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खराब अनाज, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिला सकेंगे

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 06:55 AM IST

Nagour News - कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक खराब हो चुके गेहूं-चावल, सड़े आलू, मक्का...

खराब अनाज, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिला सकेंगे
कैबिनेट ने बुधवार को नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी को मंजूरी दे दी। इसके मुताबिक खराब हो चुके गेहूं-चावल, सड़े आलू, मक्का और शकरकंद से बने एथनॉल को पेट्रोल में मिलाने की अनुमति होगी। इससे ईंधन के आयात के बिल में हर साल 4,000 करोड़ रु. तक कमी आएगी। अभी गन्ने से बने एथनॉल को ही पेट्रोल में मिलाने की अनुमति है। सरप्लस खाद्यान्न के इस्तेमाल की भी अनुमति दी गई है। लेकिन इसके लिए नेशनल बायोफ्यूल को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मंजूरी लेनी होगी।

बायोफ्यूल की तीन श्रेणी बनाई गई हैं। शीरे से बने एथनॉल और गैर-खाद्य तिलहन से बने बायो-डीजल को पहली पीढ़ी (1जी) में रखा गया है। नगरीय निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे से बना एथनॉल दूसरी पीढ़ी (2जी) का होगा। बायो-सीएनजी तीसरी पीढ़ी (3जी) का बायोफ्यूल होगा। सरकार गैर-खाद्य तिलहन, यूज्ड कुकिंग ऑयल और कम अवधि की फसलों से बायो-डीजल उत्पादन के लिए सप्लाई चेन मैकेनिज्म बनाने को बढ़ावा देगी।

कैबिनेट के अन्य फैसले

दाल निर्यात को मंजूरी, कुछ किस्मों के आयात पर ड्यूटी बढ़ाई : चने के निर्यात पर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत 7% इन्सेंटिव को मंजूरी दी गई है। चने पर 60%, पीले मटर पर 50% आयात इम्पोर्ट ड्यूटी लगाई गई है। मसूर पर इसे 10% से बढ़ाकर 30% किया गया है। 2016-17 में 66 लाख टन दालों का आयात हुआ, जो 2017-18 में यह 56.5 लाख टन रह गया था।

5,000 करोड़ का वायबिलिटी गैप फंड बनेगा : छह साल के लिए 5,000 करोड़ रुपए का वायबिलिटी गैप फंड बनेगा। इससे कंपनियों के नुकसान की भरपाई होगी। कंपनियां 1जी के मुकाबले 2जी एथनॉल की कीमत ज्यादा रख सकेंगी। उन्हें टैक्स इन्सेंटिव भी मिलेगा।

एथनॉल से आयात बिल में सालाना 4,000 करोड़ की बचत : एक करोड़ लीटर बायो-एथनॉल पेट्रोल में मिलाने से तेल आयात बिल में 28 करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इस वर्ष 150 करोड़ लीटर एथनॉल की सप्लाई होने की संभावना है। इसके मुताबिक आयात बिल में 4,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत होगी।

लघु सिंचाई के लिए 5,000 करोड़ रुपए का फंड : लघु सिंचाई (माइक्रो इरिगेशन) में ज्यादा जमीन लाने के लिए नाबार्ड के अधीन 5,000 करोड़ का फंड बनेगा। इसमें 2,000 करोड़ इस साल के लिए और 3,000 करोड़ 2019-20 के लिए हैं। नाबार्ड कम ब्याज पर राज्यों को पैसे उपलब्ध कराएगा। योजना के तहत 3 फीसदी ब्याज पर कर्ज दिया जाएगा। अभी लघु सिंचाई के दायरे में सिर्फ एक करोड़ एकड़ भूमि है, जबकि क्षमता 7 करोड़ एकड़ की है।

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