Hindi News »Rajasthan »Nagour» कम कृषि भूमि वाले किसानों के लिए खेती के साथ मछली पालन भी फायदे का सौदा

कम कृषि भूमि वाले किसानों के लिए खेती के साथ मछली पालन भी फायदे का सौदा

बढ़ती आबादी के साथ किसानों की कृषि भूमि कम होती जा रही है। बढ़ते परिवारों के बीच भूमि का बंटवारा इतना होता जा रहा है...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 06:05 AM IST

बढ़ती आबादी के साथ किसानों की कृषि भूमि कम होती जा रही है। बढ़ते परिवारों के बीच भूमि का बंटवारा इतना होता जा रहा है कि आखिर में किसान लघु या सीमांत कृषक में श्रेणी में आने लग गया है। ऐसे में किसान को जीवन यापन या अपनी आय को दोगुना करने के लिए खेती के समानांतर कुछ काम देखना होगा। वैसे तो कई काम हैं, लेकिन मछली पालन किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

नीलि क्रांति के रूप में केंद्र और राज्य सरकार इसे बढ़ावा दे रही हैं। इसी कारण किसानों का मछली पालन कर आय बढ़ाने की ओर रुझान बढ़ा है। किसानों को अन्य फसलों जैसे गन्ना, धान या सब्जी की तुलना में प्रति हैक्टेयर मछली पालन से होने वाली आय दो से तीन गुना अधिक होती है। इसीलिए मछली पालन किसानों के लिए आर्थिक रूप से काफी सफल साबित हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सन् 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का जो स्वप्न देखा है या जो प्लान बनाया है, उसमें मछली पालन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मछली पालन का काम बतख पालन या सूअर पालन अथवा मवेशी पालन या सब्जी उगाने या अन्य खेती कार्य करने के साथ किया जा सकता है।

पंगास मछली से ज्यादा फायदा इन दिनों पंगास मछली पालन या उत्पादन पर काफी जोर दिया जा रहा है। तमिलनाडू मात्स्यिकी विश्वविद्यालय से संबद्ध मात्स्यिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान पोन्नेरी के जल कृषि विभाग में पीएचडी के शोध छात्र पवन शर्मा ने बताया कि पंगास मछली 6 माह में तैयार हो जाती है और गर्मियों में अच्छी वृद्धि दिखाती है। सर्दियों में कम तापमान के कारण मरने लगती है। ऐसे में फरवरी-मार्च से जुलाई-अगस्त तक इसका उत्पादन अधिक होता है। इसके अलावा कतला, रोहू, म्रिगल, कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प, महाशीर आदि मछलियों की प्रचलित प्रजातियां हैं, जो पंगास से महंगी बिकती हैं।

यहां मिलेंगे मछली बीज : पालन के लिए मछली बीज (जीरा या अंगुलिका) की आवश्यकता होती है, जो मत्स्य हेचरी में आसानी से मिल जाता है। इसके लिए महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के फिश फार्म पर संपर्क किया जा सकता है।

कोई भी कर सकता है मछली पालन : मछली पालन के लिए अधिक पढ़े-लिखे होने की जरूरत नहीं है। मछली पालन कैसे करें, इसके लिए मत्स्य विभाग समय-समय पर ट्रेनिंग देता है। अधिक जानकारी मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय उदयपुर से ली जा सकती है। मछली पालन के लिए किसी तरह के लाइसेंस की भी जरूरत नहीं है। छोटे स्तर पर काम करने वाले किसानों को कर्ज भी मिलता है और 25 से 50 प्रतिशत तक की छूट भी मिलती है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में सरकार स्वरोजगार के लिए 10 लाख रुपए तक का कर्ज भी उपलब्ध करवाती है।

India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Nagour News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: कम कृषि भूमि वाले किसानों के लिए खेती के साथ मछली पालन भी फायदे का सौदा
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Nagour

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×