के लिए जस्टिस कत्थावाला ने एक आर्किटेक्ट अमोल शेतगिरी को नियुक्त किया कि वह देखें बिल्डर फ्लैट आवंटन कर रहा है या नहीं।

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