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221 साल पहले महिलाओं ने फ्रांस में पहली लड़ाई लड़ी...तब से शिक्षा, शादी, वोटिंग, संपत्ति हर हक लड़कर लिया, समाज ने सहजता से उन्हें कुछ नहीं दिया

एक वर्ष पहले
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कभी हिंसक आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया, परमाणु हमले के खिलाफ पहली हड़ताल की

महिलाओं ने कभी हिंसक आंदोलन नहीं किया। परमाणु बम के खिलाफ भी पहली आवाज इन्होंने ही उठाई। 1961 में न्यूक्लियर टेस्ट के खिलाफ अमेरिका के 60 शहरों में 50 हजार महिलाओं ने हड़ताल की थी। इसके अलावा सामाजिक मुद्दों के प्रति भी महिलाएं ज्यादा संवेदनशील रही हैं। क्लाइमेंट चेंज दुनिया के सामने आज सबसे बड़ा मुद्दा है। पर्यावरण की बेहतरी के लिए काम करने वाली ग्रेटा थनबर्ग और रीटा हार्ट, दोनों ही महिलाएं हैं।

1848 में न्यूयॉर्क में वोटिंग के हक के लिए आंदोलन किया, 72 साल संघर्ष के बाद मिला

1848 में न्यूयॉर्क में महिलाओं ने वोटिंग के हक के लिए आंदोलन शुरू किया। 1908 में न्यूयॉर्क में ही 15 हजार महिलाओं ने मार्च निकाला। 1909 में पहली बार महिला दिवस मनाया गया। 1920 में अमेरिका ने महिलाओं को वोटिंग अधिकार दे दिया। 1975 में यूएन ने महिला दिवस को मान्यता दी और 1977 में यूएन जनरल असेंबली ने तय किया कि 8 मार्च महिला अधिकारों के लिए समर्पित होगा। आज 15 देशों में 8 मार्च को अवकाश होता है।

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी पहली महिला क्रांति को समर्पित, फ्रांस ने अमेरिका को गिफ्ट दिया था

1789 की फ्रांस की क्रांति में महिलाओं ने समानता के लिए पहला आंदोलन किया। महिलाओं ने 60 क्लब बनाए, जिसमें द सोसाइटी ऑफ रिवॉल्यूशनरी एंड रिपब्लिकन वुमन क्लब काफी चर्चित था। महिलाओं ने शिक्षा, पति चुनने, वोटिंग और असेंबली में चुनाव का हक मांगा था। नई सरकार ने उनकी मांगें मानी और विवाह को सिविल कानून के तहत मान्यता दी। स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी इसी महिला क्रांति को समर्पित है, जिसे 1886 में फ्रांस ने अमेरिका को उपहार में दिया था।

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