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मध्यप्रदेश : हर माह बीवियों से पिटते हैं 200 पति, चार महीनों में 800 से ज्यादा शिकायतें, पीड़ितों में इंदौर पहले नंबर पर

पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ मारपीट को सामान्य घटना माना जाता है। कई मामलों में तो महिलाएं इस बारे में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 16, 2018, 06:20 AM IST

पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ मारपीट को सामान्य घटना माना जाता है। कई मामलों में तो महिलाएं इस बारे में शिकायत तक नहीं करतीं। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि महिलाओं के हाथों पिटने वाले पुरुष भी कम नहीं हैं और वे इस पिटाई की बाकायदा शिकायत भी करने लगे हैं। मध्य प्रदेश में अपराधों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए कुछ वर्ष पूर्व शुरू की गई सेवा ‘डायल 100’ के जनसंपर्क अधिकारी हेमंत शर्मा ने इस पर मिली शिकायतों के आधार पर बताया कि राज्य में औसतन हर माह 200 पति अपनी प|ियों से पिटते हैं। पिछले चार महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि राज्यभर में 800 से ज्यादा पतियों ने प|ी के हाथों प्रताड़ित किए जाने की शिकायत दर्ज करवाई है। राज्य में शहरों के लिहाज से देखें तो इंदौर इस मामले में अव्वल है। यहां जनवरी से अप्रैल 2018 तक चार माह में 72 पतियों ने अपनी प|ियों से पिटाई होने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई। दूसरे स्थान पर रहते हुए भोपाल के 52 पतियों ने अपनी प|ियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है।

इसी अवधि में पूरे प्रदेश में 802 पतियों ने प|ी प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाई है। जनवरी 2018 से ‘डायल 100’ की टीम ने इस नंबर पर फोन करने वालों के लिए अन्य श्रेणियों के साथ ही ‘बीटिंग हसबेंड इवेंट’ की एक नई श्रेणी तैयार की। अब तक ये आंकड़े घरेलू हिंसा की वृहद श्रेणी में ही शामिल किए जाते थे और इनका अलग से कहीं उल्लेख नहीं किया जाता था।

चार महीने में पिटे 800 पति

यूं भी सामान्य धारणा यह है कि घरेलू हिंसा केवल महिलाओं के साथ ही होती है। जबकि ‘बीटिंग हसबैंड इवेंट’ की श्रेणी बनने के बाद तस्वीर का दूसरा रुख भी सामने आया। शर्मा ने बताया कि ‘डायल 100’ ने जनवरी से प्रदेश में ‘बीटिंग हसबैंड इवेंट’ और ‘बीटिंग वाइफ इवेंट’ की श्रेणी को घरेलू हिंसा की श्रेणी से अलग कर दिया। नतीजा यह रहा कि जनवरी 2018 से अप्रैल तक की अवधि में ‘डायल 100’ के प्रदेश स्तरीय नियंत्रण कक्ष में 802 पति घर में अपनी पिटाई की शिकायत दर्ज करवा चुके हैं।

बदलते वक्त के साथ महिलाओं में प्रतिरोध की क्षमता बढ़ी

घरेलू हिंसा का हर रूप निंदनीय है, लेकिन बदलते वक्त के साथ समाज में भी बदलाव आ रहा है। सदियों से अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहीं महिलाएं अब तालीम, प्रचार माध्यमों और कानूनी अधिकारों की जानकारी के चलते प्रतिरोध करने लगी हैं।’ -अरविंद चौहान, प्रोफेसर, बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी

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