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1 करोड़ टैक्स और वसूलने की धमकी दे 2 अफसराें व सीए ने मांगे थे 20 लाख
आयकर विभाग में भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद बड़े अधिकारियों के भी लिप्त होने की बात सामने आ रही है। व्यापारी को रिश्वत की पूरी राशि सुपुर्द करने के बाद आरोपियों ने जोधपुर के एक बड़े अधिकारी से मिलवाने का झांसा दिया गया था। ताकि उसे विश्वास हो जाए कि उसकी दी हुई रकम बड़े अफसरों तक पहुंच चुकी है और आगे भी कार्रवाई नहीं होगी। आयकर विभाग के अधिकारियों और सीए ने मिलकर सारा नेक्सस बना रखा था। इसी के तहत शहर के व्यापारियों को धमकाने का काम किया जाता था। धौंस दिखाने आयकर विभाग के अधिकारियों को फोन तक किए जाते ताकि व्यापारी डर जाए और कर चोरी नहीं करने पर भी चंगुल में फंस जाए। इसके बाद रिश्वत का खेल शुरू होता। भास्कर की पड़ताल में एक जानकारी यह भी सामने आ रही है कि जिले में आयकर सर्वे भी शक के दायरे में आ सकते है। जहां करोड़ों रुपए का सर्वे बता कर उसकी 30 फीसदी तक की वसूली की जाती। यह काम लंबे समय से आयकर विभाग में जमे अफसरों के माध्यम से किया जा रहा था। सीबीआई ने सबसे पहले सीए और इन अफसरों की रेपुटेशन व मॉडस आपरेंडी की जांच की तो उन्होंने पाया कि इन लोगों का ‘नेक्सस’ बना हुआ है।
स्टॉक बढ़ा कर दिखाने की धमकी के बाद डील तय, फिर बातचीत रिकॉर्ड करवाई
4 मार्च को परिवादी की फर्मों पर सर्वे की कार्रवाई शुरू की थी। उन्होंने परिवादी को कहा कि- बुक्स में जितना स्टॉक बता रखा है, असल में यह उससे कई गुना ज्यादा है। इस पर व्यापारी ने अपने सीए को बुलाया। यह नेक्सस और वसूली चाहता था, इसलिए उन्होंने परिवादी को उसका स्टॉक बढ़ाने की धमकी दे दी। तब परिवादी को इस नेक्सस का पता चला। उसने सीबीआई को बताया और सीए के घर पर रिश्वत की पूरी बातचीत रिकॉर्ड कराई।
आयकर विभाग में सर्वे का पूरा सच: अारोपियों ने व्यापारी से वसूली कर दिया था बड़े अधिकारी से मिलवाने का झांसा
व्यापारी की फाइलें भी इसी सीए के पास थी और वही अफसरों के लिए दलाल बनकर उसके पास पहुंचा था। उसी ने बताया कि अभी तो 1.06 करोड़ का ही स्टॉक अघोषित माना है। यह चार करोड़ तक मान सकते हैं, तो समझ लो चार गुना टैक्स और भरना पड़ेगा। इसलिए करीब 1 करोड़ बचाने हैं, तो 20 लाख देने होंगे। यह बात सीबीआई द्वारा की गई वेरिफिकेशन और पूछताछ में उजागर हो चुकी है। अब अन्य सर्वे में हुए लेनदेन की जांच होगी।
स्टॉक के अलावा 13 लाख रुपए का अघोषित कैश भी
आयकर सूत्रों के अनुसार मणिहारी कारोबारी समूह पर हुई आयकर सर्वे की कार्रवाई के दौरान ग्रुप की चारों फर्मों का मिलाकर करीब 13 लाख रुपए अघोषित कैश भी मिला, जिसका अकाउंटिंग बुक्स में कोई उल्लेख नहीं था। यानि इस समूह के यहां 1.06 करोड़ का स्टॉक और 13 लाख की नकदी सहित कुल 1.19 करोड़ की अघोषित आय उजागर हुई थी।
आगे क्या : सत्यापन की कार्रवाई में भी दूसरे आईटीओ का नाम
परिवादी ने 11 मार्च को सीबीआई से संपर्क किया तो वे दोपहर 3 बजे नागौर पहुंचे। हाथी चौक में सीए पारीक के ऑफिस में परिवादी व सीए के बीच लेनदेन की बात सीबीआई टीम ने रिकॉर्ड कराई। बातचीत में सीए ने दूसरे आईटीओ राजेंद्र को हिस्सा देने का कहा था। इसलिए सीबीआई ने चारों पर केस दर्ज किया था। मीणा की जांच अभी जारी है।
नागौर. दोनों अधिकारी और सीए अभी रिमांड पर है।