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सोशल मीडिया पर वायरल हुए पांच शिक्षकों के फर्जी तबादला आदेश, राज्य में सभी जिला शिक्षाधिकारियों को किया अलर्ट

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फर्जी तबादला आदेश। अब शिक्षा निदेशालय से पुष्टि होने के बाद ही मान्य होंगे तबादला आदेश...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 06:40 AM IST
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ फर्जी तबादला आदेश।

अब शिक्षा निदेशालय से पुष्टि होने के बाद ही मान्य होंगे तबादला आदेश

एजुकेशन रिपोर्टर | बीकानेर

राज्य में तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादलों की सूचियां तैयार हो चुकी हैं। आदेश अगले माह तक जारी होने के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले ही सोशल मीडिया पर फर्जी सूचियां आने लगी हैं। ऐसी ही एक सूची पकड़ में आई है, जिसमें भीलवाड़ा से पांच शिक्षकों के तबादले विभिन्न जिलों में किए गए हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने इस सूची को फर्जी करार देते हुए जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। फर्जीवाड़े को देखते हुए राज्यभर में सभी जिला शिक्षाधिकारियों को अलर्ट कर दिया है।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से जारी आदेश 14 मई का है। आदेश में भीलवाड़ा में कार्यरत शिक्षक धर्मवीर जाट का तबादला राउप्रावि अगरपुरा भीलवाड़ा, नाथू खटीक को राउप्रावि चौधरिया भीलवाड़ा में बताया है, जबकि सुनीता बैरवा को राजसमंद, किशन रेगर को अजमेर और यदुराज सिंह काे झारौली भरतपुर लगाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन पांचों में से एक मात्र यदुराज कोटड़ी भीलवाड़ा में कार्यरत है। बाकी चारों नाम फर्जी बताए गए है। क्रियान्विति होने से पहले ही आदेश के फर्जी होने का पता चल गया। शिक्षा निदेशक श्याम सिंह राजपुरोहित ने भीलवाड़ा डीईओ कन्हैयालाल को जांच के आदेश दिए हैं।

तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों का मामला

फर्जी तबादला आदेश के दो बड़े मामले

अब निदेशालय से पुष्टि होने पर ही जारी होंगे आदेश

फर्जी तबादला आदेश पकड़ में आने के बाद शिक्षा विभाग सतर्क हो गया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक श्याम सिंह राजपुरोहित ने सभी जिला शिक्षाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि किसी भी प्रकार के स्थानांतरण आदेश प्राप्त होने पर निदेशालय से पुष्टि के बाद ही कार्यग्रहण और कार्यमुक्ति की कार्रवाई की जाएगी।

1. रीट-2018 भर्ती को लेकर सोशल मीडिया पर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के फर्जी आदेश वायरल हुए थे। उसमें रीट के लिए निर्धारित पदों काे लेवल प्रथम और लेवल द्वितीय में विषयवार दर्शाया गया था। तत्कालीन निदेशक पी.सी.किशन ने इन आदेशों को फर्जी बताया था। जांच के दौरान विभाग यह पता नहीं लगा सका कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और किसने किया।

2. वर्ष 2008 में पंचायतराज में बड़ी संख्या में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले हुए थे। उस वक्त पंचायतराज विभाग, जयपुर से 198 और 35 शिक्षकों के तबादलों की दो सूचियां जारी हुई थीं। बाड़मेर का एक शिक्षक सूचियां लेकर डीईओ प्रारंभिक कार्यालय पहुंचा था। दोनों सूचियां के आदेश क्रमांक क्रमश: 528-3708 तथा 528-18708 थे। स्कूल का नाम फर्जी होने पर संदेह हुआ तो तत्कालीन डीईओ ने पंचायतराज विभाग के उप शासन सचिव को लिखा। उपशासन सचिव ने दोनों ही आदेश फर्जी करार देते हुए कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए। उसके बाद कोटगेट पुलिस थाने में फर्जीवाड़े को लेकर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जयपुर में इस कार्य में लगे कर्मचारियों पर भी गाज गिरी। यह फर्जीवाड़ा डीईओ कार्यालय में तत्कालीन कर्मचारी रवि पारीक ने पकड़ा था।

कानूनी कार्रवाई के लिए एसपी को लिखा पत्र