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नागौर की 10 में से 6 सीटों पर 8 बार नेताओं ने लगाई जीत की हैट्रिक, इस बार भी 4 है दौड़ में

Nagour News - भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी पहले विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक 66 साल में 14 विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं। इस...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:11 AM IST
Merta News - nagaur has won 8 out of 10 seats in the 10 seats of the leaders this is also 4 in the race
भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

पहले विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक 66 साल में 14 विधानसभा के चुनाव हो चुके हैं। इस दौरान जिले की 10 विधानसभा सीटों में से केवल 6 सीटों पर 8 नेताओं ने अपनी जीत की हैट्रिक लगाई है। यानी 6 विधानसभा सीटों पर 8 नेताओं ने लगातार 3-3 बार विधानसभा में पहुंचकर एक ही सीट का प्रतिनिधित्व किया है। इसमें से डेगाना ही एकमात्र ऐसी सीट है जहां दोहरी ही नहीं तिहरी हैट्रिक भी लग चुकी है।

डेगाना सीट से 3 अलग-अलग नेता अपनी जीत की हैट्रिक पूरी कर चुके हैं। इस बार यदि भाजपा के प्रत्याशी अजयसिंह किलक चुनाव जीतते हैं तो डेगाना में 4 हैट्रिक का रिकॉर्ड बन जाएगा। इधर, 5 सीटें ऐसी भी है जहां नेताओं ने भले ही 2 से ज्यादा चुनाव जीते हैं, लेकिन लगातार 3 बार जीत हासिल कर हैट्रिक बनाने से चूक गए। जिले में नागौर, लाडनूं, डीडवाना, मकराना, खींवसर सीटों पर अब तक कोई भी नेता लगातार 3 चुनाव नहीं जीत पाया है। दरअसल, हैट्रिक की शुरुआत डेगाना सीट से ही शुरू हुई। यहां सबसे पहले गौरी पूनिया ने जीत की हैट्रिक लगाई। उन्होंने इस सीट से 1957, 1962, 1967 के चुनाव में जीत हासिल की। इसके बाद इसी सीट से सन 1972, 1977 और 1980 के चुनाव में 2 बार कांग्रेस व 1 बार कांग्रेस यू की टिकट पर लगातार जीत दर्ज करते हुए रामरघुनाथ चौधरी ने हैट्रिक लगाई। इस सीट से लगातार 4 बार विधायक रहने वाले रिछपालसिंह मिर्धा ने 1990, 1993, 1998, 2003 के चारों चुनाव जीते।

हालांकि उसके बाद के दोनों चुनाव में पराजित रहे और इस चुनाव में उनके बेटे मैदान में है। इस बार के विधानसभा चुनावों को लेकर भी कई सीटों पर अब भी रोचक स्थिति बनी हुई है। हालांकि मतगणना 11 दिसंबर काे होगी और इसी दिन जिले की 10 विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे 110 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला भी हो जाएगा। लेकिन इन सबके बीच कई समर्थकों को अपने पसंदीदा उम्मीदवार के जीत की हैट्रिक लगाने का भी इंतजार है। लेकिन इसका खुलासा 11 दिसंबर को होने वाली मतगणना के बाद ही पाएगी। हालांकि फिलहाल प्रत्याशी, उनके समर्थक अपने-अपने क्षेत्र में हुई पोलिंग के आधार पर हार-जीत के आंकलन कर रहे है। लेकिन इसका खुलासा 11 दिसंबर को ही हो पाएगा।

हबीबुर्रहमान मूंडवा से पहले लगा चुके हैं जीत की हैट्रिक, अब नागौर से तैयारी

संयोग: 4 नेताओं ने लगातार जीते 1972 से 1980 के 3 चुनाव

नावां में रामेश्वरलाल चौधरी ने 1972 से 1980 तक लगातार 3 बार जीतकर हैट्रिक तो लगाई। साथ ही 1993 में चौथी बार विधायक भी बने। इसी प्रकार परबतसर सीट पर जेठमल ने 1972 से 1980 तक लगातार 3 बार और इससे पूर्व 1962 में भी पहली बार परबतसर से ही जीत हासिल करने में कामयाब रहे। मेड़ता सीट पर 1972 से 1980 तक रामलाल 2 बार कांग्रेस से और एक बार कांग्रेस यू से विधायक बने। इनके अलावा इस अवधि में डेगाना से रामरघुनाथ चौधरी भी हैट्रिक लगा चुके हैं। जायल विधानसभा सीट से मोहनलाल बारुपाल 1985 से 1998 तक के 4 विधानसभा चुनाव लगातार जीते। परिसीमन से पूर्व रही मूंडवा सीट से हबीबुर्रहमान 1990 से 1998 तक लगातार 3 चुनाव जीते। वे एकमात्र ऐसे नेता हैं जो अब अन्य सीट पर भी हैट्रिक बनाने की दौड़ में हैं।

विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा, कांग्रेस और रालोपा के 4 प्रत्याशी ऐसे हैं, जो विधानसभा में पहुंचने की हैट्रिक लगाने की दौड़ में शामिल है। खींवसर से रालोपा के हनुमान बेनीवाल, परबतसर से मानसिंह किनसरिया और डेगाना से अजयसिंह किलक लगातार दूसरी बार विधायक है। इस बार जीते तो हैट्रिक बन सकती है। इसी चुनाव में नागौर सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हबीबुर्रहमान परिसीमन से पूर्व रही मूंडवा सीट से हैट्रिक बना चुके हैं। अब नागौर से भी लगातार 2 बार जीतने के बाद इस बार हैट्रिक की दौड़ में शामिल हैं।

हैट्रिक से चूके : इन 5 सीटों पर 6 नेताओं ने 3 से ज्यादा चुनाव जीते

जिले में एक ही सीट पर सर्वाधिक 6 बार विधायक बनने का गौरव लाडनूं सीट पर हरजीराम बुरड़क को हासिल हुआ है। हालांकि वे भी हैट्रिक से चूक गए थे। उन्होंने 1977 व 1980 के दो चुनाव में लगातार जीत हासिल की। इसके अलावा हर दूसरे चुनाव में वे लगातार नहीं जीते। इसी सीट से मनोहरसिंह भी 3 बार विधायक बन चुके हैं। नावां से हरीश कुमावत 4 बार विधायक बने, लेकिन 2-2 चुनाव लगातार जीते, तीसरी बार नहीं। परबतसर से मोहनलाल चौहान भी 3 बार विधायक बनने वालों में शामिल है, पर ये तीनों चुनाव लगातार नहीं जीत पाए। इधर, डीडवाना सीट पर मथुरादास माथुर और मेड़ता से नाथूराम मिर्धा भी 3-3 बार विधायक बने। लेकिन लगातार उसी सीट से नहीं चुने गए। हालांकि वे अलग-अलग सीटों से लगातार विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे।

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